दहेज प्रथा एक कुप्रथा बनल – रेडियो कार्यक्रम “मोनक बात” केर प्रभाव समाज पर पड़ब शुरू

गुरुदेव संग ‘मोनक बात’ पर बातचीत
 
रेडियो नागरिक एफएम पर ‘मोनक बात’ कार्यक्रम अरविन्द मेहता जी आ हम पिछला २ शनि केँ सवा ८ बजे सँ १० बजे धरि चलेलहुँ। हालांकि निर्धारित समय अछि मात्र ४५ मिनट, मुदा पब्लिक केर समर्थन आ सहकार्यक जोर देखि एकर समय लगातार २ शनि केँ १ घंटा अधिक राखल गेल। कार्यक्रमक सराहना करैत एक भाइ गुरुदेव ठाकुर जे विराटनगर मे सैलून चलबैत छथि ओ कहलनि जे एहि तरहक रेडियो कार्यक्रम सँ काफी लोक प्रभावित होयत आ बात हेबाक चाही। हम पुछलियनि जे अहाँ केँ कार्यक्रम केहेन लागल त ओ कहय लगलाह जे दहेजक विभिन्न रूप पर जे अपने सब रेडियो पर चर्चा करैत छी, आर एहि मे जाहि तरहें समाजक अन्य बड़-बुजुर्ग लोकनि अपन विचार सब रखैत छथि, तेकर दूरगामी प्रभाव आमजन पर पड़ि रहल अछि। ओ कहलनि जे हम २ शनि सँ ई कार्यक्रम सुनि रहल छी आर एहि पर जारी चर्चा सँ सहमत छी।
 
गुरुदेव एकटा आर बात कहलनि – १० वर्षक बाद दहेज प्रथा बन्द भ’ जायत से उम्मीद करैत छी। हम चौंकलहुँ, पुछलियनि जे से केना कहि सकैत छी? ओ कहला जे पैछला शनि केँ अहाँ सभक चर्चा मे एकटा बड़ा महत्वपूर्ण बात कियो अभिभावक सुनसरीक देवानगंज सँ कहने छलाह जे ‘युवा सब केँ एहि दिशा मे बेस निर्णायक भूमिका निभाबय पड़तनि’ से एकदम सही छल। हम टोकलियनि जे युवाक मोजर विवाह जेहेन सम्बन्ध तय करय मे अभिभावक (माता-पिता) दैते कतेक छथिन… आर के अपन माता-पिताक विरुद्ध जेबाक इच्छा करैत अछि? ओ एहि बात केँ सही मानैत कहलनि जे से त सही छैक मुदा आब शिक्षाक असैर सब समाज मे देखल जा रहल अछि, शिक्षित युवा-युवती अपन माता-पिताक रूढिवादी विचार सँ दूर जा कय विवाह जेहेन सम्बन्ध पवित्र प्रेम आ सुखद जीवन लेल बनेबाक महत्वपूर्ण निर्णयक रूप मे बुझय लागल अछि। आब कतबो अशिक्षित लोक या पिछड़ल कियैक नहि रहय, लेकिन सन्तान केँ शिक्षित सब बना रहल अछि। शिक्षाक प्रसार जाहि तेजी सँ बढि रहल अछि ताहि सँ हम कहि सकैत छी जे आगामी १० वर्षक बाद विवाहक निर्णय माता-पिताक हाथ सँ स्वयं विवाह कयनिहार युवा-युवतीक हाथ मे चलि जायत। हुनकर तर्क मे दम बुझायल। कहलियनि जे अहाँक दावी दूरदृष्टि सँ पूर्ण अछि, एहिना होयत से हमरो विश्वास कहि रहल य।
 
पुनः जाबत धरि दाढी बनबैत रहलहुँ, कार्यक्रम “मोनक बात” पर ओ निरन्तर चर्चा करैत कहलनि जे युवा-युवतीक निर्णय मे माता-पिताक पुरान विचारधारा आ दहेजक लोभ सचमुच घातक होइत छैक। अपनहि उदाहरण दैत कहलनि जे अपन विवाह मे हमरा कनियाँ एतेक नीक लागि गेल छलीह जे हम अपन पिता केँ दहेजक व्यवहार एकदम नहि करय लेल कहि देलियनि आ सीधे दुनू परिवारक लोक केँ बजाकय मन्दिर मे जा कय माला फेरैत अपन जीवनसंगी संग विवाह केलहुँ। एकरा प्रेम विवाह कहू या सामाजिक विवाह, साधारण एकटा सैलून चलाकय अपन जीवन अपने चलेबाक अन्तर्ज्ञान सँ विवाह लेल सिर्फ जीवनसंगी केँ अपनेबाक लेल तामझाम मे अनावश्यक खर्च करब उचित नहि बुझायल। लेकिन आब जे छोट भाइक विवाह करब त हमरा आ पिताजी मे काफी कहा-सुनी भऽ रहल अछि। पिताजी केँ हम स्पष्ट कहि देलियनि जे कोनो बेटीवला पर जबरदस्ती मांग थोपिकय विवाह करबहक से हमरा मंजूर नहि होयत, हमरा ओहेन विवाह मे भागो लय मे नीक नहि लागत, तूँ सब विवाह तय करह आ जे मोन हुअ से करह। पिताक कहब छन्हि जे तोरे जेकाँ सादा-सादी मन्दिर मे विवाह करबाक नहि अछि हमरा, बिना दहेजक विवाह मूर्ख लोक सब करैत अछि। गुरुदेव पिता केँ बुझबैत कहने छल जे से अपना मोने जेकरा जे देबाक रहैत छैक ओ त देबे करतह। पिता कहलकैक जे तेकर गारन्टी तूँ ले जे अपना मोने सब किछु दय देतैक… तखन हम सब नहि मंगबैक।
 
एतय टर्निंग प्वाइन्ट भेटल हमरा। गुरुदेव कहलक जे बेटीवला सब सेहो तोरा लोभी होइत छैक। बेटीवला सब जँ अपन स्वेच्छा सँ कुटुम्बक इच्छा पूरा कय देतैक आ सब काज ढंग सँ सम्पन्न करत तखन ओकरा सब सँ अनावश्यक मांग कियैक कयल जेतैक? गुरुदेवक प्रश्न कोनो बेजा नहि रहैक। टका-पैसा आ खर्च-व्यवस्था मे बेटीवला केँ छूट भेटब ओकरा सभक लेल सेहो एकटा एहेन मौका होइत छैक जेकर आड़ मे ओ सब आर अधिक बचेबाक आ कुटुम्ब पक्षक सम्मान सही सँ नहि करबाक आचरण अपनबैत अछि। ई आदर्श नहि भेलैक। जँ अहाँ सँ मांग नहि भेल त अहाँ केँ चाही जे न्युनतम जिम्मेदारी आ विवाह जेहेन खर्चीला यज्ञक उचित भार जरूर वहन करबाक आदर्श पर स्वयं चलू, बेटीवला एहि मे कंजूसी कय कुटुम्ब पर बेसी निर्भर भऽ जाइत अछि जाहि सँ उल्टा बेटावला केँ अपने कर्जा तक करय पड़ि जाइत छैक। तखन एहेन आदर्श कय बेर होयत? एहि तरहक उदाहरण सब देखिकय बेसीकाल लोक आदर्श सँ इतर मुंह खोलिकय मांग करैत अछि। हम कहलियैक जे स्वेच्छाचारिताक धर्म मे एक-दोसर प्रति आ अपन कर्तव्य प्रति जिम्मेदारी बुझब जरूरी छैक, से दुनू पक्ष विवाह सँ पहिनहि हरेक बात खोंइचा छोड़ाकय तय कय लियए। गुरुदेव तैयो कहला जे से एतेक समझदारी बुझिते छियैक जे कतेक लोक निभा पबैत अछि।
 
दहेज एहि कारण बड़ा जटिल विषय बुझि पड़ैत अछि कखनहुँ-काल। एतेक रास कानून, एतेक चर्चा-परिचर्चा, मुदा ई घटबाक बदला कोनो न कोनो रूप मे बढिते जा रहल अछि। तखन निराशाक बात ततबो बेसी नहि य। सचमुच शिक्षा, ज्ञान, आदर्श आ सिद्धान्त निभेनिहार एहि गलत परम्परा सँ मुक्त भेल अछि, मुक्ति चाहैत अछि। तखन नीक लोक कतेक आ लोभी लोक कतेक, ताहि कारण अवस्था एखनहुँ दुरुह अछि। एकटा पैघ विडंबनाक बात ईहो न छैक जे जँ अहाँ दहेज नहि मांग करबय त बेटीवला उल्टा शंका करय लागत जे जरूर किछु बात छैक जे ई बिना दहेज लेने विवाह लेल तैयार छथि। समाज सेहो ओहि परिवार आ लड़का केर कुचर्चा बेसी करैत छैक – ओकरा छहिये की, कथी पर दहेज, आदि। लेकिन वीर महापुरुष आ स्वाबलंबी लोक कहियो एहि सब कौचर्य आ परोक्ष निन्दा केँ अपन जीवनक सैद्धान्तिक बुनियाद केँ प्रेरित-प्रभावित नहि होमय दैछ। दुनिया तखनहि नीक बनैछ। जे दहेज मुक्त विवाह केलक ओ काफी प्रसन्न देखाइत अछि। गुरुदेव केर कनियाँ सेहो कनी देर मे सैलून पर संयोग सँ आबि गेल रहथिन, दुनू मे कतेक प्रेम छलैक से हम चुपचाप देखि रहल छलहुँ। शुक्र दिनक हाट सँ माछ कीनबाक रहैक, गुरुदेव कहलकैक जे गला सँ २०० टका लय केँ माछ कीनि लिअ, कनियाँ कहलखिन जे ई काज हमरा नहि कहू फेर केहेन माछ कीनायत आ अहाँ केँ से नीक लागत कि नहि से हम नहि बुझि पबैत छी, अपने सँ चलू आ माछ कीनि दिअ। छोट बच्चा सेहो संगे रहैक, ओकरा प्रति दुनू माय-बापक छलकैत स्नेह देखि हमर हृदय मे आ मोन मे आत्मविश्वास बढि गेल जे दहेजक त्यागक बुनियाद पर जे गृहस्थी ठाढ भेल अछि ओ जरूर अपार सफल आ सदिखन अलौकिन सुख प्राप्त करत। कम सँ कम दहेज लोभी जेकाँ दोसराक पाय पर फुटानी करयवला आदति त ओकरा मे कहियो नहि रहतैक। स्वाबलंबी आ स्वाभिमानी मात्र दहेज मुक्त भ’ सकैत अछि।
 
गुरुदेव संग उपरोक्त चर्चा आ रेडियो कार्यक्रम ‘मोनक बात’ केर दूरगामी प्रभाव हमरा काफी सन्तुष्ट केलक, ताहि लेल लिखिकय अपने सब लग राखल। नीक लागय त अपन पसीनक दु पाँति प्रतिक्रिया जरूर देब आ ई कथा आरो सब सँ शेयर करब। आइ फेर ८ः१५ बजे नेपाल समय सँ रेडियो नागरिक पर ई कार्यक्रम सुनय लेल नहि बिसरब। आनलाइन सेहो सुनि सकैत छीः www.radionagarik.com.np पर।
 
हरिः हरः!!