लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- अवसाद केर कारण, लक्षण आ निवारण
बहुत गंभीर विषय थीक आजुक। एखन लोक बहुत जल्दी तनावग्रस्त भ’ जाइत अछि। जखन मानव जीवन छै त’ सुख- दुख दुनू दुनू पलरा पर राखल रहैत छैक। ऊपर नीचा त’ होइते रहतैक। मुदा से नञि बुझैत छथि एखुनका लोक। कनियो दुख ततेक ने दुखी भ’ जाइत छथि जे वो अवसाद के चंगुल मे फँसल रहैत छथि। आ सुस्ती, मानसिक सोच सभ बदैल जाइत अछि। नींदक अभाव होमए लगैत छैन। हर वक्त उदासीन रहए लगैत छथि। ई मानसिक रोग सँ ग्रसित परिवारक एक आदमी के खातिर सभ चिंतित रहैत अछि।
एखुनका जन जीवनमे रहन सहन तौर तरिका सभ बदैल गेल अछि। नेना सँ लक बूढ़ पुरनियां तक सभ मोबाइल पर व्यस्त रहैत अछि। एहि सँ मानसिक दबाव सेहो बहुत रहैत अछि। सभ अपने मे खूम व्यस्त।
देखादेखी सँ सेहो लोक बड्ड अवसाद मे डूबल रहैत अछि। नशेबाज सभ सेहो सुस्त रहैत अछि।नशा त’ एकटा जहर जेना सउंसे पैर पसारने अछि।
अवसादक लक्षण-
नींदक कमी या खूम नींद
शरीरमे सुस्ती, भोजन सँ कम रूचि
अपन जीवन भारी लागब
उदासी, निराशाजनक
लोक सँ दूर रहब पसंद
अवसाद सँ बचबाक उपाय
डॉक्टर सँ सलाह परम जरूरी
हर वक्त नीक सोच
नीक भोजन आ नींदक उपाय
रोगी संग परिवारिक संलग्नता
सोशल मीडिया सँ कनेक दूरी परम आवश्यक
ई अवसादक रोगी के संख्या दिन दिन बैढ़ रहल अछि। तकर कारण एकल परिवार सेहो अछि। आब सभ मात्र अपन कनिया आ बच्चा संग रहैत अछि। ककरो लेल ककरो समय नञि। भाय बहिनक नाम पर बेसी सँ बेसी एकटा। एहन स्थिति मे ककरो कियो बात बुइए वला नञि रहैत अछि। तखन भ जाइत अछि डिप्रेशन।
एहि पर घर परिवार आ समाजिक सहयोग परम आवश्यक।
