लेख विचार
प्रेषित: शेफालिका दत्त श्रीजा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- भक्ति मे शक्ति केर आस्था
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ई बिल्कुल सत्य अछि जे भक्ति मे बहुत शक्ति अछि।जखन मन हर चीज से निराश भs जाइत अछि तखन भगवान जी के भक्ति करैत अछि,भक्ति केला मात्र से मन मे बहुत शक्ति आबैत अछि।उठैत- बैसैत सुतैत जागैत हर समय हम सब कुल देवी- देवता पितर- पितराइन के सुमिरन करैत छी। लेकिन जखन कोनो खास अवसर मे या कोनो दुखद परेशानी मे पूरा श्रद्धा भाव से भक्ति करैत छी। तखन मन मे पूरा शक्ति आवि जाइत अछि ।ओही से ई बात सत्य अछि जे भक्ति मे शक्ति अछि। भक्ति पर आधारित एगो कथा कतौ सुनने छी ओ लिख रहल छी।
एगो साधु छलैथि हुनका कोनो ठिकाना नई रहनि । भिक्षा माँगि के भगवान केँ भोग लगबैत छलथि। वृंदावन मे दुटा गोपी रहै छलथि । ओ कहियो कोनो मंदिर नै गेल रहैथि। दही माखन बेचि कऽ गुजारा करैत छलथि। दुनु गोपी के पता चललनि जे ई साधु के पास झोरा मे भगवान रहैत छथि। एक दिन दुनु गोपी दही माखन बेचि यमुना केर निकट पहुँचि गेलैथि। ओतए देखलैथ ओ साधु अपन झोरा वृक्ष केर नीचा मे राखि संध्या वंदन के लेल स्नान करय गेल छलथि। दुनु गोपी कें मन मे एलैन्ह जे इहे झोरा मे भगवान छैथि। तेँ चुपचाप आबि झोरा उठेलथि आर ताकय लागलथि पर भगवान नै भेटलनि । तखने बगल मे एगो डिब्बा राखल देखिलथि । जखन डिब्बा खोललथि तs ओई डिब्बा मे लड्डू गोपाल बंद छलथि।
एगो सखी ओई डिब्बा मे से निकालि कहय लागलथि ई साधु कतेक निर्दय छैथि जे भगवान जी के ई डिब्बा मे बंद केने छैथि ।जाहि से हाथ पैर सब टेढ़ा मेधा भs गेल छैन्ह।दुनु गोपी भगवान जी के पूरा श्रद्धा भाव से उठेलैथ ।आ हुनकर हाथ पैर सीधा केलैथि। और कहय लागलैथ भगवान जी आहाँ परेशान नई होउ हम सब अहाँ के हाथ पैर सीधा कय देब। आब अहाँ दही माखन खा लिय ।अहाँ के भूख सेहो लागल होयत।लड्डू गोपाल दुनु गोपी के ई सरल भक्ति पर आनंद आबैत रहनि । ओ मंद मंद मुस्कुरा रहल छलथि।दुनु सखी बार बार हुनकर हाथ पैर सीधा करय मे लागल छलथि । लेकिन सीधा नई होइत छलैक।सीधा करैत करैत दुनु थाकि गेलैथि ।आब दुनु गोपी के निश्चल भाव देखैत भगवान के हारय परलैन्ह ।ओ लड्डू गोपाल के मूर्ति मे सीधा भs के खड़ा भs गेलैथि।दुनु सखी भगवान के नहेलैथ आ दही माखन खुएलैथ आ डिब्बा मे सुतबय लगलथि लेकिन ओ सीधा मूर्ति डिब्बा मे नै घुसि पाबि रहल छल।
ताबतक ओ साधु महात्मा ओतए पहुँचलैथ।ओ साधु के देख दुनु गोपी डर से भागि गेलैथि। महात्मा जखन अपन झोरा देखलैथ तs चौंकि गेलथि। ओतए ओ लड्डू गोपाल ठाढ भेल हैंसि रहल छलथि। महात्मा लगले सब बात बूझि गेलथि आऽ भगवान जी केँ चरण मे खसि कऽ कानय लगलथि।ओकर बाद ओ दुनु गोपी के घर गेलैथि आऽ हुनको चरण पकैरि के कानय लगलथि। आहाँ दुनु धन्य छी अहीं दुनु के प्रताप सँ हमरा भगवान जी केर दर्शन भेल। हम जीवन भरि लड्डू गोपाल के संग मे घुमैत रही पर हम आहाँ सब जेहन भक्ति नई कs पेलौं। आई आहाँ दुनु गोटे भक्ति मे बड्ड शक्ति होइ छै से देखा देलौं। जाहि सँ आइ हम भगवानजी केर साक्षात दर्शन केलौं। भगवान जी जिनकर भक्ति भाव निश्चल देखैत छथिन्ह, हुनके पर रिझाइत छथिन्ह।
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