मिथिला मे जल संकट – विज्ञ विचार श्रृंखला – डा. लीना चौधरी

१ जून २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!!

भारतीय मिथिला क्षेत्र मे चापाकल सँ सहज रूप सँ जल नहि भेटि रहबाक कारण पानि लेल हाहाकार मचबाक समाचार जहाँ-तहाँ सँ आबि रहल अछि। एहि सन्दर्भ सोशल मीडिया मे ‘पोखरि बचाउ’ अभियान लेल प्रचार-प्रसार करैत देखल जेबाक संग-संग बहुतो रास विज्ञजन लोकनि अपन-अपन विचार दय रहला अछि। एहि क्रम मे मैथिली जिन्दाबाद पर आइ सँ जल-संकट आर ओहि सँ जुड़ल एक-एक विचार रखबाक कार्य आरम्भ कयल जा रहल य। शिक्षाविद् डा. लीना झा चौधरी जयपुर सँ एहि विषय पर चिन्ता व्यक्त करैत लिखलनि अछि –

“किछु दिन सँ लगातार समाचर सँ अवगत भ’ रहल छी जे मिथिलांचल पानिक अभाव सँ जुइझ रहल अइछ। सुइन कय हतप्रभ रहि गेलउँ।जतय डेग-डेग पर पोखरि छल ओतय ई दशा किया आ केना? बात बचपन सँ करी त हमरा सबकेँ अपन पोखरि याद आइब गेल। जेकर पानि में गेलाक बाद घंटों बाहर निकलबाक इच्छा नहि होइत छल। पोखरि जल केर संग्रहण कय केँ ओकरा अकारथ बरबादी सँ बचबइ छल। आत्ममंथन केला पर देखल जाय त’ हम सब स्वयं एहि परेशानी (जल संकट) केर कारण छी। जरूरत अइछ हमरा सब केँ अपन-अपन संसाधन केँ पुनः सम्हारय केर और सरंक्षण करय केर। पोखरि केर सरंक्षण सँ मात्र जल केर अभाव टा नहि दूर होयत बल्कि माछ पालन और मखानक खेती सँ आर्थिक स्वाबलंबन सेहो प्राप्त हैत। बस जरूरत अइछ हमरा सब केँ पोखरि बचाबय प्रति सजगता और दृढ़ता केर।”