विपत्ति मे सिवाये भगवान् दोसर के?

लेख

– संगीता मिश्र

विपत्ति मे सिवाये भगवान् दोसर के?

प्रत्येक मनुष्य के जीवन मे कोनो तरहक आपदा-विपदा पड़ि जाइत छैक, ओकर पीड़ा मे असगरे ओ तड़पैत आ छटपटाइत रहैत अछि, समाधान के बाट तक नहि सुझाइत रहैत छैक, एहेन दुरावस्था मे कियो संग देनिहार विरले अभरि पबैत छैक…. हमर अनुभव एहने कड़ू आ तीत रहल अपन जीवन मे।

सर्वविदिते अछि जे पति-पत्नी बीच सम्बन्ध बहुत पवित्र होइत अछि। स्त्री-पुरुषक सम्बन्ध गाड़ीक पहिया जेकाँ होइत छैक, जाहि मे कनेक असंतुलन भेला पर दुनू छिड़िया जाइत अछि। अक्सर देखल जाइत छैक जे दंपत्तिक विवाह उपरान्त कोनो तेसर के प्रवेश सँ बड़ा भारी प्रभाव पड़ैत छैक। धीरे-धीरे सुन्दर सम्बन्ध मे दरार आबय लगैत छैक। सम्बन्ध आ विश्वास दुनू डगमगाय लगैत छैक।

हमर सुखमय विवाहित जीवन आ बाल-बच्चा सहितक गृहस्थी मे सेहो यैह दुर्घटना घटित भेल। अपन सुनाम (प्रतिष्ठित लेखक-साहित्यकार एवं प्रकाशक) पतिक संग जीवन खूब नीक चलि रहल छल। एक पढ़ल-लिखल आ बुद्धि-विवेक सँ अपन परिवारक आर्थिक स्थिति केँ मजबूत करबाक लेल अपन पतिक जीवनसंगी रूप मे हमहुँ प्रकाशन कार्य मे खूब बढ़ि-चढ़िकय सक्रिय जिम्मेदारी निर्वाह कय रहल छलहुँ, संगहि अपन तीन बच्चा केर लालन-पालन मे सेहो कतहु कोनो कमी नहि रहय ताहि पर पूर्ण ध्यान दैत रही। मुदा हमर सुखक समय बेसी दिन नहि टिकल आ कनी बेसी पैसा आमदनीक चक्कर मे पति हमरा पर प्रकाशन कार्यक जिम्मेदारी दय अपने किछु अतिरिक्त कार्य करबाक लेल घर सँ निकललाह, यैह हमरा लेल काल सिद्ध भेल। दुनिया लेल लेखक-साहित्यकार आ विद्वान् व्यक्तित्व मुदा अन्दर मे नुकायल हवसी, कामी आ अनेकों कपट, यैह धोखा एक समर्पित धर्मपत्नी लेल ओकर सुख, चैन आ शान्ति केँ खायवला राक्षस सिद्ध भेल। कनी दु पाइ फाजिल आमद होयत, धियापुता केँ खूब उच्चस्तरीय विद्यालय मे पढ़ायब, अपन जमीन-मकान कीनब, अनेकानेक सपना मात्र पैसे सँ पूर्ति होइत छैक से सब सोचि अपन पति केँ नव अभियान मे जेबाक लेल प्रेरित करब, हुनक प्रस्ताव केँ मानि लेब… बस ई लोभ हमर गृहस्थी मे आगि लगा देलक आइ यैह अनुभूति हमर माथ मे बेर-बेर नाचि रहल अछि। बेर-बेर वैह दृश्य घुमि रहल अछि। असीम कष्ट मे पड़ि जाइत छी ई सब स्मरण कय केँ। फेर कोहुना सम्हरैत छी, शक्ति अर्जित करैत छी, मुठ्ठी कसैत छी, ठाढ़ होइत छी आ जतेक सम्भव अछि ततेक एहि बेहाल आ बदतर दुनिया केँ बेहतर बनबय लेल दौड़ि पड़ैत छी। ईश्वर हर खन संग छथि, यैह बल बेस शक्तिशाली बना दैत अछि।

संघर्षक पैछला १० वर्ष मे गोटेक लोक बड़का-बड़का मोछवला पुरुष आ महिला हमर पीड़ा कम करबाक नाम पर अबैत छथि आ समस्याक समाधान त कि करता उल्टा अनेकों तरहक पीड़ा बढ़ाकय मानसिक रूप सँ हमरा बीमार बनेबा मे कोनो कसैर बाकी नहि रखैत छथि। एक त प्रकृति द्वारा कमजोर बनायल गेल छथि महिला, ताहि पर सँ आपदा-विपदाक मारल अनेकों संघर्षक पीड़ा सँ कमजोर बनल ओ महिला, फेर ई स्वार्थ व सनक सँ बीमार मध्यस्थकर्त्ताक अवांछित हस्तक्षेप – अरे! कतेक झेलथि ई महिला?

एखन धरि अनेकों मध्यस्थकर्त्ताक प्रवेश एहि संघर्षक वर्ष मे भेल। हमर पतिक दुष्चरित्र होयबाक वकालत करैत अबैत छथि आ कहैत छथि जे जैँ अहाँ अपन पति पर पकड़ (लगाम) नहि रखलहुँ, तेँ ओ छुट्टा साँढ़ बनिकय बहैक गेलाह। कहाँ दिना हमर पति हुनका सब केँ यैह दलील दैत छथिन…. पत्नी जीवनयात्रा मे छोड़ि देलीह, बहुत दिन धरि प्रतीक्षा कयलहुँ, बाद मे मजबूरी मे ओ बहैक गेलाह। कहू त! बहकबाक एकाधिकार केवल पुरुषक पास छैक की? आ स्त्री बाध्य छैक जे कुल के निशानी सन्तति केर रक्षा लेल अपना केँ जोगिनी बनेने रहय? धृष्टताक पराकाष्ठा – लानत अछि एहेन चुगलखोर टाइप मध्यस्थकर्ता पर। हमरा नहि बुझाइत अछि जे हमर पति किन्नहु एहेन बात बाजि सकैत छथि। हमरा संग अनेकों वर्ष धरि संग रहल लोक, ३-३ सन्तानक पिता बनल लोक… ई नीक सँ बुझैत जे पत्नी हमरे कुल-खानदानक निशानी सभक लेल संघर्ष करैत पटना जेहेन महंगा महानगर मे नीक स्कूल आ परिवेश मे सब केँ राखिकय पढ़ा-लिखा रहल छथि, कि ओ प्रतिष्ठित साहित्यकार-लेखक आ चिन्तक एतेक निम्नस्तरक बात बाजि सकैत छथि? आ कि ई चुगलखोर टाइप मध्यस्थकर्त्ताक अवांछित हस्तक्षेप एक दुखिता-पीड़िता के जीवन मे कोनो आन स्वार्थ लेल भेल? खैर..! समय पर न्याय छोड़ि आगू बढ़यवाली पीड़िता लेल ईश्वर सर्वोपरि छथि।

यदि हम हुनकर साथ नहि देलियन्हि ताहि कारणे ओ ओहि दुष्चरित्रा संग अपन कुकर्म केर पसार करय लगलाह… त हम पुछैत छी जे कुकर्म करबाक हक सिर्फ हुनके टा छन्हि? अगर हमहूं ओहि दलदल मे आगू बढ़ि जइतहुँ त एहि सोन सन-सन अबोध बच्चा सभक भविष्य केर कि होइतय? कि ई सिर्फ माँ सब केँ सोचइ के काज थिकैक? बाप के फर्ज़ ३ टा बच्चा केँ छोड़ि चारिम के जन्म दैत आगाँ आर अनबाक तैयारी जायज छैक की? ई सब दलील आ विमर्श समय पर छोड़ि रहल छी।

आर हँ, हमर लेखनक प्रभाव समाज पर पड़ि रहल अछि। हम बुझि रहल छी जे एकर बड पैघ लाभ हमर पीड़ाक हरण मे नहि होयत। लेकिन समाज मे एहि तरहक दुष्चरित्र पति वा पत्नी आ तेकर अन्तिम दुष्प्रभाव सँ बच्चा सभक जीवन मे जहर घुलबाक कथा-गाथा लोक सब बुझत, सतर्कता सँ अपन गृहस्थी प्रति साकांक्ष रहत, लेख लिखबाक उद्देश्य एतबा अछि। लेख लिखला सँ हम बहुत हल्का महसूस करय लागल छी। कानूनी हक लेल केस लड़ि रहल छी, ओ लड़बे करब। कानून मात्र अन्तिम विकल्प होइत छैक। परञ्च समाज मे किछु नीक लोक छथि आ ओ सब हमर सम्बल छथि। नैहर सँ सासुर धरि, साहित्य सँ समाज धरि आ सृजन सँ जीवन धरि – सब ठाम हमरो लेल सहारा अछि एहि चरम कलियुगो मे। हम एखन धरि ओतबे बात सब लिखलहुँ अछि जे साहित्यक रूप मे बुझल जायत समाज मे। हम उकटा-पैंची आ तर्क-कुतर्क आ जिरह-बहस के बात लिखि पाठकक समय खराब नहि करय चाहि रहल छी। पतिक नाम तक नहि लिखबाक यैह मूल कारण अछि। एक पतिव्रता नारी जरूरी मे अपन पतिक हवस पूरा करय लेल वेश्यालय तक जेबाक दृष्टान्त बुझल अछि हमरा। एक संस्कारी परिवारक बेटी छी हम। अपन मूल आ मौलिक संस्कार पर गर्वबोध अछि। हम अपन सन्तान मे संसार देखयवाली पतिव्रता मिथिलानी छी। सीता हमर आदर्श थिकीह। आजुक साहित्यकार जेकाँ ‘अनेरुआ सीता’ आ ‘समाज मे परनारी संग लीलाधारी’ हम एकदम नहि छी। अपने सब पढ़ैत रहू। किछुए दिन मे हम समाज मे प्रकट रूप मे आयब। धन्यवाद।