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शिक्षक गुरु केर रूप मे भविष्यक समाज निर्माण करैत छथि

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लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :-संस्कार आऽ जीवन मूल्यक शिल्पकार “शिक्षक”
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मानव जीवनक विकास यात्रा मे शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन अछि। शिक्षा बिना मनुष्य अपूर्ण अछि आर शिक्षा प्रदान करनिहारक भूमिका शिक्षक पूरा करैत छथि। शिक्षक केवल ज्ञान देनिहार नहि, बल्कि संस्कार, मूल्य आऽ विचारक निर्माणकर्ता सेहो होइत छथि।

ताहि हेतु कखनो नहि बिसरी…
ज्ञानक दीप जरै जऽ संग,
गुरुक कृपा सँ होइ उज्ज्वल अंग।

“शिक्षक” शब्दक मूल अर्थ अछि जे छात्र-शिष्य केँ शिक्षा प्रदान करैत छथि। मुदा ई केवल विषय विशेषक जानकारी देबाक काज नहि, अपितु विद्यार्थी केँ जीवनक सही दिशा देखबैत, समाजक हितमे सोचबाक प्रेरणा दैत शिक्षार्थी के चरित्र निर्माण करैत छथि।
अपना सभक मैथिल परम्परा मे शिक्षकक स्थान गुरु नाम सँ रहल अछि। “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः” एहि श्लोक सँ स्पष्ट होइत अछि जे गुरु केँ देवता समान मानल गेल अछि। गुरुकुल प्रणाली मे छात्र अपन जीवनक किछु वर्ष गुरु संग बितबैत छलैथ, जखन कि गुरु केवल पाठ्यक्रम नहि, बल्कि जीवनक प्रत्येक व्यवहारिक पक्षक शिक्षा दैत छलथिन्ह।
एकटा आदर्श शिक्षकमे किछु विशेष गुण रहबाक चाही जेना कि “ज्ञानसम्पन्नता” अर्थात विषयमे गहिर ज्ञान, “धैर्यशीलता” अर्थात छात्रक प्रश्न सुनबाक आऽ बुझबाक क्षमता, “नैतिक आऽ चारित्रिक दृढ़ता” अर्थात जे अपन जीवन सँ प्रेरणा देथि, “प्रेम आऽ करुणा” अर्थात छात्रक संग आत्मीयता आऽ ममता आऽ संगहि “नवीनताक भावना” अर्थात समयक संग नूतन पद्धति अपनाबऽ में सहायक होइथ।
आजुक आधुनिक सूचना-तकनीकक युग मे शिक्षकक भूमिका केवल पुस्तक पढ़ाबऽ तक सीमित नहि रहल अछि। ओ छात्र केँ डिजिटल साक्षरता सिखबैत छथि, जीवन कौशल, मूल्य, शिक्षा आऽ कैरियरक मार्गदर्शन दैत छथि। समाज मे समानता, सहिष्णुता आऽ नागरिकता-बोधक भावना जगबैत छथि।
एहि सभक संग एक शिक्षकक समाजक प्रति योगदान के अबहेलना करब तर्क संगत नहि।शिक्षक राष्ट्र निर्माणक आधार छथि। एकटा योग्य शिक्षक हजारो छात्रक जीवन दिशा बदलि दैत छथि। जतेक महान नेता, वैज्ञानिक, कलाकार वा साहित्यकार भेल छथि सबहक पाछाँ एकटा प्रेरणास्रोत शिक्षक रहल छथि।

निष्कर्ष ई जे शिक्षक केवल रोज स्कूल/कॉलेज मे पाठ नहि पढ़बैत छथि, बल्कि भविष्यक समाज निर्माण करैत छथि। ओ छात्र केँ केवल रोजगार लेल नहि, अपितु सद्गुणी नागरिक बनबाक शिक्षा दैत छथि। एहि दृष्टि सँ शिक्षकक सम्मान आऽ कदर समाजक प्रत्येक व्यक्ति लेल आवश्यक अछि।

अंतोगत्वा ई जे……
गुरु बिना ज्ञान अधूरा,
ओहो अछि जीवनक नूरा।
शिक्षक बनाबय समाजक दीप,
हुनक पुज्य चरण मे अर्पण प्रीत।

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