स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन

लेख

– संगीता मिश्र

स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन
(महिला सच मे दोसर महिलाक दोस्त होइत छथि आ कि दुश्मन? हमर कटु अनुभव)
आइ जतेक टूटल-बिखड़ल परिवार देखाइत अछि तेकर जड़ि मे महिलाक भूमिका रहिते टा छैक। आ सब सँ दुखद बात ई जे बेसी केस मे कोनो महिले दोसर महिलाक हक-अधिकार आ इच्छा-मनोरथ विपरीत खराब नजरि लगबैत छैक। पुरुष प्रधान समाज मे कोनो महिला अपन सम्मान आ अधिकार के बारे मे कोना गप्प क सकैत अछि जखन ओ कोनो दोसर महिला के सम्मान नहि करैत अछि? जखन ओ स्वयं एक-दोसराक मदत नहि करय चाहैत अछि आ नहिये दोसरक बातो तक सुनय चाहैत अछि, तखन स्त्री अस्मिता आ सम्मानक वकालत करब कतेक उचित भेलय? भले ही खुद ओ एहि तरहक समस्या सँ गुजरि चुकल होयत, भले ही ओकरा पता होय कि ओकरा दोसर महिला के साथ कयल जा रहल दुर्व्यवहारक कारण ओकरो खराब लागि रहल हेतय, मुदा तैयो ओ संघर्ष कय रहल महिला प्रति कनिकबो दया-माया नहि रखैत अछि त महिला सम्मानक बात करब कतेक उचित हेतय ओकरा लेल? कखनो ईर्ष्या मे, कखनो अपन कुंठा मे, कखनो अपन निजी स्वार्थ मे – एक महिला दोसर महिलाक हक-अधिकार केँ लात मारैत अछि से स्पष्टे देखल जा सकैत अछि वर्तमान सामाजिक व्यवहार मे।
अपनहि आसपास एतेक रास उदाहरण देखय लेल भेटत जाहि मे कोनो महिला केँ जे परेशान करैत अछि ओ स्वयं एकट़ा महिले होइत अछि। ओ भले अपनहिं लेल लाचार आ कमजोर कियैक न हो, लेकिन दोसर महिला केँ परेशान करय के हिम्मत ओकरा मे भरल रहैत छैक। बुझायत जेना कतेक बेसी भावुक अछि, मुदा दोसर महिला केँ नीचाँ खसबय मे, ओकर घर-परिवार उजाड़य मे, ओकर पति केँ बहकाबय सँ लयकय हर तरहक उछन्नर दय मे ओकरा लग मनुखता वला कोनो भाव नहि बचल रहैत छैक।
किछु दिन सँ अहाँ सब लग अपन कटु अनुभव सब लिखि रहल छी। देखलहुँ जे कनी आगू बढ़ि हिम्मत कय केँ समाजक बीच ओहि कष्ट केँ लेखनीक माध्यम सँ रखला पर बहुते लोक मे हिम्मत बढ़ि रहल छन्हि। हमरा पास फ्रेन्ड रिक्वेस्ट के भरमार लागि गेल अछि। कतेको लोक फोन कय केँ बातो कयली अछि। एहेन-एहेन दुखड़ा ओ सब शेयर कयली जे हमरा सोचय लेल बाध्य कय देलक। एना लागल जे हम अहाँ सब सँ किछु मोनक बात शेयर कय केँ नीक कयलहुँ। कम सँ कम अहुँ सब अपन दुःख-कष्ट हमरा संग शेयर कय हमरा अपन दुःखक संगी बुझलहुँ। किछु लोक हमरा सँ आर्थिक आत्मनिर्भरताक विन्दु पर सलाह सेहो मंगलहुँ, हम यथोचित सुझाव देबो केलहुँ आ फेर कहैत छी, दुःखक संगी असल संगी होइत छैक, अहाँ सब चिन्ता बिल्कुल नहि करू, लड़ू आ बढ़ू। हमरा सँ जतेक भ सकत हम संग देब। बस ठाढ़ होउ। अगबे स्त्री विमर्श सँ किछु नहि भेटल आ न आगू भेटत। संघर्षक बेर मे चुप रहनाय, कोण मे बैसिकय नोर बहेनाय, ई सब कायर लोक के काज छी। कायरता सँ आगू बढ़ू सम्मानित महिला शक्ति!
अपन समाज मे सुधार के आशा तखने कय सकैत छी जखन हम सब अपना मे सुधार करब। महिला अपन अधिकारक लेल तखने लड़ि सकैत अछि जखन ओ कोनो आन महिलाक दुश्मन नहि बनती, धरि दुःख मे रहल आ विपत्ति पड़ल केँ डेन पकड़ि हुनका उठौती। आ जे महिला शक्तिक सशक्त बनेबाक अगबे गप्पे टा करैत छथि से कहियो सफल नहि भ’ सकैत छथि जँ ओ दोसर पीड़ित महिलाक घाव पर नून छिटयवाली दुश्मन छथि। एकटा बात सब कियो कान खोलिकय सुनि लिय’ – जे सब एहेन दुष्टा आ पीड़ दयवाली सब छथि, हुनका सब पर सेहो एहने समस्याक तलबार माथ पर लटकल छन्हि।
महिला अधिकार लेल लड़यवाली महिला सब जखन महिलाक संग नहिं छथिन्ह त ओ कोनो पुरुष सँ कि उम्मीद कय सकैत छथिन्ह? पुरुष उल्टा हुनका यूज करथिन आ पानक पिक जेकाँ कतहु उगैल देथिन।
अपन विवाहित जीवन मे जहर घोरयवाली महिला सँ जे पीड़ाक अनुभव हमरा भेल से एकठाम अछिये, लगभग १० वर्ष सँ हम महिला अधिकार लेल लड़यवाली महिला सभक चरित्र देखि आइ ई लेख अपने सब लग राखय लेल बाध्य भेल छी। कतेको मुंहपुरुख सभक अन्यायपूर्ण एकपक्षी निर्णय के गाथा सेहो कहबाक अछि हमरा, लेकिन आइ पहिने महिले जे महिलाक दुश्मन होइत छथि तिनकर बारे अपन धारणा स्पष्ट कय दी।
हमरा सब केँ अपन सोच बदलबाक चाही। अपन और समाज मे अन्य महिलाक दुश्मन नहि बनू। एक-दोसर के साथ दियौक। अपने सन आनो महिला केँ बुझू। अहाँक संग अगर गलत भेल त अहाँक बेर मे पुरुष गलत आ दोसर महिला संगे भेलनि त अहाँ ओहि अत्याचारी पुरुष केँ महापुरुष बनाबय मे लागल छी? कियैक? कि हुनका स अहाँ केँ कोनो निजी स्वार्थ या आर्थिक स्वार्थ के पूर्ति हाेयत अछि? ई जरूरी नहि छैक जे ई समस्या अहाँ पर कहियो नहि आओत ताहि लेल ओहेन दुष्चरित्र केँ अहाँ अपना संग किऐक आनब? या फेर बिना समुचित बुझनहिये महिला रहैत महिले पर गलत सवाल किऐक ठाढ़ करब? एहि सोच केँ बदलू।
आब जखन महिलाक हालत एतेक सुधरल अछि समाज मे, जखन ओ एतेक सक्षम भ’ गेल अछि, तखन जे महिला सक्षम नहि छथि हुनका डेन पकड़िकय आगू बढ़ेबाक प्रयास करू। आ, महिलाक उपस्थिति मे एहि पुरुष प्रधान देश मे बस महिला सशक्तिकरण के बात करू लेकिन काज उल्टा करब तखन फेर नेम-फेम लेल जानकी नवमी मनबैत रहू, महिला भ’ महिले के शोषण मे पुरुष केँ साथ दैत रहू, भले ही खुद अपन दुराचारी पति सँ शोषित कियैक न छी। जा धरि महिला के संग रहय वाला दोसर महिला नहि रहत ता धरि किछु नहि होयत। ध्यान स सोचू।
एकटा स्त्री कि दोसर स्त्री के दुश्मन होइत अछि? ई केहेन हास्यास्पद कथन अछि!! एकहि लिंगक लोक एक दोसराक दुश्मन कोना भ’ सकैत अछि? भौतिक संरचना, मानसिक आ मनोवैज्ञानिक संरचना लगभग एक्के रंग अछि सब मे। सब केँ अपन-अपन उम्र मे गर्भावस्था, पीरियड्स आ हार्मोनल परिवर्तन केर समस्या सभक सामना करय पड़ैत अछि। महिला लोकनिक डरो लगभग एक्के.. कखनो बलात्कारक, कखनो छेड़छाड़क, कखनो गंदा आँखि के, कखनो नौकरी छुटबा के, कखनो जीवनसाथी सँ अलग होयबा के, कखनो आर्थिक मोर्चा पर अकेले अपन जिम्मेवारी के निर्वहन के… महिला सब के एके दुःख, साझा पीड़ा आ साझा भावना अछि, तहन कहिया स आ कोना एक दोसर के दुश्मन बनि गेलहुँ? अपन स्वार्थ पूर्ति लेल एक दोसर के दुश्मन भेनाय एकदम नहि हेबाक चाही। पढ़ल-लिखल महिलाक दोहरी मानसिकता के होइत छैक से बहुत दुखद अछि। स्त्री स्त्रीक दुश्मन बनि जाइत अछि।
एक महिला केँ दोसर महिलाक संग अनिवार्य रूप स देबाक चाही। एखनो समाज मे बहुते एहेन महिला सब छथि जे दोसर महिला के मानसिक रूप स साथ दैत छथिन, ओकर टूटल मनोबल केँ फेर सँ बढ़बैत छथिन, पुरुष प्रधान समाज मे इज्जत के साथ अपन बच्चा के लालन-पालन करय के हिम्मत दैत छथिन। हम आइ एहने गोटेक मनोबल बढ़ेनिहाइर महिलाक बदौलत अपन दयनीय अवस्था सँ बाहर निकलबाक अथक चेष्टा कय रहल छी। हिनका सब सँ अपनो लोकनि किछु सीख ली से प्रार्थना करैत छी। धन्यवाद!!