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शिक्षक केर कठोर शब्द विद्यार्थी लेल वरदान साबित होइत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- शिक्षक – हमर जीवनक प्रेरणास्रोत

शिक्षक बनि गुरु गगन समान, पथक दीप जराबैथ।
संस्कारक संगहि ज्ञान, जीवन मार्ग बताबैथ।
हृदयक द्वार खोलि सदिखन, चेतना जगाबैथ।
शिक्षकक महिमा अमिट, धरती पर स्वर्ग बनाबैथ।

हमर जीवनमे शिक्षकक भूमिका केवल विद्यालय आ किताब धरि सीमित नहि रहल। सच पूछू त’ हमरा लेल शिक्षक प्रेरणाक दीप समान छथि। हमर जन्म एकटा शिक्षक परिवार मे भेल। हमर बाबूजी स्वयं विद्यालयमे शिक्षक छलाह। हुनकर सरल जीवन, अनुशासनप्रिय स्वभाव आ विद्यार्थीक प्रति प्रेम हमरा नेनपनसँ प्रभावित करैत रहल। घरक वातावरण सदिखन शिक्षा आ संस्कारक सुगंध सँ भरल रहैत छल। ई पारिवारिक माहौल हमरा ई सिखौलक जे शिक्षक होयब केवल पेशा नहि, बल्कि समाजक सेवा करबाक संकल्प अछि।

बचपनक एकटा स्मृति आइयो मोनमे ताजा अछि। जहिया हम विद्यालयमे पाँचम वर्गक छात्रा रही, गणित हमरा लेल कठिन विषय छल। अक्सर निराशा आबि जाइत छल। मुदा हमर गणित शिक्षक धैर्य सँ हमरा बारम्बार पढ़ौलनि। हुनकर धैर्य आ अपनत्व हमरा आत्मविश्वास सँ भरि देलक। धीरे-धीरे गणित हमर नीक विषय बनि गेल। ई अनुभव हमरा बुझेलक जे शिक्षक केवल ज्ञानक पाठ नहि पढ़बैत छथि, बल्कि विद्यार्थी केँ आत्मबल आ हिम्मत सेहो दैत छथि।

हमर हिन्दी शिक्षक सेहो हमर जीवनमे प्रेरणास्रोत रहलाह। हुनकर वाक्य आइयो स्मृतिमे गूँजैत अछि – “विद्या तखन सफल बनैत अछि, जखन ओ अहाँक चरित्र आ विनम्रता मे देखाइ दियै।” यैह सीख हमरा जीवनक हर मोड़ पर सही राह देखौलक। कतेक बेर प्रलोभन आ आसान मार्ग हमरा आकर्षित केलक, मुदा शिक्षकक वाणी हमर रक्षा करैत रहल।

शिक्षकक डाँट आ स्नेह दुनू अमूल्य खजाना समान अछि। हुनकर कठोर शब्दो विद्यार्थी लेल वरदान साबित होइत अछि, किएक तँ ओकरा पाछाँ प्रेम आ चाह नुकायल रहैत अछि। हमरा सेहो कतेको बेर गलती पर डाँटल गेल, मुदा ओहि डाँटमे हमरा सुधारक दिशा देखेलक।

आजु जखन हम अपन जीवनक यात्रा पर नजरि घुमबैत छी, त’ गर्व होइत अछि जे हमर आत्मविश्वास, ईमानदारी आ संस्कारक नींव हमर बाबूजी आ शिक्षक सभ रखलनि। डॉक्टर, वैज्ञानिक, साहित्यकार वा नेता – सभ कियो पहिने विद्यार्थी छल। ओकरा गढ़बाक पाछाँ शिक्षकक हाथ रहैत अछि। हमर जीवनमे सेहो ओ सभसँ पैघ प्रेरणास्रोत छथि।

अतः स्पष्ट अछि जे शिक्षक हमर जीवनक पथ प्रदर्शक छथि। ओ किताबे नहि पढ़ौलनि, बल्कि संस्कार, मूल्य आ सच्चा जीवन जीबाक कला सिखौलनि। हमर बाबूजी आ विद्यालयक गुरुजन हमर जीवनक दीपक छथि। ओहि प्रकाशकें हम सदिखन नमन करैत रहब। जय मिथिला, जय मैथिली।

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