लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- माय के खुएबाक फाँट (पार)
के राखत माय के? – आब हमरा सँ नहिं होयत एतेक सेवा सुसुर्खा, हमहुँ मनुख छी…. तामस सँ तिलमिलायल पुष्पा आइ ठांइ पठांइ मनोज अर्थात अपन पतिदेव के सुना रहल छलखिन्ह जे अहाँक बूढही माता आइ तीन महीना सँ हमर कपार पर आबि कऽ बैसल छैथि। खाली बैसल बैसल रंग बिरंग के फरमाइश, आब हिनका लऽ जा कऽ गाम दऽ अबियौन। मनोज आस्ते सँ उत्तर दैत छैथि जे किए ? ओ एतय रहतै तऽ की भऽ जेतै? ओकर घर छियैइ, ऒकरा जाबत धरि मोन हेतै ताबत धरि एतय रहतै। हम ओकरा गाम नहिं पठेबै। बूढ भेलै, मोन खराब रहैत छैक । एहिठाम नीक नीक डाक्टर सभ भेटैत छैक, बेचारी के गाम मे के देखतै? भैया सदिखन खेती काज मे लागल रहैत छैथि। यैह ने बात भेल छलैक जे बूढही तीन तीन महीना दुनू ठाम रहथिन ।पुष्पा के बजला पर मनोज तुरंत जबाब दैत छैथि जे इहो अहीं दुआरे भेल छलैक। अहाँक नाटक कयला सँ हमरा कतेक बेइज्जती भेल छल ओ हम जनैत छियैइ। हमरा किछु नहि सुनवाक अछि। सोना के चूड़ी देबाक काल मे बड़का बेटा, हमरा ने कोनो गहना, ने कोनो जमीन जायदाद। हमरा इ अहाँक भातृ प्रेम एको रत्ती बुझबा मे नहि आबि रहल अछि। अहाँ बुझै के प्रयास किए नहि करैत छिऐ. आइ हम जे किछु छी से अपन भाईजी के बदौलत छी। वेएह अपने नहिं पढि कऽ हमरा पढेवाक लेल जमीन आसमान एक कऽ देने छलाह। आइ हुनकर बच्चा के पढाई के लेल मायक चूड़ी हुनका देल गेलन्हि तऽ कोन पहाड़ टूटि गेलैक। आ जमीन जथा कतय भागल जाइत छैक, भाईजी अपना बुझि कऽ खेती कऽ रहल छैथि तऽ अहाँ के कोन समस्या भऽ गेल?… लल्ला।हमरा आब गाम पहुँचा देए। तीन महीना भऽ गेल एहिठाम। माय काँपैत करुण स्वर में बजैत छैथि। नहिं माँ। आब अहाँ के कत्तहु नहिं जयवाक अछि। जतय हम रहब ओहीठाम अहुँ रहब। माय चश्मा उतारि कऽ बेटा के ध्यान सँ देखैत छैथि आ कहैत छैथि जे कनियाँ सँ बिचार पूछि लेलियै अछि? हुनका नहिं ने दिक्कत हेतैन्ह? हुनका की दिक्कत हेतैन्ह, हुनको माय एहिठाम आबि रहल छथिन्ह, सभ भाई अपना मे माय के अपना लग रखवाक लेल कलह कऽ रहल छलखिन्ह तऽ हम कहि देलियनि जे माँ के हमरा ओहिठाम पठा
दियौन । पुष्पा मनोज दिस एकटक ताकि रहल छलीह आ मोनहि मोन ग्लानि केर अनुभव कऽ रहल छलीह ।
