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निरोग रहबाक लेल स्वयं पहिनहिए रक्षा कवच बनाबी

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लेख विचार

प्रेषित: इला झा

लेखनी के धार,

दहेज मुक्त मिथिला,

साप्ताहिक गतिविधि बृहस्पतिवार

विषय: रोग सँ बचाव वा इलाज

महान दार्शनिक हजारो साल पहिने कहि गेलथि- बचाव हमेशा इलाज स’ नीक।मतलब एकर ई अछि, जे हम सभ एहन रक्षा-कवच अपन चारों तरफ बनाबी जे रोग नहि आबय आ इलाजक जरूरत नहि पड़य।पूरा संसार अहि बात पर ध्यान नहि देलाक कारण शारीरिक आ आर्थिक नोकसान उठा रहल अछि।

कोनो राष्ट्रक स्वाथके प्रथम प्रहरी स्वयं नागरिक होइत छथि।सरकार कतेको योजना बनाबय,यदि जन-मानस स्वयं सजग नहि हैत त कोनो योजना फलित नहि हैत
संगहि कोनो नीति सफल।

स्वास्थ कोनो आकस्मिक घटना नहि,अपितु सतत जीवनशैलीक परिणाम होइत अछि।

बिमारी बिकासक बाधक होइत अछि।कोनो देशके सम्पन्नता ओहि सँ बुझना जाति अछि जे लोक कतेक स्वस्थ आ आनंदित छथि। भारतमे समय- समय पर होव वाला सर्वेक्षण मे चिंताजनक आंकड़ा सामने अबैत रहैत अछि। मधुमेह, रक्तचाप आ हृदय संबंधी बिमारी तेजी सँ बढ़ि रहल अछि। अस्पताल मे इलाजक दौरान मरीज आ हुनक परिजन के जेहन तकलीफक सामना कर पड़ैत छनि,वो कोनो लाइलाज बिमारी सऽ कम नहि। निजी अस्पताल लूटक अड्डा बनि गेल अछि। आम जनता के निजी अस्पताल अपनहि दोकान सँ दवाई खरीद लेल बाध्य करैत अछि।जांच, मेडिकल उपकरण, ट्रांसप्लांट इत्यादि के नाम पर मनमाना शूल्क वसूल करैत अछि। एकटा रिपोर्टक अनुसार सरकारी अस्पतालक अपेक्षा निजी अस्पतालक इलाज सात गुना महग होइत अछि।

पूँजीवाद चिकित्सा क्षेत्र कें कमाइके बहुत पैघ क्षेत्र बना देने अछि। डिब्बाबंद आ पैकेट बन्द खाद्य पदार्थ बेच’ वाला कंपनी संग किछु फार्मा कंपनी खुलिक’ खेला रहल अछि।पहिले खाद्य पदार्थ सँ लोकक स्वास्थ्य पर आघात कैल जाइत अछि। फेर इलाज लेल नव-नव दवाई बजार में लायल जाइत अछि। ई खतरनाक खेल पर अंकुश तखने लागत,जखन बचाव इलाज सं नीक हैत।

सरकार के स्वास्थ्य सुविधा नीक आ सर्वसुलभ बनय ताहि पर ध्यान देब पड़त।

हम सभ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भ जाइ त’ बहुत पैघ लड़ाई जीत लेब।ताहि लेल मानसिक आ शारीरिक रूप सँ स्वयं के सक्षम बनब’ पड़त। यथा समय प्रातः वा संध्याकाल दू स’ तीन किलोमीटर चलनाइ अपन स्वस्थ जीवन शैलीक अभिन्न अंग बनाबी । योग वा व्यायाम सँ शरीर के पूर्ण स्वस्थ राखल जा सकैत अछि। मोटापा ग्रस्त नहि होइ ताहि लेल खान-पान पर नियंत्रण रखनाइ अत्यंत जरूरी। स्वस्थ जीवनशैली लेल योजनाबद्ध तरीका अपनाबी। बहुत देर तक एक जगह नहि बैसल रही।अपन खुशी अनुसार कोनो सुंदर स्किल बढ़ाबी, जाहि सं उदासी कखनो नहि घेरैत छैक। मनक शांति लेल ध्यानक अभ्यास सेहो जरुरी अछि।बाहरी खाना निरंतर खेला सं ओकर शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ैत छैक। जहां तक संभव ,घरक शुद्ध आ पौष्टिक आहार समुचित मात्रा में ग्रहण केला सं स्वस्थ रहल जा सकैत अछि। ऋतु अनुसार रोज सही मात्रा मे फलक‌ सेवन केला सं शरीर स्वस्थ रहैत अछि। संगहि साकारात्मक सोच जीवन के सुंदर बनबैत अछि। राइत क’ सात-आठ घंटाक नींद सेहो आवश्यक। घरक सोहार्दपूर्ण वातावरण आ एक दोहरा सं संवाद में कमी नहि हेबाक चाही। स्क्रीनक समय पर अंकुश लगनाइ सेहो जरुरी अछि। मोबाइलक निरंतर प्रयोग सँ घर मे सामंजस्य बैसेनाइ मुश्किल होइत छैक। स्वयं के अनुशासन मे रखनाइ अति आवश्यक अछि।
बहुत सुनियोजित ढंग सँ रहलाक बादो हमसभ रोगग्रस्त होइत छी आ सही डाक्टरी इलाजक जरूरत पड़ैत अछि। परन्तु अपना भरि हमसभ मानसिक आ शारीरिक रूप सं स्वस्थ रहबाक प्रयास करी आ घरक हरेक सदस्य स्वस्थ रहथि तकर सेहो उपाय करी।

आउ स्वस्थ जीवनशैली अपनाबी, बिमारी होबय सँ पहिने भगाबै कऽ सोची।

 

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