रामचरितमानस सँ सीख – ६

स्वाध्याय

रामचरितमानस सँ सीख – ६
 
राम नाम जेहि वंश मे – से कुल परम पुनीत।
लक्ष्मीपति तरि जाएत छथि – देव पितर ओ मीत॥
 
लक्ष्मीनाथ गोसाईं केर उपरोक्त दुइ पाँतिक संग आइ ६ठम भागक रामचरितमानसक सीख लिखय जा रहल छी। आरम्भ केर ५ भाग मे एक सँ बढिकय एक ज्ञानवर्धक बात महाकवि तुलसीदास केर पद्य सँ मंगलाचरणक रूप मे सीखबाक अवसर भेटल। जिनका छूटल हो ओ कृपा कय केँ मैथिली जिन्दाबादक सर्च अप्शन (एतय सँ ताकू) कूँजी पर क्लीक कय केँ ताकू आ जरुर पढू। बेर-बेर कहब, स्वाध्याय बिना नरतन केर महत्व कहियो नहि बुझि सकबैक। आउ, आब जे नव प्रभाग आइ सँ शुरु होयत ओहि मे भगवान् रामचन्द्र केर गुण एवम् विशेषताक संग राम-चरित्रक विभिन्न रूप देखैत अपना आप मे बहुत किछु सोचय, गुनय आ सीखय केर अवसर भेटत।
 
१. रामायण मे श्री रघुनाथजी केर उदार नाम अछि जे अत्यन्त पवित्र अछि। वेद-पुराणक सार थिक। कल्याण केर मकान थिक। अमंगल केँ हरयवला थिक। जेकरा पार्वतीजी सहित शिवजी सदैव जपैत आ स्मरण करैत रहैत छथि।
 
२. चन्द्रमाक समान सुन्दर मुंहवाली स्त्री सब प्रकार सँ सुसज्जित भेलोपर बिना वस्त्र केँ शोभा नहि पबैत अछि, ठीक तहिना श्रीराम केर नाम बिना कोनो आ केहनो सुन्दरता शोभा नहि पबैत अछि।
 
३. संतजन फूल पर मंडरायवला भौंरा जेकाँ केवल गुण टा केँ ग्रहण करैत छथि।
 
४. भला लोकक संगत सँ भले के बड़प्पन नहि पबैछ! धूआँ सेहो अगर केर संग सँ सुगन्धित भऽ कय अपन स्वाभाविक कड़ुआहट छोड़ि दैत अछि। श्मसानक अपवित्र छाउर (भस्म) सेहो श्रीमहादेवजी केर अंग केर संग सँ सोहाओन लगैत अछि आर स्मरण करिते देरी पवित्र करयवाली होएत अछि।
 
५. श्रीरामजी केर यश सँ रामायणरूपी कविता सब केँ प्रिय लगैत अछि, जेना मलय पर्वत केर संग सँ काठो चन्दन बनिकय वन्दनीय भऽ जाएत अछि, आर फेरो कियो काठक तुच्छताक विचारो तक नहि करैत अछि।
 
६. श्यामा गाय कारी होएतो ओकर दूध अत्यन्त उज्ज्वल आर अत्यधिक गुणकारी होएत छैक।
 
७. श्रीरघुनाथजीक कथा कल्याण करयवाली आर कलियुगक पाप केँ हरयवाली अछि। तुलसीदासजी कहैत छथि, “रामायण गँवरू भाषा मे भेलो श्रीसीताराम जी केर यश केँ बुद्धिमान बड पैघ उत्साह सँ गबैत आ सुनैत छथि।”
 
हरिः हरः!!