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तकनीकी प्रगति सँ जीवन सरल बनल अछि

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लेख विचार
प्रेषित:  आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- तकनीकी युग आ मानवीय दूरी( स्वतंत्र)

आजुक दौर केँ तकनीकी युग कहल जाइत अछि। मोबाइल, इंटरनेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आ डिजिटल प्लेटफार्मक विकास सँ मानवीय जीवन अत्यधिक सहज आ त्वरित भ’ गेल अछि। शिक्षा, व्यापार, दफ्तर, बैंकिंग आ संचार – सभ क्षेत्र मे तकनीकी क्रांति आयल अछि। आजु आदमी अपन घरमे बैसल विश्वक कोनो कोनक लोकसँ तुरन्त जुड़ि सकैत अछि। एहन सुविधा पहिने असंभव बुझाइत छल। मुदा, ई तकनीकी चमत्कारक बीच एकटा गंभीर प्रश्न उठैत अछि— मानव-मानव बीच दूरी लगातार कियैक बढ़ि रहल अछि?

तकनीकी युगक सकारात्मक प्रभाव –
तकनीकी प्रगति सँ जीवन सरल बनल अछि। उदाहरण स्वरूप, ऑनलाइन शिक्षा सँ छात्र-छात्रा गाँव मे बैसि विदेशक नामी संस्थानक व्याख्यान सुनि रहल छथि। टेलीमेडिसिनक सुविधा सँ मरीज बिना शहर गेने, विशेषज्ञ चिकित्सक सँ परामर्श लेबय मे सक्षम अछि। बैंकिंग सेवा, ऑनलाइन खरीदारी आ डिजिटल भुगतान सँ समय आ श्रम दुनू बचैत अछि। कोविड-19 महामारीक समय मे तकनीकी सुविधा बिना जीवन ठप्प भ’ सकैत छल। स्पष्ट अछि जे तकनीक अपन महत्त्वपूर्ण योगदान सँ समाज केँ प्रगतिशील बनौने अछि।

बढ़ैत मानवीय दूरी –
जतेक सुविधा आ प्रगति भेल अछि, ओतबे संबंधक ऊष्मा घटैत गेल अछि। पहिन लोक घरे-घरे चलि गप-सप करैत छलाह, पाबनि-तिहार सामूहिक रूप सँ मनबैत छलाह। आब ओ सभ व्हाट्सएप स्टेटस आ फेसबुक पोस्ट मे सिमटि गेल अछि। लोक एक दोसरक संग फोटो लाइक करैत अछि, मुदा कोनो पीड़ाक समय गामक आँगन मे पहुँचबाक चाह घटि गेल अछि।

उदाहरण लेल, गामक बुजुर्ग जे पहिने संध्या समय गपशप करैत छलाह, ओ आब मोबाइल स्क्रीन मे डूबि रहल छथि। नाती-नतिन दूर शहर मे रहैत अछि, मुदा वीडियो कॉल सँ भेटलाक बादो असली अपनापनक अनुभूति नहि होइत अछि। मनुखक समय मशीनक लेल अछि, इंसानक लेल नहि।

परिवार आ समाज पर असर –
संयुक्त परिवारक परंपरा धीरे-धीरे बिखरि रहल अछि। एक कमरा मे चारि गोटे बैसल रहैत अछि, मुदा सबहक ध्यान अपन मोबाइल पर केन्द्रित। जेना—भोजनक मेज पर सबटा सदस्य बैसल अछि, मुदा बातचीतक बदला मे स्क्रीन चमैक रहल अछि। समाजक नींव बननिहार मूल्य जेना सहानुभूति, सहयोग आ धैर्य धीरे-धीरे ओझल भ’ रहल अछि।

तकनीकी उपयोगक संतुलन –
तकनीक दोषी नहि, दोषी अछि ओकर दुरुपयोग। जँ तकनीकी सुविधा केँ अपन कार्यकाज आ जानकारीक साधन बनैल जाए आ परिवार, मित्र आ समाजक लेल समय अलग राखल जाए, त’ ई दूरी घटि सकैत अछि। उदाहरणस्वरूप, कतिपय विद्यालय मे “डिजिटल डिटॉक्स डे” बनाओल जा रहल अछि, जाहि दिन छात्र-शिक्षक मोबाइलक बदला खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधि आ सामूहिक चर्चा करैत छथि। एहन पहल समाज मे अपनापनक भावना फेर सँ जागृत करैत अछि।

निष्कर्ष –
तकनीकी युग आधुनिक सभ्यता केँ तेज़ आ सुविधाजनक जरूर बनौने अछि, मुदा संगहि मानवीय दूरी बढ़ा देने अछि। मोबाइलक नेटवर्क मजबूत अछि, मुदा दिलक नेटवर्क कमजोर पड़ि रहल अछि। एहि सँ बचबाक लेल जरूरी अछि जे तकनीक केँ साधन बनाबी, उद्देश्य नहि। जँ हम अपन परिजन आ समाजक लेल समय निकालि प्रेम आ आत्मीयता सँ जुड़ल रहब, त’ तकनीकी प्रगति आ मानवीय मूल्य दुनू संगहि पल्लवित-फलवंत होयत। जय मिथिला, जय मैथिली।

 

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