लक्ष्मीनाथ गोसाईं केँ नमन, आस्था निर्माण केर एक मुख्य स्रोतः एक संस्मरण

संस्मरण

– प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाक केन्द्रभूमि मधुबनीक रहुआ-संग्राम गाम मे काल्हि ३१ मार्च, २०१८ सँ परमहंस संत शिरोमणि लक्ष्मीनाथ गोसाईं महोत्सव २०१८ आयोजन आरम्भ भेल अछि । समाचार सेहो मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशित कयल गेल अछि। एक सँ बढिकय एक विद्वत् लोकनि गोसाईं बाबा केर स्मरण करैत हुनक आजीवन योगदान, योग, भक्ति आ सामाजिक एकजुटता मे आध्यात्मिकता उपयोग पर प्रकाश देलनि । एहि विशेष समारोह मे हमरो जेबाक छल, परन्तु आजीविका सँ जुड़ल बाध्यताक कारण काल्हि नहि जा सकलहुँ । कार्यक्रम सफलताक शुभकामना अछि । आइ दोसर दिवस विविध आयोजनक संग ई समारोह आयोजित भऽ रहल अछि । संयोजक सुमितजी बहुत मनोयोग सँ कार्यक्रमक परिकल्पना तैयार कयलन्हि अछि ।

एतेक कहि दी जे प्रातःस्मरणीय संत गोसाईं बाबा मे हमर आस्था बच्चा सँ बनल अछि, हुनकर लिखल पाँतिः

राम नाम जेहि वंश मे सो कुल परम पवित
लक्ष्मीपति तरि जातु हैं देव पितर ओ मित

एकर सुमिरन करैत अपन कुल-परिवार मे अति-प्राचीनकाल सँ ‘जय सीताराम जय जय सीताराम’ केर मूलमंत्र जे स्वयं बाबाजी हमर गाम कुर्सों मे हमर पुरखा लोकनि (कुर्सों ड्योढि) केँ देलनि तेकर अखन्ड अष्टयाम, तेराति, नवाह आदि संकीर्तन कार्यक्रम होइत आयल अछि । यैह मूलमंत्र केर संकीर्तन आइ हमरा लोकनिक क्षेत्र मे प्रधान मंत्र थिक ।

बाबाजी केर फैटकी कुटी पर अवस्थित समाधि-स्थल पर बच्चहि अवस्था सँ आइ धरि हमर आस्था बनल अछि । बेर-बेर जाइत-अबैत बाबाजीक समाधिक दर्शन-सुमिरन करैत छी ।

हालहि सुमन समाज भाइ संग बनगाँव सँ देबना महादेव स्थान पर गेल रही। ओतुका भक्तिमय वातावारण मे बाबाजीक लिखल साहित्यक भक्तिरस मे डूबिकय रसपान करबाक अवसर भेटल ।

ओनाहू, बाबा, बाबी, माय आ समस्त परिजनक अतिरिक्त एखनहुँ बाबाधाम केर यात्रा पर रहबाक समय पराती सँ लैत अनेकों भजन बाबाजीक रचना केँ गबैत भक्त लोकनि केँ देखि देह मे सिहरन होइत अछि, कान तृप्त होइत अछि, आत्मा केँ ठंढक भेटैत अछि । जन्म-जन्मान्तरक ताप सँ अभिशप्त अपन भटकैत आत्मा केँ एना स्थिरता पबैत देखि शास्त्रक वचनक सत्यता प्रमाणित होएत अछि जे संतक स्मरण, दर्शन, सत्संग सँ जीवनक कल्याण संभव अछि ।

जय बाबाजी!!

हमरा गामक श्रीरामजानकी मन्दिर केर निर्माण तथा श्रीराम-जानकीक उपासनाक पाछाँ सेहो गोसाईं बाबाक बहुत रास प्रेरणाक चर्चा बाप-पुरखा लोकनि चर्चा करैत सुनल अछि । सब तरहें, हिनकर संस्मरण हमरा सभक कल्याण लेल निश्चित मार्ग थिक ।

हरिः हरः!!