लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- प्रकृति: जीवनक मूल आधार आ संरक्षणक जरुरत
प्रकृति ईश्वरक अनुपम देन थिक। जल, वायु, धरती, अग्नि आ आकाश — ई पंचतत्व जीवनक आधार थिक। फूलक सुगंध, नदीक कलकल ध्वनि, पक्षीक चहचहाहट, आ गाछक छाँव — सभ किछु प्रकृतिक गोद मे भेटैत अछि। लेकिन एहि अमूल्य धरोहरकेँ हम धीरे-धीरे नष्ट क’ रहल छी। विकासक नाम पर वृक्ष कटान, जल प्रदूषण, वायुमंडलीय असंतुलन जेना समस्यासभ दिन-दिन बढ़ि रहल अछि। एहेन समयमें प्रकृतिक संरक्षण परम आवश्यक भ’ गेल अछि।
प्रकृतिक महत्व:
जीवनदायिनी स्रोत: शुद्ध हवा, स्वच्छ पानी, उपजाऊ भूमि — सभ जीवित प्राणी लेल जरूरी छै।
अर्थव्यवस्था के आधार: खेती-बारी, पशुपालन, वनोपज, जलस्रोत — सभसँ जीविकोपार्जन होइत अछि।
मानसिक शांति: प्रकृतिक गोद मे शांति, सुकून आ मानसिक संतुलन भेटैत अछि।
पर्यावरणीय संतुलन: वृक्ष सभ कार्बन डाइऑक्साइड सोखि क’ ऑक्सीजन दैत अछि, जलवायु नियंत्रण मे मदद करैत अछि।
प्रकृतिक संकट:
वन विनाश: जंगल कटै सँ जीव-जंतु विलुप्त भ’ रहल अछि, भूमि बंजर बनि रहल अछि।
जल संकट: नदी-पोखैर सुखा रहल अछि, पीबै लेल जलक अभाव बढ़ैत जा रहल अछि।
वायु प्रदूषण: धुँआ, धूल आ रसायन वायुमंडल के विषाक्त बना देने अछि।
जलवायु परिवर्तन: मौसम असामान्य भ’ गेल अछि — कहियो बाढ़ि, कहियो सुखाड़।
मइटक उपजाऊपन मे गिरावट: रासायनिक खाद आ कीटनाशकक अत्यधिक प्रयोग माटिक शक्ति घटा रहल अछि।
संरक्षण किएक जरूरी अछि?
प्रकृतिक बिना जीवन असंभव अछि। जे संसाधन आजु हम उपयोग क’ रहल छी, ओ अगिला पीढ़ी लेल सेहो सुरक्षित रहबाक चाही। जँ आबो हम नहीं चेतब, त’ भविष्यमे विनाश अटल अछि। एकर रक्षा ने केवल नैतिक कर्तव्य, बल्कि अस्तित्वक प्रश्न छी।
संरक्षणक उपाय:
वृक्षारोपण: प्रत्येक व्यक्ति साल में कम सँ कम एकटा गाछ लगाबै।
जल संरक्षण: नल के बर्बादी रोकू, वर्षा जल संचयन शुरू करू।
प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली: प्लास्टिकक प्रयोग कम करू, कागज, कपड़ा आ लोहेकेँ विकल्प अपनाउ।
नवीकरणीय ऊर्जा: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जेना विकल्प पर जोर देल जाए।
पर्यावरण शिक्षा: बच्चा सभ में प्रकृतिक प्रति प्रेम आ जिम्मेदारी पैदा करू।
समूहिक भागीदारी: पंचायत, स्कूल, समाज—सभ मिलि क’ वृक्षारोपण, सफाई आ जागरूकता अभियान चलाबी।
सरकारी आ सामाजिक भूमिका:
सरकारी स्तर पर सख्त कानून लागू होइ, जे पर्यावरण विरोधी गतिविधि सभ पर रोक लगाबै। ग्राम स्तर पर ‘हरित ग्राम’ योजना, जल संरक्षण अभियान, आ जैविक खेती के प्रोत्साहन देल जाइ। संगहि, समाज स्वयं जागरूक होइ आ दोसर सभ के प्रेरित करै।
परिणाम:
प्रकृति मात्र दृश्य सजावट नै, बल्कि जीवनक आधार थिक। एकरा जँ हम संरक्षित नै करब, त’ जीवन स्वयं खतरा में पड़ि जेतै। ताहि लेल आब समय अछि कि हम प्रकृतिक आवाज सुनू, ओकरा बुझू आ बचाबी।
“प्रकृति संगी अछि जीवनक, ओकर रक्षा क’ अपन भविष्य सुरक्षित बनाबी।” जय मिथिला, जय मैथिली।
