मातृभाषाक महत्व, चीन सँ सीख लेबाक चाहीः धर्मेन्द्र झा

विचार

– धर्मेन्द्र झा

एखन नेपाली राजनीति एक बेर फेरो तरंगित बनि गेल अछि । तरंगित होयबाक बहुते विषय छैक । एहि विषय सभक बीच एक अछि, भाषाक विषय । प्रदेश नम्बर दुइ मे प्रदेशक भाषा कि होयत से विषय एखन खूब चर्चा मे छैक । प्रदेश नेपालीक अतिरिक्त देशक राष्ट्रियभाषा मे बेसी बाजल जायवला दुइ गोट भाषा केँ सरकारी कामकाजक भाषा तय कय सकैत अछि, आ करबाको चाही । प्रदेश दुइ केर आठ जिल्ला मे सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही मैथिलीभाषी क्षेत्र थिक तऽ रौतहटवासी एहि जिला मे मैथिली, बज्जिका आर मगधीभाषा बजबाक दावी करैत अछि । तहिना बारा आर पर्सा भोजपुरीभाषीबहुल्य क्षेत्र अछि । एहि जिला सब मे सेहो मैथिली आर बज्जिका बाजल जेबाक बात सम्बन्धित भाषी लोकनिक दावी छैक । नेपाली धरि कोनो न कोनो रूप मे सब जिला मे बाजल जाएछ । एहि सब भाषा मध्य प्रदेश मे मैथिली सर्वाधिक बाजल जायवला भाषा थिक तऽ भोजपुरी दोसर बेसी बाजल जायवला भाषा थिक । एहि प्रदेश मे किछु लोक हिन्दीभाषा सेहो प्रयोग करैत अछि ।

एक बातक समानता ई छैक जे मातृभाषाक रुप मे मैथिली सब सँ बेसी बाजल जायवला तथा हिन्दी कम बाजल जायवला रहितो एहि प्रदेश मे ई दुनू एहेन भाषा थिकैक जे प्रदेश भरिक जनता कोनो न कोनो रूप मे बजैत अछि आ बुझितो अछि । प्रदेश सरकार द्वारा एहि सभक बीच सँ कोनो दुइ भाषा केँ सरकारी कामकाजक भाषाक रुप मे मान्यता प्रदान करबाक छैक, जे सहजहि सम्भव होइत नहि देखा रहल अछि । प्रदेश नम्बर दुइ केर भूगोलक अध्ययन करब तऽ एहि मे निहित आठ जिला प्राचीन मिथिला, जेकर इतिहास आजुक मधेस सँ बहुते पुरान अछि, भूमि संग सम्बद्ध छैक । इतिहास अध्ययन् करिते गेलापर एहि क्षेत्र मे प्राचीन मिथिला आर मध्यकालीन मिथिलाक राजधानी अवस्थित रहबाक तथ्य भेटैत अछि । एकर उदाहरणक रूप मे जनकपुर आ सिम्रौनगढ केँ प्रस्तुत कयल जा सकैत छैक ।

एहि प्रदेशक जनता गोटेक अपवाद छोड़ि जे कियो जे किछु बाजितो ओ प्राचीन मैथिली भाषाक परिवर्तित, प्रभावित, विकसित रुप थिक से कहल जेबाक पर्याप्त भाषा वैज्ञानिक आधार भेटैछ । प्रदेश मे ई विषय नव परिवर्तित राष्ट्रीय राजनीति केर सन्दर्भ मे आरो ओझरेबाक काज करत से निश्चित छैक । प्रदेश सरकार गठनक समय मे विकसित तत्कालीन संघीय समाजवादी फोरम आर राष्ट्रीय जनता पार्टीक गठबंधन समीकरण हाल किछु समय सँ विवादित बनि गेल अछि आर प्रदेश मे नव राजनीतिक समीकरण बननाय सुनिश्चित भऽ गेल छैक । एहेन परिदृश्य मे भाषाक बात मात्रे नहि बल्कि प्रदेशक सम्पूर्ण मुद्दा प्रभावित होयबाक सम्भावना केँ नकारल नहि सकैछ । तखन एखुनका प्रमुख प्रतिपक्ष नेपाली कांग्रेस आर संघीय सरकारक मूल घटकक रुप मे रहल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) मैथिली आर भोजपुरीक पक्ष मे देखा रहल अछि । खैर, ई एखन सामाजिक आ सांंस्कृतिक विषय सँ बेसी राजनीतिक विषय बनि गेल अछि । एकरा बारे मे भविष्य मे निर्णय होएत जायत । वर्तमान समय एहि सन्दर्भ मे प्रतीक्षे करब युक्तिसंगत होयत । एहि आलेख मे प्रदेश कोन भाषा केँ सरकारी कामकाजक भाषा बनायत ताहिक सन्दर्भ मे केन्द्रित रहबाक उद्देश्य नहि अछि, एहि आलेख मे सरकारी कामकाज मे मातृभाषाक महत्व केर सन्दर्भ मे चर्चा करबाक मूल लक्ष्य अछि ।

मातृभाषाक सम्बन्ध शिक्षा संग छैक । लोक अपन मातृभाषा मे जतेक सशक्त आर सफल ढंग सँ सीखि सकैत अछि से आन भाषा मे सीखब, जानब आ बुझब कठिन होएत छैक । मातृभाषाक माध्यम सँ मनुष्यक सीखला सँ पूर्णता प्राप्त करैत छैक आर एना सीखल गेल ज्ञान सँ मनुष्य अपन विचार निर्माण केँ पूर्णता प्रदान कय सकैत अछि । एकर सम्बन्ध अभिव्यक्ति आर सोचक प्रकटीकरण सँ छैक । सार मे एकर सम्बन्ध विकास संग छैक । वर्तमान विश्व मे चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम सहितक देश केर विकास निर्माण प्रक्रिया केँ दृष्टिगत कयल जाय तऽ ई यथार्थ प्रमाणित होएत अछि । चीनमे ९० प्रतिशत सँ बेसी जनता एक्कहि टा समुदायक छैक, ओ थिकैक हान । एहि दृष्टि अनुसार चीन मे करीब‍-करीब एकभाषीक अवस्था विद्यमान छैक । लेकिन चीन द्वारा दस प्रतिशत सँ कम संख्या मे रहल अनेकों भाषाभाषी सभकेँ समेटैत अधिकारसम्पन्न बनायल गेल छैक । चीन मे पाँच टा स्वशासित प्रदेश छैक आर ओहि प्रदेश मे ओतुके जातीय समुदाय आर भाषा केँ प्रश्रय देल गेल छैक । चीन आजुक अवस्था धरि पहुँचबा मे ओतुका भाषानीति काफी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केलक अछि से कहब असत्य नहि होयत । चीन अपन विकास यात्राक प्रारम्भहि अपन भाषाक माध्यम सँ आरम्भ केलक ।

ऊपर सेहो उल्लेख कयल बात भाषाक सम्बन्ध सोचबाक बात सँ अछि । मनुष्य आर विनिमय जाहि कोनो भाषाक माध्यम सँ करय योग्य रहितो सोचबाक बात धरि अपनहि भाषाक माध्यम मे करैत अछि । भाषाविज्ञ लोकनिक मुताबिक, मनुष्य अपनहि भाषा मे सोचैत अछि आर आवश्यकता पड़लापर अन्य भाषा मे अभिव्यक्त करैत अछि । सम्भवतः चीन यैह बातक आकलन शुरुअहि मे केलक आर अपन विकास यात्राक लेल रणनीति केर रूप मे भाषा केर प्रयोग केलक । चीनक विकास यात्राक प्रारम्भक दिन मे चीन अंग्रेजीभाषाक माध्यम सँ अन्तर्राष्ट्रीय ज्ञान’आर्जन केलक आर ताहि ज्ञान केँ चीनिया मे अनुवाद केलक । डा. सनयात सेनक बादक ओतुका सरकार द्वारा ओहि ठामक बाल-बालिका केँ नियोजित रूप मे अध्ययन करबाक लेल अमेरिका पठायब प्रारम्भ करबाक इतिहास अछि । बादक समय मे सेहो बाल-बालिका केर एहने आरो समूह केँ अमेरिका पठेलक । अमेरिका पठायल गेल बाल-बालिकाक यैह समूह कालान्तर मे ओहि ठामक थिंक टैंक केर रूप मे विकसित भेल आर यैह समूह द्वारा ज्ञान मार्फत चीनक विकासयात्रा केँ मूर्तरूप प्रदान करबाक अभियान केँ प्रारम्भ केलक से कहनाय अस्वाभाविक नहि होयत । चीनक अधिकांश लोक आइयो चीनिया बाहेक अन्य कोनो भाषा केर सहयोग लेबय नहि चाहैत अछि । ई सब दोसर भाषा सँ चीनिया भाषा मे अनुवाद करैछ आर बुझबाक प्रयत्न करैछ । एहि प्रयोजनक लेल चीनिया सब विभिन्न प्रकारक एप्स बनेने अछि । ई अनुवाद-एप्स चीन आर चीनिया जनता केँ चीनिया भाषाक माध्यम सँ बाकी विश्व संग जोड़ैय मे सहयोग केलक अछि । एतबा टा नहि, चीन वर्तमान मे प्राप्त केने विकासक लक्ष्य सेहो भाषाक माध्यम सँ हासिल करबाक बात मे शंका नहि छैक । चीन अपनहि भाषाक माध्यम सँ ज्ञानक बात चीनिया जनमानस मे विस्तारित आर प्रसारित केलक तथा ओतुक जनता एहि तरहक प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त केलक । आइ विश्व भरिक कोनो भाषा मे सृजित ज्ञान चीनिया जनता केँ अपन भाषाक माध्यम सँ प्राप्त करय मे सक्षम अछि । एहि अवस्था मे तेहेन ज्ञान केँ आत्मसात करब आ तेकरा व्यवहार मे अनुवाद करब चीनिया जनता केँ सहज भऽ गेल अछि । एतबा नहि, अनुवादक एहि प्रक्रिया सँ चीनिया भाषा केँ आजुक समय मे सर्वाधिक सम्पन्नभाषाक सूची मे प्रवेश भेटब सेहो संभव भऽ गेलैक ।

एहि अवस्था मे प्रश्न उठैत अछि, नेपाल मे नेपालीभाषा आर एतुका अन्य मौलिक भाषाक उपयोग एहि ठामक विकास केर सन्दर्भ मे करब कि नहि करब ? ई प्रश्न महत्वपूर्ण अछि । एहि आलोक मे प्रदेश नम्बर २ केर भाषा-विवाद केर सन्दर्भ केँ बुझल जा सकैत अछि । अभिव्यक्ति आ विकास केँ आत्मसात करबाक अछि तऽ भाषाक औचित्य आर प्रयोग केँ सेहो आत्मसात करब जरूरी अछि । एहि यथार्थ केँ प्रदेश २ मात्र नहि, आनो प्रदेश सभ केँ सेहो स्वीकार करब अपरिहार्य अछि । भावी समय मे नेपालक भाषानीति केर सन्दर्भ मे ऊपर उल्लेख कयल बात अत्यन्त महत्वपूर्ण भऽ सकैत अछि । एतबा नहि, भाषाक सम्बन्ध ज्ञान प्राप्त करबाक प्रक्रिया, शिक्षा संग रहल बात स्वीकार कयल जा चुकल अछि । सिद्धान्त मे स्वीकार कयल यैह बातक आधार मे नेपाल सेहो प्राथमिक तह मे त्रैभाषिक शिक्षानीति तय केने अछि । लेकिन कोनो खास उपलब्धि प्राप्त केनाय एतबा टा सँ पर्याप्त नहि अछि । कम सँ कम चीनक सन्दर्भ सँ सीखल जा सकैत अछि ।