लेख विचार
प्रेषित: मीनु झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- जीवन मे परिधानक महत्व।
जीवन मे परिधान कऽ बहुत महत्व अछि। ई सिर्फ शरीर के ढ़कय क काज नै करैत अछि बल्कि हमर संस्कृति, समुदाय, स्थिति,पद और पहचान क दर्शाबैत अछि। अहि सँ हमर व्यक्तिगत और सामाजिक पहचान बनैत अछि। पहिले कऽ समय और आब समय ई अंतर बहुत बेसी भ गेल हन।
मौसम के अनुसार सब समय मऽ अलग-अलग तरह कऽ परिधानक जरूरत पड़ैत अछि जेना – गर्मी मऽ एकदम हल्का वा यययंयंयंठंडा मऽ ऊनी । जतय जेहेन मौसम रहैत अछि ओय जीवन शैली क अनुरूप पहिरल जैत अछि।पहले त परिधान क मतलब सिर्फ एहेन कपड़ा छल जे कतौ पहिर क जा सकय छी। एगो दुगो कतौ जाय आबय ल लोक नीक राखैत छल।कारण सब क दिक्कत रहय छल ।
एतेक तरहक प्रकार पहिले नै छल । मुदा आब त समय बदैल गेल सब किछ म बढ़ोतरी भेल कपड़ा म त किछ बेसिये भ गेल हन। घर म पहिरय क अलग,बाहर जाय क अलग ओहियो य बाजार जाय क अलग, मंदिर जाय क अलग,किनको घर जाय क अलग, शादी विवाह क अलग,ओहियो म हल्दी मेंहदी क अलग, पार्टी क अलग, आफिस क अलग,राति क अलग मतलब कुनु अंते नै। ओहियो म आब सब अपन परिधान छोड़ी टीवी सिरियल वाला कपड़ा पर बेसी ध्यान दैत अछि। मुदा तयो कोनो खास जेना पाबैन तिहार, शादी, उपनयन और मुंडन सब मे अपने परिधान शोभा दैत अछि आ सब पहिरबो करय छैथ। सब राज्य क अपन अपन अलग पहनावा अछि। और सब अपन अनुसार पहिरय छैथ। मुदा आय कैल्ह बहुत लोक कपड़ा शरीर क ढंकय लेल कम आ देखाबय लेल बेसी पहिरय अछि जे उचित नै अछि। मुदा कि क सकय छियै सब अपन जीवन जीवय क अलग तरीका छै। अपन मिथिला क नारी पुरुष सब त ओनाहियो बहुत संस्कारी अछि त अपन संस्कार अपनेने छैथ। कतबू कोनो परिधान पहरू मुदा साड़ी क त बाते अलग अछि। जे हमहु बरकरार रखने छी। बहुत शहर घुमलौ मुदा साड़ी छोड़ी दोसर परिधान नै अपनेलौ। जय मिथिला जय मैथिली ।
