मुक्त मुक्त मिथिला दहेज मुक्त चाही
कविता – पवन झा ‘अग्निवाण’ @ गुमनाम फरिश्ता मुक्त मुक्त मिथिला दहेज मुक्त चाही मुक्त मुक्त मिथिला दहेज मुक्त चाही मैथिल के धर्म एहि भांति हम निबाही बेटा और बेटी में फर्क करै बाप सब टाका के खातिर अनर्थ करै बाप सब मर्यादा खातिर पतित बनै बाप सब कन्यागत खातिर संताप बनै बाप सब तुच्छ … मुक्त मुक्त मिथिला दहेज मुक्त चाही







