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उपवास लाभकारी अछि धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ परन्तु अति सर्वत्र वर्जयेत

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लेख विचार

प्रेषित: गीता कुमारी ‘गायत्री’
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- “व्रत या उपवास करबाकेँ धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व”

*व्रत उपवास के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व*:—–हम सभ धार्मिक प्रवृत्ति के छी तो सनातन धर्म मे पूजा पाठ के आधार धर्मं मानल गेल अछि। व्रत केला सँ मन  शान्त रहै छै और भगवान पर बेसी ध्यान रहय छै।

धर्म कर्म दान पुण्य मे मनुष्य के बहुत सुख मिलैत छै।
कोनो पाप करूं,किनको कष्ट दियौ, हिंसा करूं त बहुत दुःख होइत छै। तैं मनुष्य के अपन धर्म कर्म मे समय वितेवाक चाही।
व्रत उपवास केला सँ शरीर के शुद्धिकरण भ जाई छै। शरीर शुद्ध भेला सँ मन शुद्ध होईत अछि।
महिला या पुरुष धर्म के ध्यान मे राखैत व्रत और पूजा पाठ करय छी। व्रत और पूजा धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ बहुत जरूरी अछि। धार्मिक दृष्टिकोण सँ उपवास भगवान के लग वास करय छी, पूजा ध्यान सँ भगवान के स्मरण करय छी।ओहू मे यदि कोनो मनोकामना पूर्ण होइत अछि त विश्वास और बैढ जाइत अछि।
सप्ताह मे एक दिन भैरिदिनक उपवास ,मास मे एक दिन पूरा दिन राइत,और बर्ष मे एक दिन एक राइत निराहार, अर्थात किछ नय,पाइन तक नय,तखन पूरा शरीर के सुद्धिकरण भ जायत अछि।
आब देखू हम धर्म के मानय छी,धर्म प्रधान देश अछि।तखन धर्म के दृष्टिकोण सँ सप्ताह मे एक दिन मंगलवारी,मास मे एक दिन संक्रान्ति और वर्ष मे एक दिन जितिया निराहार व्रत करय छी।पूरा शरीर के स्वच्छ और सुंदर बना दैत अछि।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सेहो उपयुक्त अछि।
धार्मिक दृष्टिकोण से सभ व्रत और पूजा पाठ के अलग अलग विधान अछि। मंगलवारी करै छी त बजरंगबली के ध्यान करय छी, बुधवार गणेश जी के, गुरुवार विष्णु भगवान शुक्रवार के मां संतोषी जी, शनिवार के शनिदेव और बजरंग बली के रविवार के सूर्य भगवान जी सोमवार के देवो के देव महादेव जी के ध्यान मे राखि पूजापाठ और उपवास करय छी।
ओकर बाद संक्रांति के दिन सभ मनोरथ पूर्ण कैनिहार श्री सत्यनारायण भगवान जी के व्रत उपवास, एकादशी के विष्णु भगवान जी के।
एहि तरहें, सभ दिन के हिसाब से व्रत उपवास रहैत अछि।
हम त वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपवास करय छी,जे शरीर के स्वस्थ रहयमे कारगर होइत अछि।
शरीर के रेस्ट भेटय छै।संगे भगवान पर ध्यान सेहो जाय अछि।
अंततः दुनु दृष्टि सं उपवास लाभकारी अछि। धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ सार्थक अछि।
तखन अति सर्वत्र वर्जयेत, तेँ ई
वाला बात नय जे सभ दिन सहले रहब ,सभ दिन उपवासे करब आ स्वास्थ्य खराब कऽ लेब। शरीरके ध्यान मे रखैत धर्म – कर्म वा व्रत करै कऽ चाही।

 

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