लेख विचार
प्रेषित: नीलम झा निवेधा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- विलुप्त होईत द्विरागमन
पहिलुका ताम झाम, हास-परिहास आ विध-व्यवहारमे आब बहुत अंतर भ’ गेल अछि। तकर मुख्य कारण थीक सभकें समयाभाव। कारण आब स्त्री पुरुष, बर- कनिया सभ काम काजी रहैत छैथ त’ किनको लंग ओतेक समय नञि रहैत छैन। तैं सभ चाहैत छथि जे पंद्रह दिनक भीतर वियाहक सभ कार्य सम्पन्न कए ली। तखन बरसाइत, पंचमी, मधुश्रावणी आ कोजगरा त’ कतौ क’ लेब।
मुदा एहि धरफरी वियाहमे बहुत रास हास विलास सँ बंचित रैह जाइत छथि नव विवाहिता। जेना पहिने कैएको दिन गौरी पूजा गीतगाइन सभ गीत गाबि करबैत छलखीन आ ताहि क्रममे, मुठ्ठी खोलब, पान खुआएब, जुट्टी गुहब बहुत रास हास्य बिनोद होइत छल। राइतमे चुमान आ ढ़क्कन चोरी सेहो कैयक दिन तक चलैत छल मुदा आब दू दिन सँ बेसी संभवे नञि भ’ सकैत अछि।
पहिने मिथिलामे बेटीके वियाहक बाद एक साल, तीन साल अथवा पाँच सालक बाद द्विरागमन होइत छलैन्ह आ भरि साल पावनि तिहार हुनकर नैहरामे खूम धुमधाम सँ मनाओल जाइत छलैक। टोल पड़ोसक स्त्रीगण सभ भरि साल ओहि मे मग्न रहैत छलीह । बरक बिदाई भ’ जाइत छलैन आ हुनका पीठ पर कनियाक हाथक दूधमे घोरल सिन्दूरक थप्पा जाइत छल आ एहि रूपे होइत छल कनियाक पहिल गृह प्रवेश। ई थप्पा बरक विहौती दोपटा पर पालकी बना ओहिमे कनियाक मुर्ती बनाओल जाइत छल आ ताहि पर परैत छल कनियाक हाथक थप्पा। मुदा आब बियाह द्विरागमन सभटा एकहि संगे भऽ जाइत छैन्ह त’ द्विरागमनक विधि ब्यवहार सभ औपचारिकता मात्र रहि गेलैक अछि। ओहिमे विधिवत खोंइछा, घरभरी,चित्ती कौड़ी,चुमान,घुर बहुर इत्यादि नियमपूर्वक कएल जाइत अछि एखनो।पावनि तिहार तऽ सभटा होइत छैक मुदा पहिलुका आनन्द नहिं अबैत छैक जतेक पहिले अबैत छलैक ओ आब कहां।
द्विरागमनक विधि मध्ये दुटा त’ साफे विलुप्त भ’ गेल। जाहिमे एकटा अछि महफा, पालकी/ खड़खड़िया आ दोसर नीक दिन पर कहुतिया डोर सिंदूर लए अबैत छलखीन। हुनकर सत्कार वियाहक बरियाती जेना होइत छलैन। डोर सिंदूर आ मधुर गोसाउनिक आगा राखल जाइत छल आ ओ डोर ( एंइठा/ चोटी/लाल सबा मीटरक फीता) सँ कनियाक केश गुहल जाइत छल आ ओ सिंदूर पाँचटा अइहब कनियाक सीथमे लगबैत छलखीन। तखन माय बेटी गरदनी पकैर हाक माइर हबोढ़ेकार भ’ कनैत छलखीन। कियो एहन नञि रहैत छल जे नञि कनैत ई देखी। भरि नग्रक लोक कनियाक खैक करैत छलखीन आ सभ खैक देखी कनिया हाक माइर कनैत छलखीन। खैक हमरा सभ दिश एखनो चलैत अछि मुदा द्विरागमनक बाद जौं कनिया अबैत छथिन तखन।
