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विद्यापति केँ मिथिला मे ‘सांस्कृतिक-देवता’ स्वरूपें पूजल जाइत छनि

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लेख विचार
प्रेषित: मंजूषा झा

विषय —  कवि कोकिल विद्यापति :-

जीवन, काव्य, भाषा, भक्ति आ सांस्कृतिक योगदान”

**विद्यापति: जीवन, काव्य, भाषा, भक्ति आ सांस्कृतिक योगदान अविस्मरणीय छनि

1. प्रस्तावना
भारतीय साहित्यक इतिहास मे मिथिला सदियों सँ दर्शन, न्याय, तर्क, व्याकरण आ काव्य-परंपराक समृद्ध केंद्र रहै अछि। एही भूमि पर अनगिनत विद्वान जन्म लेने, मुदा 14वीं शताब्दी मे एक एहम नाम उभरि केँ संपूर्ण भारतीय साहित्यक इतिहास केँ नया आयाम देलक—कवि-कोकिल विद्यापति ठाकुर।

विद्यापति केवल मैथिली काव्यक आधार-स्तंभ मात्र नहि, बल्कि संस्कृत, अवहट्ट, लोकभाषा, संगीत आ भक्ति परंपराक महान पुरोधा छलाह। हुनकर काव्य, नीति-शास्त्र, शिव-भक्ति, प्रेम-श्रृंगार आ लोकभाषा-प्रयोग साहित्यक क्षितिज पर एहेन छाप छोड़ि देलक जे शताब्दियो केर बादो ओ अमिट अछि।

मिथिलाक सांस्कृतिक चेतना मे विद्यापति केवल कवि नहि—ओ एक परंपरा, एक भावभूमि, एक आध्यात्मिक अनुभव छथि।
ई निबंध विद्यापति जीक जीवन, साहित्य, भाषा, सामाजिक प्रभाव आ वर्तमान महत्त्वक समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करैत अछि।

2. जन्म, परिवार आ प्रारंभिक शिक्षा
जन्म-तिथि आ स्थान
इतिहासकार विद्यापतिक जन्म 1352 ई. के आसपास मानैत छथि।
हुनकर जन्म मिथिला के बिस्फी गाम (जिला–मधुबनी) मे भेल। मिथिला तखन राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक आ शैक्षणिक रूपेँ सुविकसित क्षेत्र छल।

• वंश-पृष्ठभूमि
विद्यापति जी एक प्रतिष्ठित कायस्थ परिवार सँ छलाह।

• पिता: गणपति ठाकुर — दरभंगा राजक प्रतिष्ठित अधिकारी

• माता: लक्ष्मी देवी

कायस्थ परिवार सामान्यतः प्रशासन, लेखा, कूटनीति आ न्यायिक पद पर कार्यरत रहैत छल। एहि वातावरणमे विद्यापति जन्मल, जे हुनका राजनीतिक सूझबूझ आ साहित्यिक संस्कार प्रदान केलक।

शिक्षा-दीक्षा
बाल्यावस्था सँ विद्यापति अत्यंत मेधावी छलाह।
हुनकर शिक्षा मे—

• संस्कृत व्याकरण

• न्याय-मीमांसा

• तर्कशास्त्र

• संगीत

• ज्योतिष

• अवहट्ट

• लोकभाषा (मैथिली)

सब शामिल रहै। ई विविध ज्ञान विद्यापति केँ ओहि समयक बहुमुखी प्रतिभा बनेलकनि।

3. राजदरबार मे भूमिका
विद्यापति अपन युवावस्था सँ दरभंगा राजक महत्वपूर्ण अंग भऽ गेलाह।
ओ राजदरबार मे—

• राज- सचिव,

• मंत्री,

• कूटनीतिज्ञ,

• राजकवि

जेकां अनेक भूमिका निभेलाह।

किरण सिंह आ शिवसिंहक काल
विशेष रूपेँ राजा शिवसिंह विद्यापति जीक अद्भुत प्रशंसक छलाह। ओ हुनकर प्रत्येक सलाहक मूल्य बुझैत छलाह। शिवसिंहक रानी लखिमा देवी सेहो विद्यापति केँ सर्वाधिक सम्मान दैत छलीह।

राजनैतिक यात्राएँ
राज्य-कार्यक सिलसिला मे विद्यापति अनेकहु स्थान पर गेलाह—

• नेपाल

• बंगाल

• तिरहुत

• कामरूप

• भागलपुर

• गंगा-मैदानक नगर

एहि यात्रासभक प्रभाव विद्यापति जीक काव्य मे व्यापक रुपमे, मानव-स्वभावक गहराइ आ प्रकृति-चित्रणक विविधता के रूप मे प्रकट भेल।

4. विद्यापति जीक भाषाई योगदान
विद्यापति जी त्रिभाषी लेखक छलाह—

• मैथिली

• संस्कृत

• अवहट्ट

हुनका जनक-स्तरक भाषा-विशेषज्ञ मानल जाएछ।

(1) मैथिली भाषा के समृद्धि
विद्यापति पहिल कवि छलाह जे मैथिली भाषा के साहित्यिक प्रतिष्ठा देलनि।
हुनकर मैथिली उत्स्फूर्त, संगीतात्मक, कोमल आ भावमय छनि।

विद्यापति-गीत आइओ मिथिलाक कीर्तन, नृत्य, गीत, विवाह-समारोह आ धार्मिक अवसर पर गायल जाएत अछि। ई बात सिद्ध करैत अछि जे मैथिली भाषा के जनभाषा बनेबाक श्रेय बड्ड पैघ पैमाना पर विद्यापति केँ जाए छनि।

(2) अवहट्ट साहित्यक परंपरा
अवहट्ट हिंदी-उद्भव क पूर्व-चरण मानल जाएत अछि। विद्यापति अवहट्ट मे

• प्रेमगीत

• नीति

• दार्शनिक चिंतन

• नख-शिख वर्णन

रचि अवहट्ट भाषा के उन्नत कए देलन्हि।

(3) संस्कृत कृति
विद्यापति संस्कृत मे—

• राजनीति

• धर्म

• शैववाद

• दार्शनिक

• नीतिशास्त्र

• आध्यात्मिक चिंतन

पर अद्भुत ग्रंथ लिखलन्हि, जे हिनका बृहद् विद्वान सिद्ध करैत अछि।

5. विद्यापति जीक साहित्य (रचनासूची)
(A) मैथिली रचना
• विद्यापति पदावली

• (प्रेम-गीत)

• शिव-गीत (भक्ति)

• भगवती कीर्तन

• गोपिका-गीत

(B) संस्कृत रचनासभ-
• किरणावली

• पुरुष-परीक्षा

• दैवज्ञ-विज्ञान

• दुर्गाभक्ति-तरंगिणी

• वैष्णव-सर्वस्व

• शैव-सर्वस्व-सार

• भोग-निरूपण

• अभिलाषा-सप्तक

• कुट्टनी-मत्त

(C) अवहट्ट रचनासभ
• लीलावली

• गुणमाला

• नखशिख-वर्णन

• रस-गीत

6. विद्यापति काव्य मे विषय-वस्तु
विद्यापति क काव्य तीन मुख्य धारामे विभाजित होइत अछि—

(1) श्रृंगार-प्रेम
राधा-कृष्णक प्रेम विद्यापति जीक काव्यक सर्वाधिक मधुर क्षेत्र अछि।
हुनकर श्रृंगार-गीत मे—

• कोमलता

• विरहक पीड़ा

• मिलनक उल्लास

• राधाक मान

• कृष्णक चपलता

सबक जीवंत चित्रण भेटैत अछि।

उदाहरण पद
“किओ नै बूझय हे सखि मोर पिया …”
—ई पद मे राधाक अंतर्मनक कोमलता अद्भुत रूप सँ व्यक्त अछि।

(2) भक्ति-सागर
विद्यापति विशेष रूपेँ शैवभक्त छलाह।
ओ अपन व्यक्तिगत जीवनमे शिवक अनन्य उपासक बनलाह।

हुनकर प्रसिद्ध

• शिव-गीत—

•“जय-जय भैरव”

•“गौरी-गंभीर”

•“हर-हर महादेव”

सहज-अभंग भक्ति के प्रस्तुत करैत अछि।

(3) नीति, समाज आ राजनीति
‘पुरुष-परीक्षा’ भारतीय नीति-साहित्यक महत्वपूर्ण ग्रंथ अछि।
ई ग्रंथ निम्न विषयक विवेचन करैत अछि—

• योग्य पुरुषक गुण

• राजा-प्रजा संबंध

• धर्म-नीति

• सामाजिक उत्तरदायित्व

• कूटनीतिक चातुर्य

7. विद्वत्व, दर्शन आ आध्यात्मिकता
विद्यापति केवल गीतकार नहि, अपितु—

•दार्शनिक,

•आध्यात्मिक चिंतक,

•सामाजिक विश्लेषक,

•भाषावैज्ञानिक

सेहो छलाह।

हुनकर काव्य मे वैदिक-उपनिषदिक चिन्तनक छाप सेहो देखल जाएत अछि।
विशेष रूप सँ  —

• जीव-अजीव

• आत्मा–परमात्मा

• भक्ति–ज्ञान–कर्म

• मोक्ष-मार्ग

पर गहींर पकड़ भेटैत अछि।

8. कला, संगीत आ लय
विद्यापति-गीत भारतीय संगीत परंपराक अनमोल संपदा अछि।
हुनकर पद—

• लयात्मक

• मधुर

• अलंकारपूर्ण

• नृत्य-योग्य

• भाव-समृद्ध

सँ परिपूर्ण अछि।

• लय-विशेषता
• दोहा

• चौपाई

• सवैया

• झूमर

• धमार

• कीर्तन-लय

सभटा केर सहज रूप हुनकर गीत मे भेटैत अछि।
एखनहुँ दरभंगा-घरणा (क्लासिकल म्यूजिक) मे विद्यापति पदक विशेष स्थान अछि।

9. चैतन्य महाप्रभु पर विद्यापति क प्रभाव
बंगालक महान संत श्री चैतन्य महाप्रभु विद्यापति पदावलीक अत्यधिक प्रशंसक छलाह।
ओ अपन कीर्तन-समूह मे विद्यापतिक गीत गवाबैत छलाह।

ई तथ्य प्रमाणित करैत अछि जे विद्यापति काव्य के प्रभाव मिथिला सँ निकलि—

• बंगाल

• असम

• ओड़िशा

• नेपाल

धरि व्यापक रूपसँ पसरि गेलनि।

10. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव
विद्यापति जीक काव्य 600 वर्षक बादो जीवित अछि।
मिथिलाक—

• विवाह

• उपनयन

• मूड़न

• कातिक-नहाय-खाय

• सामूहिक कीर्तन

• नृत्य

• पाबनि–तिहार

  • सभमे विद्यापति पद गाएल जाएत अछि।
    हुनका “सांस्कृतिक-देवता” जेकां मानल जाएत छनि।

11. भारतीय साहित्यिक परंपरा मे स्थान
भारतक इतिहास मे विद्यापति तीन प्रमुख कालखंड के जोड़ैत छथि—

• पूर्व-भक्ति युग

• मध्य भक्ति युग

• नव-भक्ति युग (चैतन्यकाल)

हुनकर योगदानक आधार पर विद्यापति—

• तुलसीदास

• सूरदास

• मीरा

• कबीर

संग समकक्ष मानल जाएछ।

12. विद्यापति जीक अंतिम जीवन
विद्यापति अपन अंतिम जीवन पूर्णतः भक्ति-मय बितेलन्हि।
इतिहासक अनुसार हुनकर निधन 1448 ई. मे भेल।

निधन-स्थान लेल दुटा दृष्टिकोण अछि—

•बिस्फी (मिथिला)
•जनकपुर ( नेपाल)

हुनकर समाधि-स्थल पर आईओ लोक श्रद्धा अर्पित करैत छथि।

13. विद्यापतिक महत्त्वक आधुनिक परिप्रेक्ष्य
आजक समयमे विद्यापति—

• मिथिला भाषा आंदोलन

• आधुनिक लोक-संगीत

• नाटक

• फिल्म

• शोध-निर्देशन

• विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम

सभक मुख्य आधार बनल छथि।
विदेशी विश्वविद्यालय—

• क्योटो

• शिकागो

• ऑक्सफ़ोर्ड

• काठमांडू

मे विद्यापति पर गहन शोध चलि रहल अछि।

14. निष्कर्ष
विद्यापति जीक जीवन आ साहित्य केवल मिथिलाक धरोहर नहि, बल्कि संपूर्ण भारतक अमूल्य सांस्कृतिक-धन अछि।
आऽ ओ विश्वक धरोहर छथि—

• कवि

• दार्शनिक

• भक्त

• संगीतज्ञ

• भाषाविद्

• राजनैतिक चिंतक

सभ रूप मे अनुपम छलाह।

विद्यापति प्रेमक मधुरता, भक्ति क आस्था, भाषा क कोमलता, संगीतक माधुर्य आ दर्शनक गहराइ सभक एक विराट रूप देलन्हि। ओ एकटा एहेन सन कवि छथि जे काव्यक माध्यम सँ मानवीय संवेदनाक सगरो आयाम उजागर करैत छथि।

विद्यापति जी मिथिला मात्र नहि—
संपूर्ण भारतीय सभ्यताक आत्मा छथि।

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