पिताक देल थपकी,पारिवारिक भार उठैब सिखबैत अछि

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लेख विचार
प्रेषित: आभा झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय- ” परिवारमे पिताक महत्व ”

पिता परिवारक एक महत्वपूर्ण हिस्सा छथि। पिताकेँ महत्व शब्द सँ परे अछि कियैकि पिता ओ व्यक्ति अछि जे अपन परिवार आ बच्चाक जरूरत पूरा करयकेँ लेल अथक प्रयास करैत अछि। पिताकेँ लऽग लोरी नहिं होइत अछि। पिताकेँ लऽग होइत अछि थपकी, जाहिसँ बच्चा मीठ नींदमे सुतैत अछि। ई थपकीये पिताक रूप अछि। थपकी बच्चा देख नै पबैत अछि मुदा मायक लोरीक संग ओकरा महसूस करैत अछि। पिता होइकेँ अर्थ अछि महसूस केनाइ। पिता होइकेँ अर्थ अछि जे देखाइ नै दैत छथि तइयो शामिल रहैत छथि। माता पृथ्वीसँ भारी छथि। पिता आकाशसँ ऊँच छथि।
चाणक्य नीतिमे लिखल अछि कि -:
जनिता चोपनेता च, यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता, पचैते पितरः स्मृताः।
अर्थात एहि पाँचकेँ पिता कहल गेल अछि – जन्मदाता, उपनयन करै वाला, विद्या देबै वाला, अन्नदाता आ भयत्राता। पिताकेँ बहुत कम मौका पर हम खुश होइत देखैत छी। एहेन लगैत छल मानू ओ अपन खुशी जीवनक लेल फिक्सड डिपोजिट जेकां जमा कऽ रहल छथि। ताकि समय एला पर ओकरा अपन प्रियजन पर लुटा सकैथ। ” चौक सँ अबैत काल दू टकाकेँ जगह एक टका आ एक टका पर तैयार भेला पर, अठन्नी पर चलै वाला रिक्शाकेँ लेल पिता घंटो-घंटा ठाढ़ रहैत छथि। धीरे-धीरे सभक लेल सुविधा जुटबैत छथि, मुदा अपने ओहिमे नहिं या कमसँ कम शामिल हेता।”।
पिता अपन खुशीकेँ त्यागि कऽ अपन परिवारक लेल दिन-राति मेहनत करैत छथि। पिताक हृदयमे परिवारक लेल त्याग, सद्भावना आ समर्पण भरल रहैत अछि मुदा सहज पुरूषार्थक प्राकृतिक गुणकेँ कारण ओ कखनो एहि बातकेँ प्रत्यक्ष रूपमे प्रकट नहिं कऽ पबैत छथि। पिता परिवारक जिम्मेदारीसँ लदल ओहि रथक सारथी छथि जे परिवारमे सभकेँ बराबरकेँ हक दियबैत छथि। पिता अपना आपकेँ कठोर बना कऽ बच्चाकेँ कठिनाई सँ लड़नाइ सिखबैत छथि आ परिवारक लेल एक कवच छथि, जेकर सुरक्षामे रहि कऽ बच्चा अपन जीवनकेँ दिशा दऽ सकैत अछि। जिनकर दिनचर्या अपन परिवारकेँ सुचारू रूपसँ चलबैकेँ लेल होइत अछि। पिता सिर्फ बीज प्रदान कऽ संतान निर्माण ही नै करैत छथि बल्कि ओकरा हरेक दिन अपन आजीविका सँ सींच कऽ एक विशाल वृक्ष तैयार करैमे अपन पूरा शक्ति लगा दैत छथि। पिता चाहे – अमीर-गरीब, सफल-असफल, शिक्षित या अशिक्षित केहनो होइथ मुदा हुनकर इच्छा हमेशा अपन संतानकेँ हर क्षेत्रमे अपना सँ बेसी सफल आ ऊँच देखयकेँ होइत छैन्ह। माय-बापक बिना जिंदगी अधूरा अछि, माय रौदसँ बचबै वाली छाहरि अछि तऽ पिता ठंडा हवाकेँ ओ झोंका अछि जे चेहरासँ निराशाक बूंद के सोखि लैत अछि।
सौ बातक एक बात ई अछि कि ‘ धरती हमर माँ अछि तऽ सूर्य हमर पिता। सूर्यकेँ बिना धरती आ धरती पर जीवनक परिकल्पना अर्थहीन अछि। ओहि तरहें पिताकेँ बिना परिवारक परिकल्पना नहिं कयल जा सकैत अछि।