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औषधिय गुणक पौती छी तुलसी केर गाछ

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लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- तुलसी केर महत्व

तुलसी: भारतीय संस्कृतिक पूजनीय अमृत

भारतीय संस्कृति आ अध्यात्ममे तुलसीक जे स्थान भेटल अछि, ओ कोनो आन पौधा के नहि भेटल अछि। ई मात्र एकटा गाछ नहि, बल्कि साक्षात देवी स्वरूप आ पूजनीय अछि। मिथिला सहित पूरा भारतमे प्रायः हरेक घरक आँगनमे या तुलसी चौरा पर एहि पावन गाछक वास होइत अछि। तुलसी के ‘वृंदा’ सेहो कहल जाइत अछि। एकर पूजाक महत्व खाली धार्मिक नहि, बल्कि वैज्ञानिक आ स्वास्थ्यक दृष्टि सँ सेहो अति महत्त्वपूर्ण अछि।

१. धार्मिक आ आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक ग्रन्थमे तुलसी के साक्षात माता लक्ष्मीक रूप मानल गेल अछि। ई भगवान विष्णुक अत्यन्त प्रिय छथि, तेँ हिनका हरिप्रिया सेहो कहल जाइत छैन्ह।

विष्णु पूजामे अनिवार्य: भगवान विष्णु, श्री कृष्ण वा कोनो भी नारायण स्वरूपक पूजामे तुलसी दल (पात) अर्पित करब अनिवार्य होइत अछि। तुलसी बिना भगवानक भोग अपूर्ण मानल जाइत अछि।

पाप-नाशक आ मोक्षप्रद: मानल जाइत अछि जे तुलसीक दर्शन मात्र सँ सेहो पाप नष्ट होइत अछि। स्कन्द पुराणक अनुसार, तुलसीक सेवा, पूजा आ ओकरा धारण करबा सँ स्वर्ग आ मोक्षक प्राप्ति होइत अछि।

सौभाग्य आ समृद्धि: जाहि घरमे तुलसीक नियमित पूजा होइत अछि, ओतय सकारात्मक ऊर्जाक वास रहैत अछि। ओहि घरसँ कलह आ दरिद्रता के दूर क’ सुख-शांति आ समृद्धि लबैत अछि।

तुलसी-विवाह: कार्तिक मासमे तुलसीक विवाह शालीग्राम (भगवान विष्णुक स्वरूप) सँ कराओल जाइत अछि। ई पर्व सुखद वैवाहिक जीवन आ संतान प्राप्तिक लेल अति महत्त्वपूर्ण मानल जाइत अछि।

२. वैज्ञानिक आ औषधीय गुण

तुलसीक आयुर्वेदमे ‘जड़ी-बूटि के रानी’ कहल गेल अछि। एकर औषधीय गुण अनमोल अछि।

वातावरण शोधन: तुलसीक गाछ कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषित क’ पर्याप्त मात्रामे ऑक्सीजन छोड़ैत अछि, जे वातावरण के शुद्ध रखैत अछि।

रोग प्रतिरोधक क्षमता: तुलसी सर्दी, खाँसी, बुखार, आ श्वास सम्बन्धी बीमारीमे अत्यन्त लाभदायक अछि। एकर नियमित सेवन शरीरक रोग प्रतिरोधक क्षमता के मजबूत करैत अछि।

तनाव मुक्ति: तुलसीक पातमे एहन तत्व होइत अछि जे मानसिक तनावकेँ कम करैत आ मनकेँ शांत रखैत अछि।

३. मिथिला मे तुलसीक विशेष स्थान

मिथिलामे तुलसी चौराक महत्व सर्वोपरि अछि। साँझक समयमे तुलसीक गाछ लग घी के दीप प्रज्वलित करब दिनचर्याक महत्वपूर्ण अंग मानल जाइत अछि। मिथिलाक लोक तुलसीमे जल द’ आ परिक्रमा क’ अपन दिनक शुरुआत करैत छथि। ई मान्यता अछि जे तुलसीक सेवा करबा सँ घरक सभ संकट दूर भ’ जाइत अछि।

तुलसी: भारतीय संस्कृतिक पूजनीय अमृत थीक। ई हमर सभक स्वास्थ्य, अध्यात्म आ पर्यावरण के एक सूत्र मे बान्हैत अछि। तुलसीक गाछमे समाहित दैवी शक्ति आ औषधीय गुणक कारणेँ ई पौधा भारतीय समाज मे ‘कल्याणकारिणी’ आ ‘जीवनदायिनी’ के रूपमे प्रतिष्ठित अछि, जे हमर सभक जीवनमे सुख, आरोग्य आ पवित्रता लबैत अछि। जय मिथिला, जय मैथिली।

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