– मनीष झा
आँखि सँ झहरैत नोर कहै अछियौ बाबू !
धिया गरीबक कोना पोसायत ?
यौ बाबू !
किया कहै अछि लोक? धिया आन छै
यौ बाबू !
कोनो पाप त’ केलौं नै हम जन्मैत !
यौ बाबू !
लक्ष्मी कहबितो खगल रहै छी
यौ बाबू !
कियाक लागल अछि अंकुश हमरा पर ?
यौ बाबू !
किया नै पोथिक दर्शन भेलै ?
यौ बाबू !
मोन छल पढि-लिख बनितौं किछु हमहूँ
यौ बाबू !
करा दिय’ कक्षा नामांकन हमरो
यौ बाबू !
नै चाही गहना, नै गुड़िया,
यौ बाबू !
कलम आ पोथिक टा शौक अछि हमरा
यौ बाबू !
बनि क’ नीक , नीक हम करितौं
यौ बाबू !
पैर पकड़ि क’ कहै छी आई हम
यौ बाबू !
आँखि सँ झहरैत नोर कहै अछि
यौ बाबू !
धिया गरीबक कोना पोसायत ?
यौ बाबू !

2 Comments
हम धन्य भेलऊँ आई जे एतेक स्नेह देलनि हमर प्राण सँ प्रिय प्रवीण भैया |
मैथिली जिन्दाबाद
Pangkti padhi Kay Mon Anand bhay gel Bhagwan sa prarthana Kay rahal chhi jeehen pangkti dosar Ber fee Sunday Ke mauka bhetey bahut bahut dhanyawad