अमित आनन्द, नई दिल्ली! जुन २६, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!!
मैथिली साहित्य महासभा दिल्लीक हालक एक बैसार द्वारा आगामी २ अगस्त, २०१५ कन्स्टीच्युशन क्लब दिल्ली मे ‘मैथिली-मिथिला सँ संबंधित’ विषय पर व्याख्यानमालाक आयोजन कैल जेबाक निर्णय लेल गेल। मैथिली साहित्य महासभा दिल्लीक संस्थापक संजीव सिन्हा कहलनि जे महासभा अपन स्थापनाकालहि सँ मैथिली भाषा, साहित्यक संग मिथिलाक अनमोल संस्कृति प्रति पूर्ण समर्पित रहैत बड़-बुजुर्ग साहित्यकार तथा बुद्धिजीवीक मार्गदर्शन मे विभिन्न कार्यक्रम करैत आबि रहल अछि। ई व्याख्यानमाला सेहो बहुत दिन सँ नियारल कार्यक्रम मे सँ एक होयत। तहिना मैथिली साहित्य महासभाक सह-संस्थापक एवं परिकल्पक अमरनाथ झा एहि लेल साहित्य क्षेत्र मे योगदान देनिहार विभिन्न पुरोधा लोकनिकेँ आमंत्रित करैत कार्यक्रम आगाँ बढेबाक प्रतिबद्धता केँ दोहरेलनि। २ अगस्त केर व्याख्यानमाला लेल मैथिली तथा हिन्दी साहित्य मे अगाध योगदान देनिहारि मैथिलानी नेत्री पद्मश्री डा. उषा किरण खाँ केँ आमंत्रित कैल जेबाक जानकारी भेटल अछि। श्रीमती खाँ केर मैथिली उपन्यास भामती लेल २०११ केर साहित्य अकादमी सम्मान आ हिन्दी एवं मैथिली साहित्य मे विशाल योगदान लेल पद्मश्री सम्मान सेहो राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जीक हाथ सँ भेटल अछि। श्रीमती खाँ पहिल मैथिलानी छथि जिनका एतेक उच्च राष्ट्रीय सम्मान देल गेल अछि। हिनक साहित्यिक योगदानक ऊँचाई मे आरो कतेको रास सम्मान जुड़ल अछि। विदित हो जे श्रीमती खाँ लेखनीक संग-संग महिला उत्थान तथा सामाजिक विकास मे सेहो अपन अनेको योगदान दैत प्रथमत: मातृभाषा आ अन्तत: राष्ट्र सेवा केवल केर प्रखर पोषक एवं प्रवर्धक छथि। देश भरि मे आयोजित कोनो महत्त्वपूर्ण मैथिली-मिथिला गोष्ठी मे सेहो श्रीमती खाँ केर उपस्थिति आ अपन मातृभाषा मैथिली सँ प्रेमक अकाट्य उदाहरण देखल जाइत अछि। जननायक जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित महिला चरखा समितिक अध्यक्षता सेहो श्रीमती खाँ द्वारा २००९ सँ २०१२ धरि कैल गेल। ‘मिथिलाक सांस्कृतिक इतिहास’ विषय सँ पीएचडी डा. उषा किरण खाँ केँ गार्गी, मैत्रेयी, भारती समान विदुषी सँ लोकसमाज मे बहुचर्चा कैल जाइछ।
दिल्ली मे मैथिली-मिथिला सचेतना अत्यन्त ऊँचाई केँ छूबि रहल अछि। कतेको दशक सँ एहि ठाम भिन्न-भिन्न मैथिल संस्था एहि बातकेँ प्रमाणित करैत अछि जे बौद्धिक सामर्थ्य मे ऊँच स्थान पर रहनिहार मैथिल समाज अपन भाषा, संस्कृति, सामुदायिक एकता आदि गंभीर विषय पर प्रवासक दौड़ान सेहो एकत्रित रहैत छथि। भाषिक पहिचान हेतु दिल्लीवासी मैथिलक संघर्ष आ साहित्यकार योगदान – यैह दुइ महत्त्वपूर्ण कार्य सँ भारतीय संविधानक अष्टम् अनुसूची मे मैथिली केँ सम्मानित स्थान भेटबाक अकाट्य प्रमाण उपलब्ध अछि। विगते किछु वर्ष मे चिन्ता एहि लेल बढि रहल अछि जे नाममात्रक संवैधानिक सम्मान मात्र सँ उल्लेखणीय उपलब्धि नहि भेट सकल, व्यवहार मे सरकार द्वारा उपेक्षा ओतबे आ ओहने बनल अछि जेना संविधान मे स्थान देबा सँ पूर्व छल। किछेक सुविधाक छोड़ि बाकी सब उपेक्षा आइयो मैथिली लेल शत्रुवत् व्यवहार कय रहल अछि। मैथिली भाषा सबहक भाषा थीक, एतबो सत्य सँ परिचय करेबाक कार्य राज्य द्वारा नहि भऽ सकल अछि। एखनहु साहित्यिक सम्मान मे झाजी, मिश्रजी, ठाकुरजी आदि बड़ जाति केर राज कायमे अछि। सब मैथिलीभाषी केँ साहित्यिक योगदान केर दिशा मे संवर्धन-प्रवर्धन लेल साहित्य अकादमी समान प्रतिष्ठित संस्था पर्यन्त राजनीतिपूर्वक विभेद केँ आगाँ करैत मैथिली केँ मृत्युदान देबाक दिशा मे कार्यरत अछि। एहेन समय मैथिली साहित्य महासभाकेर कार्य सँ दिल्ली सहित देशक आन-आन भाग मे भाषा एवं पहिचानक संवर्धन-प्रवर्धन आ संरक्षण भऽ सकय एहि लेल प्रयास निरंतर कैल जा रहल अछि।

6 Comments
आनःददायक खबरि ।
मुदा पहिल मैथिलानी श्रीमती आद्या झा ( स्व0दित्यनाथ झाक धर्मपत्नी) छलीह जिनका पद्मश्री सम्मान भेटल छलनि ।
बहुत महत्त्वपूर्ण जानकारी… ई सब नहि जानि कतय हेरायल अछि… कृपया आरो विस्तार सँ जानकारी देल जाउ महोदय।
bahut nik karyakram ke parikalpna. ummid ki e karyakram safalata ke naya mukam chumat aa je sab samasya mithila maithilik ae tahi ke nirakaran ke disha me e mahasabha appan aawaj buland karat. akhan bahut rase vikasak jarurat mithila ke ae mahasabha ke agenda me ae vikasak mudda ke rakhu aa ohi par charcha hoy. Sanjeev Babu aa Amar nath ji ke agrim shubhkamna dait chhiyain ae mahasabha ke safalata ke lel.ek ta aur aagrah ki mahasabha mithilak vikasak charcha priority basis par hoy. shesh fer !
महासुन्दरी देवी के सेहो पद्मश्री भेटल छैन मिथिला पेंटिंग के लेल।विश्व के सबसौ महान पेंटर पाब्लो पिकाशो सेहो हिनक पेंटिग केर मुरीद रहल अछि आ कहने छल जे हमरा लोग भले अतेक बड़का पेंटर बुझैत अछि मुदा हम अहि देविक प्रतिभा के आगाँ किछु नहि छी।
बहुत नीक लागल जे पद्मश्री मैथिलानीक सूची लंबा अछि…. सुन्दर जोड़
अरे हमरो ई पता अछि जे लोक जतेक बजैत अछि ततेक करैत नहि अछि… उदाहरण एखन हम ‘मैथिली जिन्दाबाद’ केर देब…. मैथिली-मैथिली करनिहार स्वयं मैथिली कतेक पढैत अछि तेकर सब तथ्यांक हम देखि पबैत छी। बड पैघ पैरोकार पर्यन्त एतेक फुर्सत नहि निकालैत छथि जे एक बेर कम सँ कम अपन भाषाक समाचार पोर्टल खोलिकय पढता… नीक सँ नीक लोक केँ देखि रहल छी जे कहियो एतबो विवेक नहि होइत छैक जे एकटा कोनो रचना वा आलेख वा समाचार केँ शेयर करैत आरो बेसी सँ बेसी पठन संस्कृति केँ बढाबा दितय। बस कहाय लेल पैघ लोक बनि गेलहुँ, बात खत्म भेल। मैथिलीक काज फूकास्टिंग सँ नहि चलतैक यौ भाइ लोकनि। एकरा वर्चस्ववादी बनाउ। ई अहाँक भाषा थीक, एकरा प्रति सिनेह उत्पन्न करबाक लेल उन्मादी बनय पड़त तैयो नहि हिचकिचाउ। अहाँ तऽ हमरे उन्टे डाँटय लेल आबि गेलहुँ…!!
मैथिली साहित्य वर्तमान समय मे प्रिन्ट सँ बेसी डिजिटलाइज्ड भाषा मे लोकप्रिय बनि रहलैक अछि। कियैक? कियैक तऽ एहि लेल समर्पित मात्र १०० गोटा एतेक बेसी लिखि रहलैक अछि जाहि सँ चारूकात लोक केँ मैथिली-मैथिली टा नजैर आबि रहल छैक। हमरा नीक लागल जे सांसद कीर्ति आजाद एक बेर फेर जड़ियायल गप केँ प्रधानमंत्री मोदी धरि पहुँचेला अछि। ओना प्रधानमंत्री मोदी खाली चुनाव प्रचारे टा मे मैथिली केँ सम्मान नहि दय अपन अधिनस्थ सब मंत्री केँ सेहो भाषा व्यवहार मे २२ टा संवैधानिक भाषा प्रति समान दृष्टि अपनेबाक गूढ राष्ट्रवादी नीति केँ बढेला अछि। सब बात पेपर मे पढय लेल भले अहाँ केँ वा हमरा नहि भेटय, मुदा नीति निर्माण करनिहार तक सब बात बढियां जेकाँ पहुँचैत छैक। दूरदर्शन पटना केँ सेहो एहि क्रम मे निर्देशन ई सरकार बनिते दऽ देने छैक। आब जरुरत छैक जे मैथिली मे प्रोडक्सन बढय। बेसी सऽ बेसी एन्टरप्रेन्यर आगू बढय। वेट-वेट! मेनी थिंग्स आर गोईंग टू हैप्पेन इन मैथिली।
मैथिली जिन्दाबाद!!
हरि: हर:!!