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भाई बहिन कऽ सुभकामना लेल मनबैत अछि ई पाबनि : सामा चकेबा

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लेख विचार
प्रेषित: दीपा शेखर झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मिथिला केर सामा चकेबा पावनि

सामा चकेबा भाई बहिनक अटूट प्रेमक प्रतीक पाबैन अछि, मिथिला मे बड़ धूमधाम सऽ मनाओल जाईत अछि। समा चकेबा पाबनिक शुरुआत कार्तिक मासक शुक्लपक्षक पंचमी से होइत अछि आ कार्तिक पूर्णिमा कें समा के जोतला खेत मे भसा देल जाइत अछि ।
सामा कृष्णक पुत्री आ शाम्ब कृष्णक पुत्र पौराणिक कथाक अनुसार कहल जाईत अछि जे सामा मुनि के सेवा करय बृंदावन जाईत छलीह , ई बात चुगला के नहि जचलै आ ओ भगवान कृष्ण लग आबि चुगल खोड़ी केलक जे सामा मुनि सऽ प्रेम करय छथि । ई गप्प सुनि कृष्ण कें तामस उठलन्हि आ ओ सामा के श्राप देलखिन्ह जे अहाँ चिड़ै बनि जाऊ सामा चिड़ै बनि गेलीह।
समा के पति तप कय महादेव के प्रसन्न कएलन्हि आ वरदान मँगलन्हि जे हमहुं चिड़ै बनि जाय महादेव प्रसन्न भय हुनका चिड़ै बना देलखिन्ह। शाम्ब के जखन ई बात पता चललन्हि तऽ बहुत दुःखी भेलाह, बहिन बहनोई के खोजैत खोजैत मिथिला पहुंची गेलाह। तप कय कृष्ण भगवान के प्रसन्न कय अप्पन बहिन बहनोई के चिड़ै जीवन सऽ मुक्ति दियेलैथ।
ओहि दिन सऽ भाई बहिनक ई पवित्र पाबैन मनाओल जाईत अछि। पंद्रह दिन चलै वाला ई पाबैन मिथिलाक हर घर आँगन में मनाओल जाईत अछि।
चिकनी माटि सऽ सामा, चकेबा,सतभईया,वन तीतीर झांझी कुकुर, चुगला बृंदावन कतेको तरहक चिड़ै चुनमुन बनाओल जाईत अछि । चँगेरा मे सामा चकेबा के राखि साँझ मे नव धानक सीस आ दूभि चटाओल जाईत अछि दीप देखा लोक गीत गाओल जाईत अछि गाम कें अधिकारी बड़का भैया हे…. सामा खेल गेलियै भाई के आँगन हे….. गे माई अरही वन सऽ खड़ही कटाओल….. बहिन सब भाई सबहक दिर्घायुक कामना करैत समा खेलाईत छथि।
चुगला चुगलखोड़ी केने रहय तें ओकरा गारि पढ़ै छथि आ आगि मे झरकाबै छथि। बृंदावन मे सेहो आगि लगाबै छथि बृंदावन मे आगि लागल कियो ने मिझाबय हे हमर सबै भैया मिझाबय हे… देवोत्थान एकादशी के दिन सामा के कहोतिया अबै छन्हि सिन्दूर पिठार आ रंग सऽ रांगल जाईत छन्हि ।
कार्तिक पूर्णिमा के राति भगवती गीत समदाओन गीत गाबि चुड़ा दही गुड़ सऽ मुंह झुठैल जाईत छन्हि माटिक पौती में धान दूभी आ श्रृंगारक समान दय चुनरी ओढ़ा विदाई गीत गाओल जाईत अछि।
सामा जाई छथि सासूर किछु गहना चाहि रे डिहुली सब बहिनक आँखि मे नोर भरि जाईत छन्हि। भैया सब चूड़ा गुर अप्पन फांड़ मे बान्हि एकादशी दिन आँगन मे परल अष्टदल पर सामा चकेबा के ठेंहुन लगा फोड़ै छथि तखन बहिन सब दलान पर जोतला खेत मे भसा दै छथि अप्पन भाईक दिर्घायुक कामना करय छथि अगिला साल फेर आयब सामा कहि दू माटिक ढ़ेप उठा भारी मोन सऽ आँगन अबैत छथि । जेना बेटीक द्विरागमनक बाद आँगन सुन्न भऽ जाईत अछि तहिना सामा भसाओन के बाद आँगन सुन्न भऽ जाईत अछि। तीस बरख सऽ ऊपर भऽ गेल सामा खेलेनाइ बच्चा मे बहुत सामा चकेबा खेलाई छलौंह। आब शहर मे सामाक सांस्कृतिक कार्यक्रम होइत अछि शामिलो होइत छी लेकिन गाँव सन रमनगर कहाँ होईत छै। हर बेर सामा चकेबा पाबैन मे बचपन के मोन पाड़ैत छी आ मोने मोन गीत गाबैत छी। सब भाईक दिर्घायुक कामना करय छी। सब भाई बहिन कें सामा चकेबा पाबनि कें हार्दिक शुभकामना दैत अछि।

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