लेख विचार
प्रेषित: चांदनी झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
#विषय-आधुनिक युवा-युवती सबके आधिकारक संग कर्तव्य बोध कतेक आवश्यक
‘युवा-युवती’ जेकि समाजक एकटा एहन स्तंभ छैथ जाहि पर आबै वला कैल्ह हिनके सोच आ व्यवहार पर निर्भर करैत अछि
हिनके मे शारिरिक और मानसिक दुनु रुपे समाज के मजबूत आधार दै के शक्ति विद्यमान रहैत छैन।
आधुनिक युवा-युवती सभ के लगभग अधिकारक बारे मे ज्ञान रहै छैन चाहे ओ बेसी पढल होय या कम!
लकिन कर्तव्य पथ स विमुख….
ई एकटा गम्भीर विचारणीय विषय भेल जा रहल ऐ,खास कके भारतीय समाज के लेल।
कर्तव्यबोधक दिशा स भटैक रहल ई वर्ग आखिर जा कत् रहल ऐ?
कारण- पश्चिमी सभ्यता के पसार,परिवारिक माहौल, बेरोजगारी,प्रतिस्पर्धा,मोबाइल के अत्याधिक इस्तेमाल इत्यादि।
आब प्रश्न ई जे हिनका कर्तव्यबोध केना कराबी ?
कहल गेल छै जे बच्चाके जनम के बाद सं ही माय-बाप कर्तव्यक पाठ पढबै छथिन,
फेर ओहे बेटा-बेटी युवावस्था में जाक् कर्तव्यविहीन भेल जा रहल छैथ।
जेकर दुष्परिणाम स्वरुप वृद्धाश्रम मे बुजुर्गक संख्या में बढोत्तरी,दाम्पत्य जीवन में बिगड़ैत तालमेल, फलस्वरूप तलाक में वृद्धि , आत्महत्या,आत्मकुंठा,असंतोष आदि।
कतौ-कतौ लोक एकर जिम्मेवार आधुनिक शिक्षा आ बदलाव के सेहो मानै छथिन पर ई तर्कपूर्ण कथन नै होयत कियाक कि परिवर्तन त संसारक नियमे छियै, यदि समाज मे बदलाव नै होइतै त् सती प्रथा,बाल विवाह,पर्दा प्रथा सनक कुप्रथा सभक अंत केना होइतै?
आब समय आबि गेल ऐ समाजक ई मजगुत पिलर (युवा-युवती) सभ के सही-गलत के भान कराबी।
युवा-युवती के भावी,चरित्रवान एवं कर्तव्य बोध कराबैक लेल वैदिक ज्ञान ,सभ्यता -संस्कृति सं लक् आधुनिक तकनीक आ विज्ञानक संगम के संग यदि सही मार्ग देखेल जायत् अवश्य ही युवा-युवती सभ्य-शिक्षित, संस्कारी, नैतिकमुल्य के लके अपन दायित्व के निर्वाह करैत सुन्दर समाजनिर्माण मे भागीदार बनता/बनती।
