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भारतक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल द्वारा लोकतंत्र मे बाँटू आ शासन करू पद्धतिक बढावा सन्दर्भित बयान

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सच मे एकटा बहुते गम्भीर विषय!!

Photo Courtesy: NewsIn

सन्दर्भ – भारतक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल द्वारा लोकतंत्र मे बाँटू आ शासन करू पद्धतिक बढावा सन्दर्भित बयान

भारतक NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) अजीत कुमार डोभाल केर ई शानदार बयान पर ध्यान दियौक, जे लोकतंत्र आर ओकर मौजूदा पद्धतिक बारे मे अछि, जाहि मे लोकक प्रतिनिधि चुनिकय आ सरकार आ विपक्ष बनायल जाइछ आर फेर संवैधानि नियम व व्यवस्थाक मदति सँ लोक पर राज कयल जाइछ । कनेक देखू ओ कि कहलनि अछिः

“लोकतंत्र अपन समस्य अपने उत्पन्न कयलक अछि” । ई पक्षपातपूर्ण राजनीति केर जन्म दैत अछि । अगर १०० लोक अछि आ हमर समर्थक २५ सदस्य अछि, त हम सत्ता मे आबि सकैत छी, अगर बाकी लोक केँ हम २० सँ कम लोकक समूह मे बाँटि सकी ।”

एकर मतलब भेल जे सरकार चुनबाक मौजूदा संरचना ‘बाँटू आ शासन करू’ केर वैह मूलभूत परिकल्पना केँ अनुकरण करैत अछि, जेना कि पहिने सम्राज्यवाद द्वारा कयल गेल छल, जाहि सँ भारत व कतेको आन राष्ट्र सब ओहि सम्राज्यवादीक चपेट मे आबि गेल छल ।

जाति, रंग या धर्म केर आधार पर बाँटू, लेकिन शासक बनू आर नीक या बेजा ताबत धरि करू जाबत धरि अहाँ केँ फेर सँ लोकक सामना नहि करय पड़य । भारत १९४७-१९५० मे एकटा आज़ाद संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बनल, जेकर अपन संविधान २६ जनवरी १९५० केँ घोषित कयल गेल रहैक । तहिया सँ कतेको सरकार सब बनल अछिआर खुशकिस्मती सँ भारतक कुल मिलाकय तथा पैघ पैमाना पर तरक्की संतोषजनक साबित भेल अछि । मुदा राजनीतिक रूप सँ एहि देश मे एखनहुँ धरि लोकक बीच एकताक कमी अछि, चुनाव प्रक्रिया लोक केँ संघीय सरकार या प्रांतीय राज्यक सरकार सब चुनबाक लेल वैह सूत्र पर बांटैत रहैत अछि जेना कि श्री अजीत कुमार डोभाल कहलनि अछि ।

आउ हम सब विचार करी, एकर समाधान कि भ’ सकैत अछि !

हम अपन जिन्दगीक ५ दशक मे भारत आ नेपाल दुनू देश मे एहि राजनीतिक प्रक्रिया सभक अनुभव करैत एहि पर बहुत रास चिन्तन कयलहुँ । हमरा एकर हल एना लगैत अछि:

१. चुनाव केर प्रक्रिया केँ पुनर्समीक्षा करब आ एकटा कानून बनेबाक जरूरत अछि जे के चुनाव लड़ि सकैत अछि, कम सँ कम एकटा स्नातक डिग्री प्राप्त व्यक्ति या आम लोक द्वारा सामाजिक पहिचान प्राप्त लोक चुनाव लड़बाक योग्य होयत, जे लोकक प्रतिनिधि बनबाक योग्य उम्मीदवार होयत ।

२. प्रत्येक उम्मीदवार केँ लोक आ राष्ट्र केर कल्याण आ बेहतरी करबाक वास्ते अपन दृष्टिकोण केर संग किछु ठोस काज करबाक प्रतिबद्धता (शपथ पत्र) दियय पड़त ।

३. राजनीति लोकक इच्छा व आकांक्षा केँ पूरा करबाक उद्देश्य सँ हेबाक चाही । एहि लेल मात्र एकटा दृष्टिसम्पन्न लोक टा केँ चुनाव लड़बाक योग्य मानल जेबाक चाही ।

आर एहि तरहक – आउ पुनर्समीक्षा करैत छी जे १९४७-५० मे कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली द्वारा चुनाव प्रोसेस केर लेल केना आ कि सब चर्चा भेल छल । आब कि हेबाक चाही ।

हरिः हरः!!

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