लेख विचार
प्रेषित:— नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय- ” युद्ध कालमे सेना आ हुनकर परिवारक योगदान ”
युद्धक नाम सुनिते जनसामान्यमे हलचल मैच जाइत अछि। लोक सचेत होमए लगैत अछि। टीवी पर युद्धक घोषणा वा किछु दृश्य देखिकए लोकक मोन कंपित होमए लगैत अछि।लोक व्याकुल भ’ जाइत अछि ई युद्धक विभीषिका सँ। ई त’ तय रहैत अछि जे युद्धमे दुनु पक्षक जन, धनक क्षति हेब्बेटा करतै। एहन स्थितिमे ईश्वरेटा लोकक आशा आ सहारा बनल रहैत छथिनन।
मुदा इतिहास गवाह अछि जे जखन देश पर कोनहुँ प्रकारक विपत्ति अबैत अछि वा आतंकवादीक हमला होइत अछि त’ देशक सेना तुरंत केहनो जरूरी काज छोड़ि सरहद पर जाऽ तैनात होइत छथि। आ देशक एहि आपत्तिजनक स्थितिमे वीर सेनाक परिवारक लोक मोन नञि रहितो हुनका रोकि नञि पबैत छथिन कारण वो बान्हल रहैत छथि देश प्रेम आ अपन पति/पुत्र/भाई वा संबंधित के सेनामे भर्ती हेबा काल लेल गेल वचन सँ।
एहन अवस्थामे जाहि मायके एकैटा पुत्र रहैत छैन वा नव विवाहिता कनिया रहैत छथिन सभ हुनका विजय तिलक लगा आ आरती उतारी बिदा करैत छथिन। हुनको अंतर्मनमे ई युद्धक विभीषिका तहलका मचौने रहैत छैन मुदा ओ सिर्फ ईश्वर सँ प्रार्थना करैत छथि जे हुनकर आदमी पुनः युद्ध जीती घर अबैथ। एहन अवस्थामे सैनिककें परिवारक योगदानक की वर्णन कएल जा सकैत अछि। सिर्फ एतबा कहब जे धन्य ओ माय आ धन्य ओ पत्नी छथि जे एतबा हिम्मत राइख युद्धक परिणामक इंतजार कर करैत छथि। ओ बाट जोहैत रहैत छथि जे एम आई कि हेेतैक युद्धमे।
एहन परिवारक सदस्य लोकनिकें हमर क्रोटी- क्रोटी प्रणाम । कियैक त’ ओ हँसैत कहैत छथिन देश के सैनिक मरैत नञि छथिन ओ त’ शहीद होइत छथिन। शहीद के वीरांगना माय, बहिन आ कनिया हँसैत विदा करैत छथि।
