मनोरंजन मे अश्लीलता केँ मिथिला समाज मे बढावा के देलक?

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

आर…. ई देखू! समाज यथार्थता – अश्लीलता केकरा लेल वर्ज्य हो?

मनोरंजन मे ‘अश्लीलता’ जतय बहुल्य समाज स्वयं कलाकार सँ माँग करैत अछि, ओत्तहि एकटा वर्ग एहनो अछि जे अपना केँ ओहि सँ बचाबय लेल ‘फतवा’ जारी केलक अछि। कोनो एक गायिकाक एक गीत केर मुद्दा त बस एकटा निश्चित समूह द्वारा सोशल मीडिया पर ‘मुद्दा’ ठाढ कय केँ ‘सौफ्ट टार्गेट’ बनायल गेल। लेकिन यथार्थ स्थिति सँ अहाँ नजरि नहि चोरा सकैत छी, से बात एहि समाचार सँ ज्ञात होइत अछि।
ई समाचार कोनो अयली-बयली गामक नहि थिक। प्रकाण्ड विद्वान् षट्दर्शन केर ज्ञाता महान् दार्शनिक आर हुनकर जतेक परिचय देब से कम होयत – पंडित सर्वतंत्रस्वतंत्र वाचस्पति मिश्र केर इलाका अंधराठाढी केर आसपास कोनो गामक ई समाचार थिक। अहाँ देख सकैत छी जे ‘गांव की बहू-बेटी नहीं जाएगी नाच व ड्रामा देखने – पकड़े जाने पर की जाएगी मारपीट व लगेगा जुर्माना’ मधुबनी भास्कर केर हेडलाइन बनल अछि। कि देखबैत अछि ई समाचार? मंथन करू।
 
अहाँ बीमारीक जैड़ साफ करबाक इलाज करब नहि आ पुरूषवादी मानसिकता सँ महिला-समाज केँ पूर्ववत् ढाँठिकय अपन उर्हरा-प्रवृत्ति आ बाइजीक नाच, आर्केस्ट्रा नाच, आ फूहर-अश्लील गीत खाली पुरुषे-पुरूष मिलिकय सुनय जायब?
 
आइ किछु लोक हमरा द्वारा गायिका रानी झा केँ बोल्ड आ ब्युटीफूल कहि मिथिला समाजक अश्लील माँग भोजपुरी आ हिन्दी मे नहि बल्कि मैथिली मे पूरा करबाक लेल कहबाक सच सँ आहत भऽ हमरा लेल पिन्डदान कार्यक्रम रखलनि अछि सरेआम फेसबुक पर। हुनका लोकनि केँ हमर छोटकी बेटी देवांशी बड़ा करारा जबाब देलकनि अछि, पढू स्वयंः
 
देवांशी लिखने अछि – Hey, do you even know the meaning of democracy? I really doubt on that. नहि तऽ ई भऽ सकैया जे स्पोटलाईट मे आबय केर चक्कर मे you forgot even what was taught to you in your junior classes. Stop behaving so immature. अरे भाइ, अगर कोनो मुद्दा उठेने छी तऽ sensible मुद्दा उठाउ न।
 
पहिल बात जे अहाँ केँ असली बात कि रहय आ कि छय से सही स नहि आयल अछि आर धरफरा कय ‘पिन्डदान’ करइ पाछू लागि गेलहुँ।
 
हमर पापा जे छथिन ओ ना त कोनो अश्लीलता केर बढावा देलखिन आ नहि कोनो ओहन तरहक गीत के। बुझय मे आयल?
 
आब सुनू! बात कि रहय! Right to have an opinion is something which is usually seen only in democracy. According to that, irrespective of whether you like someone’s choices or opinions or not, you cannot say them wrong or have any right to judge. The only right that you have got is to express your views on that rather than directly offending the person. ओहि कारण हमर पापा रानी झा केँ सीधे गलत नहि कहिकय एहेन गीत के demand करयवला मिथिलाक हजारों आदमी केँ गलत बतेलखिन।
 
As per Miss rani, demand मे अबैत छैक एहेन गाना तखने एकर production होइत छैक। दम अछि तऽ पहिने ओहि हजारों आदमी केँ एहेन demand करनिहार society केर mentality change करू।
 
ओकरा बुझबैत कहल अछिः
 
ओहो बेटी देवांशी, चाचा सब छथिन। अहाँ सब हिनका लोकनिक ई सब बिहेवियर केर चिन्ता नहि करू। Let them do what they are doing.
 
हँ, तोहर समझ-शक्ति केँ हम एक पिताक नाते प्रशंसा करैत छी बेटी। चाचा सब केँ सही बात कहलुहुन अछि जे जाहि समाज मे एहि तरहक गन्दा विचारधारा, लोकक दिमाग मे कुन्ठा आदि जमल हो, पहिने ताहि समाजक आमजन सँ एहि विन्दु पर चर्चा करथि।
 
बेटा, मिथिला समाज मे लाज (पर्दा) प्रथा एकटा अजीब कुन्ठा उत्पन्न कय देलकैक। एहि ठाम देखबय लेल अपन घरक महिला केँ लोक रातिक अन्हरिया मे मात्र किछु समय लेल बाहर जेना मन्दिर वगैरह जेबाक अधिकार देने छैक। एखनहु उच्चवर्गक लोक-समाज मे आरो बदतर ढंग सँ ई पर्दा प्रथा गाम-समाज मे कायम छैक। पुरुष समाज छुट्टा आ पुरुषवादी मानसिकता सँ दोसरक घरक बहु-बेटी पर गलत नजरि रखैत मनोरंजनक समय तऽ आरो उच्छृंखलता सँ भरल पहिने बाईजी नाच, त आब आर्केस्ट्रा मे न्युडिटीक प्रसार करयवला भद्दा नृत्य आदि देखिकय पागल भेल रहैत छैक। कालान्तर मे महिला समाज सेहो पर्दा सँ किछु त बाहर आबि पेलैक हँ, लेकिन कुन्ठा टूटला सँ एकाएक बान्हल पानि जेना बहि जाइत छैक किछु तहिना एखन अजीब तरहक डीजे म्युजिक (एडमिक्स कल्चर) केँ भैर पाँज पकड़िकय बढि रहलैक अछि।
 
ई चाचाजी लोकनि केँ एखन एकटा ‘रानी झा’ नाम्ना ब्राह्मणक बचिया सौफ्ट टार्गेट भेट गेलनि। हलांकि फूहरता चाचाजी लोकनिक समाजक मौलिकता केँ नाश कय देलकनि, पूरा बाजार पर भोजपुरी आ हिन्दीक राज छैक। लेकिन मैथिली जँ कनेक सीमा सँ निकैल बाजार केर मांग अनुसार ओतुका फूहर समाज लेल फूहर गीत देलकैक, तऽ उचक्का समिति एखन उचकपनीक नीक खेला-वेला सामाजिक संजाल मे कय रहला अछि। अहाँ सब निश्चिन्त रहू। सत्य आ यथार्थ केँ कियो नहि बदैल सकैछ। समाज मे जा धरि प्रवृत्ति नहि बदलतैक, ता धरि ई सब नौटंकी होइत रहतैक।
 
एहि विषय पर एखन जहतर-पहतर खूब रास पक्ष-विपक्ष मे चर्चा चलि रहल अछि। कतेको लोक सन्देह मे सेहो छथि। हमर धनंजय भाइ सेहो पूरा बात बुझने-गुनने हमर डेगक विरोध सेहो कय देलनि। एक कुमार विकास केँ एखन धरि ई मुद्दा सिर्फ फेसबुक, यूट्युब, इन्टरनेट धरि देखा रहल छन्हि। सवाल किछु पूछल गेलनि अछि। सब कियो सवाल सँ बचबाक चेष्टा कय रहला अछि।
 
*अहाँ अपन समाज सँ कहियो चर्चा केलियैक जे समाज केँ कि चाही?
 
*अहाँ केँ धरातलीय सच केर कोनो अनुभवो अछि?
 
*आइ मैथिली कार्यक्रम गाम-गाम मे नहि भऽ आर्केस्ट्रा कल्चर आ एडमिक्स डीजे कल्चर केँ केना अहाँक समाज स्वीकार केलक तेकरा पर कोनो शोध केलियैक?
 
*कोनो कलाकार जखन मंच पर जाइत छैक, ओकरा सँ कि अपेक्षा करैत अछि अहाँक समाज से जनलियैक?
 
किछु गोटा बहस मे सार्थक योगदान आ पक्ष-विपक्ष सँ ऊपर सीधे एहि विन्दु पर आबि जाइत छथि जे पक्ष रखनिहार अपन बेटी-बहिन केँ सेहो एहि तरहक गीत गाबय वा नृत्य करय लेल बढाबथि…. एतेक घटिया स्तरक लोक सब सेहो देखा रहल अछि अपन मिथिला समाजक जे स्वयं केँ बड़का सामाजिक-साहित्यिक पैरोकार आदि कहैत अछि। अरे, सवाल सँ मुंह नहि नुकाउ। सवालक जबाब ताकय जाउ। समाज मे ई बीमारी कियैक प्रवेश केलक? एकर जिम्मेवार के? ताकू जबाब। महज एक गायिका वा किछु गायिका केर बात तऽ ई कथमपि अछिये नहि, ई महाकैन्सर बीमारी मिथिला केँ वर्षों पहिने सँ लागल अछि जाहि मे सँ आब मवाद (पीज) बहब चालू भऽ गेल य। अस्तु!
 
हरिः हरः!!
 
News Photo Credit: Anupam Jha