बेटी-पुतोहु केँ घरक काज केँ नित्यचर्या समान उत्साहपूर्वक करबाक चाही

आजुक बेटी अपन सासूर मे कोना बसय! मंथन!!

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

(पत्राचार केर प्रारूप मे)

दिलीप सर,
 
नमस्कार! जय मिथिला ‍- जय जानकी!!
 
सन्दर्भः बेटी-पुतोहु केँ घरक काज करबाक लेल शिक्षित करब आवश्यक
 
अपनेक पत्र प्राप्त भेल। अपने द्वारा हमर अभियान सभक सराहना सँ नव उत्साह सेहो भेटल। अपने लिखने छी – “समाज मे एक बात और फैलाउ कि लोग अपना कन्या के इ बात जरुर सिखावथ कि घर के काज केनाइ नौकर बननाई नहीं छई। कन्या के माता पिता कन्या के नव घर मे जाकर कोना रहती से नै सिखवैछथी। तेकर दुस्परिणाम अछि इ सब। बेटा पूतोहु के रहैत बुढ माय घर के सारा कार्य करथिन से कोना उचित हेतै।” एहि सम्बन्ध मे अपन विचार निम्न तरहें राखय चाहब।
 
१. हमर प्रयास ई रहैत अछि जे कोनो काज हृदय सँ करी। न्यायोचित काज मात्र करी। जाँचि-परखिकय सही दृष्टिकोण सँ काज पूरा करी। एहि लेल बहुत रास रिसर्च वर्क पहिने करय पड़ैत अछि। अपन स्वयं पर लागू करैत ई निर्णय करब सहज होएत छैक जे कोन बात सही हेतैक आ कोन बात गलत हेतैक। चूँकि हमरा लोकनि मिथिलावासी अदौकाल सँ पुरुखाक सिखायल एहेन रीत पर चलैत छी जेकरा वेदविद् अनुरूप औचित्यपूर्ण लोकाचार सेहो मानल जाइछ, एतेक तक कि विश्व परिवेश मे सेहो चलन-चलतीक क्रिश्चियन धर्मोपदेश ओकरे बाइबलिकल प्रिन्सिपुल मे सेहो उद्धृत करैत अंग्रेजीक एकटा बड़ा पोपुलर लोकोक्ति चलल छैक “Do Unto Others As You Would Have Them Do Unto You” – ई बड़ा जस्टिफाइड ‘गोल्डेन रूल’ सँ सेहो जानल जाइत छैक आर एहि मुताबिक अहाँक अनुज – यानि हम प्रवीण ना. चौधरी कोनो कार्यक निष्पादन करैत छी। “नैचुरल जस्टिस” केर सिद्धान्त बड़ा अनमोल अछि। आर एहि मे स्वाभाविके सभक संग – वा कहू न – बहुल्यजन, न्याप्रेमी, धर्माचारी, सदाचारी – सब कियो एकरा पसीन करैत छथिन।
 
२. उपरोक्त विन्दु संख्या १ केँ मद्देनजर आजुक बेटी-पुतोहु मे घरक काज करबाक दिस ध्यान सच मे नगण्य देखि रहल छी। नगण्य मे जँ कतहु गण्य कियो भेटि जाइछ तँ मनहि-मन हम ओकरा साक्षात् देवीतुल्य मानैत छी। अपन स्वाध्याय सँ देवी दुर्गाक अनेक चमत्कारिक रूप, क्रिया, लीला, कृपा, वरदान आदि केँ बड़ा रुचिपूर्वक पढने आ लिखने हम कोनो नारीक मूल शक्ति मे चूँकि दुर्गा मात्र केँ देखैत छी – लेकिन ‘क्षणहि तुष्टा क्षणहि रुष्टा’ वला कथनी आ दैत-दानव सब केँ अपन अनेकों माया सँ कखनहु जमीन पर तऽ कखनहुँ आकाश मे, पटैक-पटैक केँ मारबाक दृश्य बच्चा जेकाँ बड़ा कौतुकताक संग दर्शन करैत छी। बिल्कुल तहीना, आजुक बेटी-पुतोहु मे ‘आधुनिक शिक्षा’ सँ ‘पैकेज” वला सैलरी दिस बेसी ध्यान आ “हब्बीक साथ हनीमून” वला लीलामयी क्रियाकलाप त खूब देखैत छी, मुदा स्वयं दुर्गा कथमपि काली, शिवदूती, सरस्वती, लक्ष्मी आदि बनिकय कोना दैत्य समाजक अन्त करैत छथि…. कोना रक्तबीज समान अत्यन्त भयावह जीव केर बुन्द-बुन्द रक्त केँ काली पीबि जाइत अन्ततोगत्वा घोर युद्ध कयलाक बाद मारि पबैत छथि – ताहि तरहक शक्ति, सोच, सामर्थ्य, धैर्य आदि वैह ‘नगण्य बेटी-पुतोहु’ मे देखि पबैत छी। कहू त! अपनों काज करय मे केकरो हिचकिचाहट होएक? लेकिन ई सबटा खेलावेला “आधुनिक शिक्षा पद्धति” आ “पैकेज मे सैलरी” कमाय करब मूल कर्तव्य बाकी पिज्जा, नूडल्स, पैकेज्ड फूड, पियो-फेको थारी, लोटा, गिलास, इन्सटैन्ट मिल (राइस, रोटी, फोटी सब किछ) केर चलन चल्ती बेसी देखि रहल छी। घर मे खाना कि पकायब…. चलू डोमिनो’ज, चलू मैकडौवेल आ चलू महानगर केर लेट नाईट डिस्को मे हार्ड डीजे पर नाचि कोहुना जीवन बिता लेब… थाकिकय घर आबि दुनू प्राणी सुति रहब… जँ सासु-ससूर बाजथिन त बुझि जाउ जे ‘डाउरी एक्ट, सेक्सन ४९८’ मे काल्हिये सब केँ अन्दर करबा देब…! आह! हे देवि! ई सब कोन लीला छी अपने लोकनिक?
 
हम केवल प्रार्थना करैत छी, बेटी सब केँ सिखबैत छियैक – विवाद सँ बचय जो। अपन काज ओहिना जरूरी छैक जेना नित्यकर्म। सदिखन सुन्दर आचार-विचार राखब आवश्यक छैक। सासूर गेलाक बाद ओतय नव माय-बाप भेटलखुन, हुनकर मान राखे। बेसी कि!
 
हरिः हरः!!
 
नोटः आदरणीय दिलीप झा एक अवकाश प्राप्त भारतीय सैन्य अधिकारी छथि। मूलघर मुजफ्फरपुर जिला वर्तमान प्रवासक्षेत्र एनसीआर व अन्यत्र कार्य करैत छथि। दहेज मुक्त मिथिलाक प्रखर समर्थक एक आदर्श अभिभावक आर सदिखन अपन मूल मिथिला सँ स्नेह करैत एक-एक विषय पर ध्यानपूर्वक अपन विचार रखैत आबि रहला अछि। वर्तमान दहेज मुक्त मिथिला द्वारा किछु घरेलू विवाद आ दहेज उत्पीड़णक केस सँ जुड़ल अभियान आ हालहि दरभंगा मे घटल ‘रंजना दहेज हत्याकाण्ड’ पर चलाओल जा रहल मुहिम पर अपन किछु विचार भरल सन्देश पठौलनि अछि, ताहि पर उपरोक्त विचार राखैत एकरा जगह-जगह पोस्ट कयलहुँ अछि जे पढि आजुक बेटी-पुतोहु आ अभिभावक सब कियो बात बुझथि। जँ बेटी-पुतोहु पिज्जा-डोसा खायवाली भेलीह अछि तऽ इन्सटैन्ट फूड वला युग मे ओहो सब प्रवेश करथि। समस्या कम हेतनि। अस्तु! 🙂