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काज प्रयोजन आ धार्मिक अनुष्ठान मे गाओल जाइ अछि लोक गीत

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लेख विचार

प्रेषित: नीलम झा

#लेखनीक_धार दहेज मुक्त मिथिला
विषय- स्वैच्छिक/ #लोक_गीतक_महत्व

मिथिलामे #लोक_गीतक_महत्व खूब मानल जाइत अछि। ई लोक गीत लोक जन्म सँ लक मरणोपरांत तक गाएल जाइत अछि। लोक गीतक अर्थे यैह होइत अछि जे हर विधि पर हर तरहक गीत नियुक्त कैल गेल अछि आ ओकरा ओहि तरहक राग भाष मे गाएल जाइत अछि। जेना कि जन्मोत्सव पर – भए अवतार महाप्रभु राजीव लोचन रे,एहि तरहक सोहर आ खेलौना, मुण्डन मे गोसाउनिक गीत गाइब तकर बाद सोहर, खेलौना, हजमाके, केश कटबा काल, बाबाके विनती इत्यादि…..।

जनेउमे सेहो ई मुण्डन सन गीत सभ मुदा ओहिमे गोसाउनिक नौतबाक गीत, पीतर नौतबाक गीत, बाबा/नाना नौतबाक गीत, बांस कट्टीके गीत, मरबा बनबाक,चाच चढ़बाक, छरेबाक,चूड़ाकुटबाक, उबटन लगेबाक, चरखा काटके, गोसाउनिक विनती, बाबाक गीत, केश कटबाकालक गीत इत्यादि…।

बेटा बेटी के वियाह मे सेहो बड्ड नीक- नीक लोकगीत होइत अछि। बेटाक चुमाउन कए बरातीक गीत होइत अछि। बेटी वियाह मे कुमार गीत, परिछन काल स्त्री लोकनि बर सँ गीतक माध्यम सँ हास परिहास खूब करैत छथिन। वियाह काल लाबा कनिया निरीक्षण काल फकड़ा – काँच करची काटि कए बंगाला घर छारिकए…….एकै पटोर तर दूटा कुमारी,बाम छौ कनिया दहिन छौ साइर।आ तकर बाद दुलहा चिन्ही लिअ अपन दुलारीके सिया सुकुमारीके ना। हाथ पक्कापक्की, वियाह काल लाबा छिरिएबाक गीत,समर, महेश वाणी,सिन्दूर दानक गीत, गौरी पूजा इत्यादि गाबि देहरी छेकि,बर कनियांके कोबर तक पहुँचेबाक गीत गाएल जाइत अछि।कोबर,सांझ, पान खेबाकालक,जुट्टीखोलबाक,पटिया फेकबाकालक,ढ़कनचोरी,मौहक,तरह-तरहके बटगमनी इत्यादि।ई अछि मिथिला मे लोक गीतक महत्व।

कनिया दुरागमनमे कनियांके परिछन, कनियांके कोबर मे माछ कटबाक, हरैद फोरबाक, पातिल खोलबाक, कोठीमे हाथ देबाकाल,खोंइछ खोलबाकालक, अंतमे मुँह जरूर देखाइकाल सेहो गीत गाएल जाइत अछि। जेना कि- कहाँ गेली किए भेली सासु कौशिल्या हे सीता घर एली, देखि लिअ मुँहमा उघारी हे सीता घर एली।

मिथिलामे बटगमनी गीतमे फागुनमे फागु/होली, चैतमे चैतावर, बैसाख सँ अखाढ़ तक चौमासा, छौमासा आ बारहमासा गाएल जाइत अछि। आसिन सँ अगहन तक ग्वालिरि, बसंत। मौहक काल मौहकक बटगमनी, कोबर जाएकालक अलग इत्यादि…।

गांव त महीला लोकनि आँटा पिसबाकाल लगनी सेहो गबैत छलिह। हास परिहास मे शुभकाल डहकन गाबि एक दोसराक गारी दैत छलिह।

सभ सँ आश्चर्यजनक बात ई होइत अछि जे जखन कुनु बुजुर्ग संसार छोइर जाइत छथि त’ लोक ढ़ोल झालि बजाकए निर्गुण गीत गाइब सेहो हुनका विदा करैत छथिन। ई अछि #लोक_गीतक_महत्व।

एक आखर निर्गुण गीत-

राम कहो रघु राम कहो रे ,नित्य राम कहो रे भाइ।

जे देहिया पोसल बहुत जतन सौं,चोवा चंदन लगाइ।
से देहिया आजु अग्नि जरतु हैं,संग किछु नहि जाइ।।

राम कहो रघु राम कहो रे, नित्य राम कहो रे भाइ।

जे नारी अति प्राण प्यारी, नित्य सोबत अंग लगाइ।
से नारी देहरी भए कानथि, संग श्मशान नहिं जाइ।।

राम कहो रे रघु राम कहो रे, नित्य राम कहो रे भाइ।।

  1. ई थीक #लोक_गीतक_महत्व

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