लेख विचार
प्रेषित: ममता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- जीवन में परिधानक महत्व
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कहल गेल अछि जेहन देश तेहन भेष। अप्पन गरिमा के रक्षा करैत श्रृंगार आ व्यवहार अति आवश्यक अछि।
परिधान चाहे देशक हुए या विदेशक सब अपन देशक प्रतिनिधित्व करैत अछि।
सभ्यता आ संस्कृति के पहचान अछि अलग अलग देश के परिधान आ वेशभूषा।
सैनिक , पुलिस,डाक्टर, डाकिया,वा अग्निशमन विभाग हुए सभक पहिचान परिधान सँ कैल जाईत अछि।
कियो केकरो सँ भेट कर जाइत छी या आबैत अछि तऽ सबसँ पहिने नजर ओकर पहिरावा पर जाइए। जेना मिथिलांचल मे पुरुष वर्गक परिधान धोती कुर्ता पाग आ दोपटा आ महिला के लेल साड़ी।
विशेष अवसर पर मिथिला पेंटिंग वाला साड़ी आ कुर्ता।
सब अवसर आ विध व्यवहार मे अलग-अलग रंगक साड़ी के महत्व अछि।छठिहारी सँ कटिहारी तक विशेष परिधान अछि।
पहिने कपड़ा केहनो पहिरैत छल लेकिन गहना के महत्व छल आब उल्टा अछि।बसन तन ढाक के लिबास छल मात्र।दू तीन टा साड़ी मे प्रतिदिनक पहिराव आ दू चाइर टा कतऊ जाइ आब वाला साड़ी रखैत छल पहिने।
आब फैशन अछि एकटा ड्रेस कोनो कार्यक्रम मे पहिर लिय त दुबारा दोसर काज तिहार मे ओकरा नै पहिरब।कारण एके रंगक साड़ी या सूट मे फोटो खीचायब, लोग की कहत एकरा लग एकहि टा साड़ी छै।
मानव जीवनक एक महत्वपूर्ण हिस्सा छी परिधान। खास कए नव पीढ़ी लेल और बेसी रंग बिरंगक उपयोग। आब पार्टी सार्टी बेसी होइत अछि।एकटा बियाहे मे चाइर दिन मे चाइर रंगक ड्रेस चाही। नई पहिरब तऽ सकल समाज सँ अलग लागब सेहो निक नै लागत।
परिधान बदलैत मौसम के अनुसार लोग पहिरैत अई। कपड़ा हर परिस्थिति सँ बचाबैत अछि ,संगहीं सामाजिक स्थिति के सेहो व्यक्त करैत अछि।
कपड़ा हमरा ठंडा गर्मी बरखा धूल सभ किछु सँ सुरक्षित राखैत अछि ।
वस्त्र शरीर के साफ सुथरा रखैत अछि आ अनेक प्रकार के रोग सँ बचबैत अछि।
आराम दायक कपड़ा हमरा शरीर के मानसिक रूप सँ सहज अनुभब करबैत अछि।
परिधान हमर पहचान देखेबाक माध्यम सेहो होइत अछि।
परिधान समाजक भेद भाव जाति धर्म के पहचान के सेहो दर्शाबैत अछि। परिधानक सुन्दरता केवल वस्त्र धारण नई बूझू ई अप्पन देशक सुगंधित संस्कृति अछि।
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