गजल
धरती मचौलकै तान्डव भाइ बड़ विशाल
जाहि मे पड़ि ध्वस्त भेलै सौंसे नेपाल
कामना केलियै सुख स्मृद्धिक इश्वर सँ
दुखद खबर सँग भेलै सुरु नया साल
जेकरे कहि माई पुकारलियै सबकियो
वैह बनलै सबहक जीवनक महाकाल
घरसँ बेघर केलकै छीन लेलकै प्राण
मुह मोइर लेलकै तोड़ि मायाक जाल
कतेक दिनक भुखायल रहै धरती माई
जे घोईंट गेलै अपने फूल सनक लाल
अशरफ राईन
सिनुरजोडा, धनुषा(नेपाल)
हाल: कतार


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बड सुन्दर लेख…