चनमा, मचान, धूर्त समागम तथा मैथिली

विचार

– धर्मेन्द्र झा

मैथिली साहित्यमे कविश्वर चन्दा झाक नाम बड़ा सम्मानपुर्वक लेल जाइत छन्हि । चन्दा झा मैथिली भााषामे पहिलबेर रामायणक रचना कयलनि मानल जाइछ । चन्दा झा मैथिलीक एहेन यशस्वी कवि व साहित्यकार छथि जे मिथिलाक सम्बन्धमे अनेकों रचना कएने छथि । ओ मैथिलीक इतिहास आ भूगोलक बारेमे काव्यात्मक ढंगसँ सोझाँ रखलनि । ओ पाँचम् शताब्दीमे लिखल गेल वृहद् विष्णुपुराणक मिथिला महात्म्य खण्डमे वर्णित मिथिलाक सीमासम्बन्धी विवरणकेँ काव्यात्मक ढंगसँ अनुवाद कएने छथि । हुनकर ई अनुवादक आधारमे कहब तँ पूर्वमा कोसी, पश्चिममे गण्डक, उत्तरमे हिमालय पर्वत शृंखला आर दक्षिणमे गंगा नदीबीचक भूभाग मिथिला थिक । एखन विविध राजनीतिक विचार आर दर्शन हावी भऽ रहलाक सन्दर्भमे मिथिलाक क्षेत्रीयता आर भौगोलिकता बुझय लेल कविश्वर चन्दा झाक उक्त कथन हमरा लोकनिकेँ विस्तारमे सहयोग करैत अछि । ओना त बसोबास आर भाषाक हिसाबसँ विगत समयमे रौतहटकेर पूर्वी भाग धरि मात्र मैथिली भाषाभाषीक सघन बसोबास रहल भेटैछ मुदा आइयो धरि कोनो न कोनो रूपमे परसा धरि मिथिलाक प्रभाव अनुभव कयल जा सकैत अछि । तेनाही मिथिलाक प्राचीन सीमा रहल कोसी नदी विगत गोटेक दशकमे पश्चिमदिश बेसी सरैक गेल सेहो स्पष्टे अछि । अहुसँ वर्तमानमे मिथिलाकेँ बुझय मे आरो अतिरिक्त सामग्री प्रदान करैत अछि । भाषा तथा संस्कृतिविद एवं पूर्व प्रधानमनत्री मातृकाप्रसाद कोइराला एकटा सन्दर्भमे कहने छथि, आजुक तुलनामे कोसी नदी पूर्वकालमे काफी पूर्वीक्षेत्र होइत बहैत छल । हालक भारतक पूर्णियासँ पूर्व ।

आजुक कोसीक धार केँ आधार मानब तँ भारतक दुइ जिला पूर्णिया तथा कटिहार आ नेपालक दुइ जिला मोरगं आर सुनसरी प्राचीन मिथिलासँ अलग भऽ जाइत अछि । लेकिन यथार्थ कि छैक कहब तऽ ई चारू जिलामे मैथिलीभाषीक उल्लेख्य जनसंख्याक बसोबास छैक । अहुसँ प्राचीनकालमे कविश्वर चन्दा झा द्वारा कहल गेल अनुसार मिथिलाक सीमा विशाल छल से स्पष्ट होएत अछि । सिंहावलोकनक नेपालीय मैथिली विशेषांकमे संकलित कोइरालाक उक्त लेखमे दाबी कयल गेल छैक, नेपालक मोरगंकेर रतुवा मावा नदीसँ रौतहटक झाँझ नदीधरि मैथिलीभाषीक बाहुल्य छैक ।

मैथिलीकेँ यदाकदा जातिगत वा सामाजिक संरचनाक दृष्टिसँ सेहो वर्गीकरणक प्रयास कयल जेबाक बात भेटैत अछि । एहि सम्बन्धमे भाषाविद पं गोविन्द झा आर डा जयमन्त मिश्र द्वारा एहेन वर्गीकरणकेँ अवैज्ञानिक कहल गेल अछि । एकरा बदला हिनका लोकनि क्षेत्रीय आधारमे वर्गीकरण कयल जेबाक सुझाव देलनि अछि । पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालयक पूर्व उपकूलपति तथा प्रसिद्ध भाषाविद् डा रामावतार यादवक कथन काफी सान्दर्भिक अछि । धीरेन्द्र प्रेमर्षिक आलेख मिथिला आर मैथिल जनमानसमे ऊपर उल्लेख कयल अधिकांश सन्दर्भ सभ वर्णित अछि । निश्चय विश्लेषणक लेल ई सन्दर्भ सब महत्वपूर्ण भऽ सकैत अछि ।

पछाति समयमे मैथिली भाषा केकर छी एहि सन्दर्भमे किछु व्यक्ति आर वर्ग द्वारा जबर्दस्ती विवाद उत्पन्न करबाक सन्दर्भमे डा यादवक कथन एक उत्तर भऽ सकैत अछि । ओ कहैत छथि, किछु दशक पहिनेधरि ब्राह्मण आर कायस्थ आदि शिक्षाक प्रसार बेसी रहल समुदायमे हुनका लोकनिक भाषामे किछु विशिष्टता देखल जाइक लेकिन पछाति काल शिक्षाक पहुँच बढैत गेलाक कारण आनो जातिक भाषाभाषीक स्तर सेहो हुनकहि लोकनिक स्तरक होइत गेल अछि ।

पछाति समयमे नेपालमे मिथिला आर मैथिलीकेन्द्रित चर्चा सेहो गति प्राप्त केलक देखल जाइछ । ई चर्चा आर बहस कतेक सार्थक अछि वा होयत ताहि बारेमे त भविष्य टा निर्णय करत । लेकिन हाल एहेन चर्चा सँ नया विचार निर्माणक दृष्टिक कारण काफी महत्वपूर्ण होयब सुनिश्चित अछि । एहि सन्दर्भमे बीतल महीना देशक राजधानी काठमांडूमे तीनटा महत्वपूर्ण आयोजन भेल । मिथिला आर मैथिलीक सन्दर्भमे ताहि अयोजनमे भेल विमर्श बहुते महत्वपूर्ण छल ।

पहिल आयोजन छल चनमा । दुइ दिनधरि आयोजित एहि कार्यक्रममे मिथिला आर मैथिलीसंग सम्बन्धित विभिन्न सन्दर्भक बारे विमर्श कयल गेल छल । नेपालक प्रथम राष्ट्रपति डा रामवरण यादव उद्घाटन कयल ओहि कार्यक्रममे नेपाल आर भारतक स्थापित मैथिली साहित्यकार, रंगकर्मी, गायक एवं कलाकार तथा नेपालक किछु चर्चित राजनीतिक व्यक्तित्वक सहभागिता रहल छल । आठ सत्रमे विभाजित सत्र केँ मिथिलाक परम्परा आ संस्कृतिक बोध करबाबय वला हिसाबे नामाकरण कयल गेल छल । ई स्वयंमे एकटा प्रयोग छल जे सफल भेल । ई कार्यक्रमसँ मिथिलाक बारेमे नव ढंग सँ सोचबाक आ दृष्टिकोण विकसित करयमे एकटा दिशा प्रदान केने छल । एहि कार्यक्रममे चुरेक संरक्षण, मिथिलाक राजनीति, अर्थ व्यवस्था, सामाजिक दशा आर दिशा, सांस्कृतिक अवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, वैदेशिक सम्बन्ध, शुद्ध पेयजल, मैथिली सञ्चार, मैथिल युवाक भूमिका आदिक बारेमे कयल गेल विमर्श अत्यन्त महत्वपूर्ण रहल ।

तहिना दोसर कार्यक्रम छल, मचान । काठमांडूक भृकुटिमण्डपमे आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक मेलामे एहिबेर मैथिली पुस्तकक सेहो एकटा स्टल राखल गेल छल, एकर नाम राखल गेल छल मचान । मिथिलामे सम्बल निर्माणक दृष्टिसँ मचानक बड़ महत्व छैक । मैथिली पुस्तकक प्रचार प्रसार आ बाजारीकरणक सन्दर्भमे मचान बड पैघ महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करक सोचक संग आयोजित ई आयोजन सेहो खूब चर्चित रहल । एहि आयोजनक सन्दर्भमे मैथिली पुस्तके टा प्रदर्शन नहि भेल बरु मिथिला आर मैथिलीसंग सम्बन्धित विविध सत्रमे अन्तरक्रिया कार्यक्रम सभकेँ सेहो स्थान देल गेल । नेपाल आर भारतक प्रसिद्ध मैथिली स्रष्टाक उपस्थितिमे आयोजित ई कार्यक्रम विशेष प्रकारक तरंगक संचरण केलक । वर्तमानमे मैथिली उपत्यकासंग नव सम्बन्ध विकसित करबाक प्रयासक सन्दर्भमे सेहो एहि कार्यक्रमक काफी महत्व अछि ।

तेसर आयोजन छल, धूर्त समागमक मञ्चन । संगीत तथा नाट्यकला प्रतिष्ठान, शिल्पी थिएटर आर भारतक नाट्य संस्था मैलोरंगक संयुक्त प्रस्तुतिमे मञ्चन भेल ई नाटककेँ काठमांडू प्रदर्शनक विशेष महत्व अछि । पं. ज्योतिरिश्विर ठाकुर लिखित धूर्त समागम सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्विपक भाषामध्य पहिल गद्य रचना मानल जाएछ । जे मूल मैथिलीमे लिखित अछि । एकर लेखन यैह काठमांडू उपत्यकामे हेबाक इतिहास साक्षी अछि । एहि आयोजनसँ रंगकर्म तथा साहित्यक समीक्षा तथा अध्ययनक दृष्टिक सन्दर्भमे खूब महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केलक ई सत्य अछि ।

ऊपर उल्लेख कयल सन्दर्भमे कार्यक्रम सभ सफल छल, एहिमे शंका नहि अछि । लेकिन आरो प्रयास कयल गेलापर कार्यक्रमसभ आरो अधिक प्रभावकारी भऽ सकैत छल । एहि कार्यक्रमक सन्दर्भमे आयोजकलोकनि सब पक्ष आर जातजातीकेँ समेटय नहि सकबाक आरोप खेपलनि । किछु लोक तँ ई कार्यक्रमसभ किछु खास जाति व व्यक्ति लोकनि प्रभावी भेलाह कहैत सेहो अपन असन्तुष्टि रखलनि । किछु लोक यैह आधारपर कार्यक्रमप्रति अस्वीकृति सेहो जनेलनि । ई सबटा प्रक्रियाकेँ स्वाभाविके मानय पड़त । एहेन असन्तुष्टि आ आरोप सँ आयोजक लोकनि अपना बारेक जनस्वीकृति आ आशाक आमप्रकटीकरणक रुपमे लेथि आर आगामी दिनमे एहेन शिकायतकेँ सम्बोधनक प्रयत्न करैथ । शिकायत (असन्तुष्टि) केर विश्लेषणक यत्न करब तऽ ई कार्यक्रमसभक माध्यमसँ जाहि विषय सभकेँ उठायल गेल अछि ताहि विषयमे आम जिज्ञासा आ रुचि अछि ततेक बुझब अतिश्योक्ति नहि होयत । एहि विषयमे मिथिलाक अनेकों व्यक्ति सहभागी होमय चाहैत छथि आर खुलिकय बहस करय चाहैत छथि । एहेन अवसर प्राप्त नहि करय सकला पर सतहमे शिकायतक अम्बार लागि गेल से बुझब जरूरी अछि । आशा करी जे आयोजकलोकनि भविष्यमे एहि दिशामे समुचित ध्यान अवश्य देता ।

यैह कार्यक्रमक सम्बन्धमे घोषित-अघोषितरुपमे मैथिली केकर आ केहेन भाषा थिक ताहि सम्बन्धमे किछु असहमतियुक्त विवादक स्वर सभ सेहो सार्वजनिक भेल । एहेन असहमति सभकेँ अन्यथा नहि मानबाक चाही । अपन समाज बहुलवादी अछि आर एहि कारण समाजमे विभिन्न विचार सब सेहो अछि । लोकतन्त्रमे एहेन विविध विचार सभक बहुत पैघ महत्व छैक । एहने सबतरहक विचारक प्रस्फूटनकेर अवसर प्राप्त होबक चाही । यैह विचार सभ अभिव्यक्त करक अवसर प्राप्त नहि होयत तँ समाजमे अपनत्वक भावना विकसित नहि भऽ सकत आर समाज निर्माणक प्रक्रिया बाधित होयत । विविध विचार प्रकटीकरणक अवस्थामे मात्र सर्वाेत्कृष्टकेर चयन सम्भव भऽ सकैत छैक । मैथिलीक सन्दर्भमे व्यक्त धारणा सभ सेहो एहि रूपमे बुझब श्रेयस्कर होयत ।

जहाँतक मैथिली केकर भाषा थिक से बात छैक, तऽ ई स्पष्टे छैक । मैथिली मिथिलाक भूगोलमे बसनिहार सभक साझा भाषा थिकैक । एहि भूगोल भितरक ई भाषा सम्पर्क भाषा थिकैक, एहिमे विवाद भइये नहि सकैत अछि । एहि भूगोलभितर विभिन्न जातजाती आर समुदायम बाजल जायवला आरो बहुते भाषा छैक, भाषा वैज्ञानिक अध्ययन करैत रहबाक खण्डमे किछु अपवादबाहेक मैथिली ताहि सब भाषाक अभिभावक आ मूल भाषा थिक कहि सकैत छी । जहाँतक भूगोलक सन्दर्भ अछि, ऊपर कविश्वर चन्दा झा आर मातृकाप्रसाद कोइरालाक प्रसंग उठाकय स्पष्ट करबाक प्रयत्न कयल गेल अछि । एहि सन्दर्भमे भाषाक प्रयोग आर स्तरक बारेमे सेहो बात उठल अछि । एहि विषयमे डा रामावतार यादवक ऊपर उल्लेखित कथन काफी महत्वपूर्ण छैक मानि सकैत छी । मैथिलीमे यदाकदा मानकक चर्चा चलल करैत अछि । अहु सम्बन्धमे पंक्तिकारक स्पष्ट दृष्टिकोण छैक, एखनहिं मानकक बात उठाकय स्तरीयताक बात खोजैत कित्ताकाटक रणनीति अख्तियार नहि करक चाही । जे कियो मैथिली कहिकय जेहेन बजैत अछि वा लिखैत अछि तेकरे मैथिलीक रुपमे स्वीकार करक चाही । एना मैथिली गरीब नहि होयत बरु आरो सम्पन्न बनत । शब्द भंडार, शब्द विन्यास आर भाषा निर्माण प्रक्रिया आरो गतिशीलता प्राप्त करत । दोसर दिश आमव्यक्तिमे मैथिलीप्रति अपनत्वक भावमे वृद्धि होयत । कियो पंक्तिकारक एहि दृष्टिकोणकेँ भाषिक अराजकताक संज्ञा सेहो दय सकैत अछि । ताहू मे आपत्ति नहि मानबाक चाही । यैह अराजकतासँ भविष्यमे आरो स्तरीकरण आर परिष्करणक मार्ग प्रशस्त होयत ।