ईन्दूक बाबू फ्रीज कियैक नहि कीनलनि
लघुकथा – रूबी झा “बाबू यौ फ्रीज खरीद लिय ने, ओहि में सँ ठंडा-ठंडा पैन पिब आ दूध कहियो फटबो नहि करत, दही सेहो नहि खट्टा होयत” ईन्दू अपन पिता सँ बारम्बार आग्रह क रहल छलखिन्ह। पिता बात केँ हमेशा टाइर दैत छलखिन्ह। एक दिन ईन्दू अपन जिद्द पर अड़ि गेली। पिता रिटायर्ड शिक्षक रहथिन्ह, ओ पेंशन … ईन्दूक बाबू फ्रीज कियैक नहि कीनलनि








