धरातलीय परिवर्तन लेल ईमानदार नेतृत्वक आवश्यकता – वसुन्धरा झा आ जीतिया समारोह

…. आर एकटा समारोह एना बनि गेल लोकोत्सव….

(एकटा सत्यकथा जे परिवर्तन लेल धरातलीय नेतृत्व केर विकास पर आधारित अछि)
 
आइ सँ ठीक एक सप्ताह पहिने, शनि दिन केँ यैह करीब ८-९ बजे भोरे सँ हजारों महिला गाम-गाम सँ विराटनगर केर महेन्द्र मोरंग कैम्पस जेबाक तैयारी मे लागि गेल छल। कलश सजाकय, सीटी रिक्शा मे माइक आ साउन्ड बौक्स सब लगबाकय पंक्तिबद्ध मिथिलानी लोकनि अपन माथ पर कलश उठौने माय, काकी, भौजी, पीसी, दीदी, बहिन, बौआ, बुच्ची सब उत्साह सँ भरल महेन्द्र मोरंग कैम्पस केर परिसर दिश विदाह भऽ गेल छल। टोल-टोल केर समूह अपना-अपना तरहें खूब सैज-धैजकय तैयारी कय केँ आजुक जीतिया महोत्सव मे खास रूप सँ अपन भाषा, संस्कृति, पहिरन, पहिचान केर मजबूती देबाक लेल झुंडक-झुंड करीब १० बजे सँ कैम्पस मे पहुँचब शुरू भेल। लोक सभक दर्जनों हुजुम महोत्सव स्थल पर पहुँचि चुकल छल। मंच एहि ७ वर्ष मे पहिल बेर ततेक नम्हर बनल छलैक जतय २५ गो कुर्सीक २ धारी आ सब सँ पाछाँ मे संगीतक साज-बाज बजौनिहारक १ धारी बैसबाक पूरा भव्य इन्तजाम छलैक। मंचक आगाँ मे कलश सहित पहुँचल जीतिया महोत्सवक सहभागी लोकनि द्वारा कलश रखबाक स्थान रहैक। मंचकी बीच आगाँ मे जिमुतवाहन देव केर विशेष आराधना-सुमिरन लेल दीप्ति प्रज्वलनक सब इन्तजाम, प्रसाद मे ऋतुफल आदिक भोग चंगेरा-चंगेरा राखि देल गेल छलैक। बड़का भव्य पंडाल मे हजारों कुर्सी लागल छलैक। लोक सब खचाखच भरि गेल छल। छाहरिदार गाछक शीतलता सेहो अपन अलगे प्रसाद बाँटि रहल छल। कार्यक्रम स्थलक चारूकात लगभग २०० फूड वैन मे मोमो, चाउमिन, समोसा, चाट, छोला, मिठाई, आदि बिका रहल छलैक। ढोल-पिपही-गाजा-बाजाक बीच मे कतेको रास पिपही आ बाँसुरी बेचनिहार सब सेहो तरह-तरह केर ध्वनि निकालि रहल छल। धियापुता सभक मोन चंगला जेकाँ खन एम्हर, खन ओम्हर आ मंच सँ उदीयमान प्रतिभासम्पन्न किशोरी ‘प्रतिभा’ द्वारा सब केँ शान्तिपूर्ण ढंग सँ पंडाल अथवा चारूकात यथोचित स्थान पर बैसिकय समारोह-महोत्सवक आनन्द लेबाक आग्रह कयल जा रहल छलैक।
 
ई विहंगम दृश्य छल ‘अपन विराटगढ परोपकार समाज’ केर बैनर मे नेत्री वसुन्धरा झा द्वारा आयोजित जीतिया पर्व समारोह २०७५ जे कि एहि वर्ष ७म बेरुक आयोजन छल। ७ वर्ष पूर्व जखन वसुन्धराजी ‘जीतिया पाबनि’ पर मैथिल-मधेशी महिला समाज केँ आगू अनबाक एकटा तरीका ताहि समय हुनक राजनीतिक दल मधेशी जनाधिकार फोरम केँ देलीह तऽ पार्टीक मुखिया वर्तमान उपप्रधानमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री उपेन्द्र यादवजी स्वयं ओहि समारोह मे उपस्थित भऽ हुनका प्रोत्साहन देने छलाह। मुदा ओ आयोजन एकटा बन्द सभागार मे किछेक आमंत्रित अतिथि एवं सीमित महिला समाज केर सहभागिता मे भेलैक जाहि सँ नेतृत्वकर्त्री वसुन्धरा झा कतहु न कतहु संतुष्ट नहि भऽ पेलीह। संगहि, हुनका एहि आयोजनक प्रारूप मे मैथिल लोकसंस्कृति केर जे विलक्षणता विद्यापति स्मृति पर्व समारोह मे नजरि पड़लनि, ओ किछु तेहने भव्यता चाहि रहल छलीह जीतियाक अवसर पर अपन नेतृत्म मे आयोजित होमयवला जीतिया समारोह मे। आर, ताहि समय मैथिली सेवा समिति – विद्यापति स्मृति पर्व समारोह केर भव्य आयोजन सँ विराटनगर केर जनमानस मे अपन भाषा, अपन लोकसंस्कृति, कलाकारिता, रंगकर्म, महिला, बच्चा, युवा आदि केँ जोड़बाक विभिन्न प्रारूप पर कार्य करैत एकटा अमिट छाप छोड़ि चुकल छल। संभवतः यैह कारण वसुन्धरा झा मैथिली सेवा समिति केर बैनर मे ई आयोजन करबाक मोन बनेलनि आर समिति सँ सम्पर्क कयलनि। समिति द्वारा मैथिली महिला सेवा समिति नामक एक उपसमितिक गठन करैत वसुन्धरा झा केर संयोजन मे आयोजन करबाक निर्णय लेल गेल। समितिक महासचिव केर रूप मे कार्यक्रमक रूपरेखा आ मंचीय प्रस्तुतिक पूरा कमान्ड अपना हाथ मे रखैत एहि जीतिया पर्व समारोह केर एकटा मान्य स्वरूप हम तय कयने रही जे आइ आरो भकरार भऽ निरन्तरता मे चलि रहल अछि। विद्यापति स्मृति पर्व समारोह जीतिया समारोहक भव्यता मे कतहु नुका गेल जेना बुझाइत अछि। तेसर आयोजन सँ वसुन्धरा झा पूर्ण नेतृत्व स्वयं सम्हारि लेलनि, संग देलखिन समाजक किछु अन्य मैथिल महिला लोकनि। परञ्च मैथिल केर जे दुर्गुण छैक, एकजुटताक भाव मे नेतृत्व पर विश्वास नहि राखैत अछि… किछु तहिना वसुन्धरा झा संग सेहो भेलनि – लेकिन जनाधार आ नेतृत्वक सब गुण समेटने वसुन्धरा झा मे तऽ एहि टंगघिच्चा प्रवृत्ति सँ लड़बाक सब गुण जानकीक कृपा सँ पहिने सँ भेटल छलन्हि – ओ सब बाधा आ संकट केर सामना अपन समर्पित आ विवेकशील पति राजेश झा सहित किछेक अन्य समर्पित सहयोगीक संग लय आगू बढैत गेलीह। आर, आइ हिनका द्वारा प्रारम्भ कयल गेल जीतिया पर्व समारोह ‘लोकोत्सव’ बनि चुकल अछि।
 
आइ एक आयोजन सँ दर्जनों आयोजन अलग-अलग ठाउं मे अलग-अलग समुदाय केर सहभागिता मे, अलग-अलग नेतृत्व द्वारा विभिन्न प्रारूप मे होइत अछि। थारू महिला समाज, राजवंशी महिला समाज, देव महिला समाज, मैथिल जनसांस्कृतिक मंच, आदि नाम मोन पड़ि रहल अछि जिनका सब द्वारा ई आयोजन अलग-अलग स्थान पर विराटनगर मे आयोजित होइत अछि। परञ्च जे जनसहभागिता आ लोकसंस्कृतिक विभिन्न झाँकी सहित मेला जेहेन प्रखर स्वरूप मे वसुन्धरा झा केर नेतृत्व मे ‘जीतिया पर्व समारोह’ आयोजित होइत अछि, तेकरा कोनो ‘व्यक्तिगत अथवा कोनो विशेष समुदायगत आयोजन’ नहि कहल जा सकैत छैक। ई यथार्थतः ‘लोकोत्सव’ केर रूप मे परिणत भऽ चुकल अछि। एकर धरातलीय लाभ सेहो बहुतो रास नजरि पड़य लागल अछि –
 
*दलित आ सामाजिक विभेद तथा छुआछुत आदिक चपेट मे पड़ल कतेको रास जनसमुदाय, यथा मुशहर आ डोम समाज, केर लोक केँ मूलधारा मे अनबाक आ शिक्षा, संस्कृति, लोकपरम्परा मे समानता आदिक प्रेरणा सब केँ भेटि रहल अछि जाहि सँ हिन्दू समाजक आन्तरिक विखंडन आ कमजोर करबाक तत्त्व केँ निरुत्साहित कयल जा सकल अछि।
 
*पिछड़ा आ निमुखा समाजक महिला मे नेतृत्व क्षमता बढाओल गेल अछि, यथा सांस्कृतिक झाँकी आ टोल-टोल केर सहभागी महिला समाज केँ नेतृत्व प्रदान करैत समारोह मे सहभागी बनेबाक एकटा नव ऊर्जा तथा जोश भरल देखल गेल अछि। स्वागत संबोधन सँ लैत लोककलाक प्रदर्शन मे सेहो मौलिकता सँ भरल सांस्कृतिक गीत, नृत्य, नाटक आदिक मंचन करब, करायब – आदि सँ आम जनमानस मे मैथिली-मिथिला प्रति आकर्षण बढल अछि आर नेतृत्व करैत अपन आ अपन समाजक भीतर रहल कला केँ प्रदर्शन करबाक जोश सेहो देखल जा रहल अछि।
 
*दब्बूपन आ पिछड़ापण सँ मुक्ति पाबि रहल अछि उपेक्षित आ दमित-शोषित समाज – एकटा विशाल आयोजनक हिस्सा बनब, ताहि मे अपन योगदानक स्वामित्व प्राप्त करब आ मंच सँ एक सँ बढिकय एक व्यक्तित्व, विद्वान्, समाजसेवी, गायक, कलाकार, रंगकर्म आदिक नजारा प्राप्त केला सँ आम महिला समाजक संग-संग अन्यान्य मे सेहो एकटा नव जोश आ प्रेरणाक संचरण होइत अछि।
 
*राजनीतिक ध्रुवीकरण मे कोनो एक जाति वा धर्मक नहि बल्कि एकटा समग्र लोकसंस्कृति ‘मिथिला सभ्यता’ केर मूल आ मौलिक आधार पर लोक सब गोलबन्द होइत अछि – जेकर दूरगामी लाभ राजनीतिक सामर्थ्य हासिल करबाक लेल सेहो कारगर सिद्ध कय रहल अछि।
 
*लोकोत्सव मे नेतृत्वकर्ता आ आम जनताक बीच संवाद करबाक एकटा नीक आ भव्य अवसर जुटैत अछि। मानव सभ्यताक संरक्षण आ हित लेल एहि तरहक सामूहिकता सँ अनेक प्रकारक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होयबाक संग-संग बहुत रास महत्वपूर्ण सूचना सेहो आदान-प्रदान कयल जाइत अछि।
 
*सामाजिक कूरीति – छुआछुत, दहेज, महिला हिंसा, राजनैतिक-संवैधानिक अधिकार सँ अपरिचिति आदिक समाधान एहि तरहक मास गैदरिंग मे जनजागरणमूलक सन्देश देला सँ शीघ्रातिशीघ्र संभव होइत अछि।
 
‘अप्पन विराटगढ परोपकार समाज’ केर एहि उपलब्धिक पाछाँ साल मे सिर्फ एक दिवसीय समारोहक आयोजन नहि – होली, दिवाली, छठि, तिला संक्रान्ति, आदि विभिन्न लोकोत्सवक अवसर पाबि टोल-टोल मे जाय महिला, पुरुष आ समस्त समाजक लोक केँ जोड़ि-जोड़िकय पूरा साल भरि आयोजन करैत सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक विमर्श केँ निरन्तरता मे राखब – ई विशेषता थिक श्रीमती वसुन्धरा झा एवं हुनक नेतृत्व केर।
 
एतबा कहाँ! कोनो महिला पर दहेजक कारण हिंसा भेल, केकरो अन्य घरेलू हिंसाक शिकार बनय पड़ल – अथवा केकरो नागरिकता नहि भेटल वा सरकारी निकाय द्वारा कतहु कोनो तरहक अधिकार देबाक समय दमन-शोषण कयल गेल – ताहि सब तरहक जनसरोकारक बात मे वसुन्धरा झा व हिनक कार्यदल तुरन्त उचित सहयोग जुड़बैत अछि। कय गोट गरीब आ असहायक बेटी केर विवाह करेनाय, सासूर बसेनाय आ अधिकारसंपन्न बनेनाय – एहि तरहक धरातलीय जनसहयोग केर अनेकों कार्य निरन्तर कयलाक बादे केकरो एहि तरहक उच्चकोटिक जनाधार निर्माण होइत छैक।
 
वसुन्धरा झा – नाम मे झा भेनाय आइ-काल्हिक राजनीतिक परिवेश मे ‘अल्पसंख्यक’ केर परिचय करबैत छैक। कतेको जातिवादी नेता सब खुलेआम ‘झा’ यानि ब्राह्मण समुदायक नेतृत्वकर्ता केँ अन्य जातिक वोट नहि भेटबाक बात कहैत कोनो महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधिक चुनाव मे टिकट तक नहि दैत छैक…. लेकिन एहि तरहक जनस्तरीय सेल्फ एप्रूव्ड लीडर केँ भला कोनो टिकट केर आ चुनाव सँ जीत हासिल कय नेतृत्व करबाक कोन चाहत! बस, सदा जिन्दाबाद आ आबाद रहय एहि तरहक नेतृत्व आ राजनीतिक आका सब केँ सोचबाक चाही जे एहि तरहक नेतृत्व केँ जखन सड़क सँ सदन धरि लय जायब तऽ परिवर्तन कोन स्तरक कतय तक भऽ सकत।
 
हरिः हरः!!