स्त्री रौद अछि, पानि अछि, बसात अछि,

रविन्द्र भारती (खजौली) ११.०३.२०१७ , दिन – शनिवार

नरेंद्र कुमार जी खजौली (मधुबनी) बाजारक दवाई विक्रेता अछि , अपन काज के व्यस्था के रहितो एहन अमूल रचना केलैन ।

हिनका मैथिलि आ मिथिला के प्रति अपर स्नेह रखैत छैन, हिनक मैथिलि आ हिंदी दुनु भाषा में आहि कविता के रचना केलैन।

आ मैथिलि जिंदाबाद समूह के जनौलइन, महिला दिवस के अवसर पर हिनक महिला सभक सम्मान में ई कविता समर्पित केलैन ।

अति महत्वपूर्ण बात सब संकलन केने छैथ ,मैथिलि भाषा के क्षेत्र लोक सभक रुछि जगैत देखाइत अछि ।

ई मिथिला आ मैथिलि के लेल बढ़ पैघ बात अछि , आहि रूचि के जगक रखबाक जरुरी अछि ,

स्त्री रौद अछि, पानि अछि, बसात अछि, बिजुरी अछि, 
कतहुँ पाथर जकाँ अडिग तँ कतहुँ टिकुली अछि ।
मायक ममतो हुनकहिं में अछि बहिनक प्रेम सेहो,
स्त्री झमटगर अपनापन बलाँ डारि अछि ।
स्त्री प्रेम अछि, संवेदना अछि, आस्था आ विश्वास अछि ,
नाश कए दैक जे बुराई ई जरैत ओ काठी अछि ।
स्त्री उष्मा अछि, उर्जा अछि, प्रकृति अछि, पृथ्वी अछि, 
नीक रचना स्त्रीत्व केर ई उएह अधहाँ दुनियाँ अछि।