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मूल पाँजि क संग आब गोत्र सेहो बिसरि जैत आजुक लोक

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लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय – स्वैच्छिक/ एखुनका समयमे गोत्र, मूल, पाँजि इत्यादि बिसरैत लोक…।

पहिने जखन लड़का लड़कीकें वियाहक गप्प चलैत छल त’ सभ सँ पहिने ओकर गोत्र संग मूल लोक पूछैत छल तखन पूछैत छल जे हुनकर पाँजि की छैन।तखन देखैत छल जे ई सोइत छथि,हिनकर महादेव झाके पाँजि छनि…..इत्यादि इत्यादि।एखन लोक मात्र गोत्र पूछैत छथि मूल पैघ आ छोट सँ लोककें कोनहुँ मतलब नञि छैन। एखुनका मूल आ पाँजि होइत अछि शिक्षित आ सम्पन्नता। पढ़ल लिखलकें मूल की लोक देखतैक आ नौकरी बढ़ियाँ ,कोठा सोफा,शहरमे मकान छैक त’ पाँजि की देखतैक। आब त’ बहुत वियाह समगोत्री मे सेहो देखल जाइत अछि, मुदा जौं कियो ओकर चर्च करैत छथि त’ ओकर जबाब भेटत ऐं आब त’ धिया-पुता अंतरजातीय वियाह क’ लैत छै हमर बच्चाक वियाह त’ मात्र समगोत्री मे भेल अछि। मुदा अंतरजातीय वियाह सँ बेसी खराब होइत अछि समगोत्री वियाह, एहि वियाहमे खूनक सम्बन्ध होइत अछि जेकर कि दुष्प्रभाव बाल- बच्चा पर बहुत परैत अछि।

आब लोक सोशल मीडिया सँ सभ क’ लैत अछि। पहिने कुण्डली मिलेबाक चर्च नञि होइत छल। मुदा आब एहि सभ बातक खूम तामझाम होइत अछि। तकर एकटा इहो कारण लगैत अछि जे आब लोक लड़का- लड़की के उमेर सेहो देखबाक चिंता में सही वर्थ सर्टीफिकेट मंगैत हेथीन।

पहिने गाम -गाममे पंजीकार रहैत छलखिन। पूर्वज लोकनि ओहिमे सभहक बही खाता लिखबाक रखने रहैत छलखिन। ओहिमे सात पुस्ता मिलायल जाइत छलैक। मातृक पक्षक गोत्र सेहो मिलायल जाइत छलैक। मुदा आब ई प्रबधान सभ बहुत कम देखबामे अबैत अछि।

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