लेख विचार
प्रेषित: रजनी झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- मिथिला केर पावनि : सामा चकेबा
आएल कार्तिक मास हो भैया ,सामा लेल अबतार !
मिथिला के परम्परिक सामा चकेवा हमर मिथिला के लेल एक महत्वपूर्ण दिवस अछि हम सब सामा छठ के पारण दिन सँ खेलाइत छी जे की कार्तिक पूर्णिमा तक खूब हर्ष उल्लासक संग मनबै छी अहि सामा चकेवाक बहुत गीत भाई बहिन आ ननैद भौजी के लेल होइत अछि इ सब गांव घर मे बहुत लोक एक संग बहुत गोटे डाला मे सामा,चकेवा,सतभईया, पौती,पैटर, चुगला,वृंदावन, चुगला सजा कऽ अनेक प्रकारक गीत गाबैत अछिसामा के डाला मे दुभि, धान सेहो परैत अछि ।
आब समय बदैल रहल अछि इ सब गाँव मे किछु देखय मे त भेटत पर बड्ड कम । लेकिन शहर मे तऽ किछो नै ।बहुत प्रकारक बहाना गीत नै आबै यै । समय नै रहैत अछि ।
सामा के विसर्जन कार्तिक पूर्णिमा के राति मे समदाउन गीत गाबिक करैत छथि दही चुराक भोग लगा क हुनका बिदा करै छियेन ।
सामचके सामचके अबीह हे अबीह हे
कुर खेत मे बैसिह हे बैसिह हे !
कोने भैया रोपल आमुन जामुन कोने भैया रोपाल गुलाब !
चुगला करे चुगलपन बिलईया करै मियाउं
वृन्दावन मे आगि लागल कियो नै मिझाबै हे
हमरो से सभे भैया काशी से आबे हे!!
जय सामा चकेबा।
