मैथिलसर्जक कृष्णकान्त झा विरचित बेहतरीन ‘रघुपत्यष्टकं’
१९ सितम्बर २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! रघुपत्यष्टकं – श्री कृष्णकान्त झा रचित एक बेहतरीन आ भावयुक्त रचना राजीवनयन त्रिभुवनभूषण। भवदुःखहरण परमात्म विभो॥ सीतावल्लभ रघुकुलनन्दन। नलिनायतलोचन राम प्रभो ॥1॥ रघुकुलनायक करधृतसायक। मंगलदायक भव पाहि विभो॥ अनुरूप स्वरूप विरूपारूप । अजस्र सहस्त्रस्वरूप प्रभो ॥2॥ शिवमानसहंस रघुवंशवतंश निषूदनकंस सुवंश विभो॥ उत्तम सर्वोत्तम पुरूषोत्तम। नरोत्तम … मैथिलसर्जक कृष्णकान्त झा विरचित बेहतरीन ‘रघुपत्यष्टकं’









