जाहि आगि सँ पकलौं वैह सँ देह-हाथ सेकऽ पड़ैत अछिः ज्योति

मैथिली कविताः हम आ हमर देश

– ज्योति यादव, कक्षाः १२, कान्तिपुर हायर सेकेन्डरी स्कूल, विराटनगर । Jyoti Yadav

जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल
उहे स देह-हाथ सेकऽ पड़ैत अछि
जे आइग सँ……

जे छी दुश्मन देश के यौ मैथिल
ओकरे लेल जियय के भीख मांगय पड़ैत अछि
जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल….

कहब केकरा यौ मैथिल
देश के बेटा देश बेचैत अछि
जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल…..

पियासल मन पाइन मंगैत य यौ मैथिल
पियब कोना मिथिलाक खून मिलल अछि
जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल…..

गुलाम बनि गेली यौ मैथिल
अपनहि घर-अंगना मे
कहब केकरा यौ मैथिल
गरीबीक बेरी सँ मुंह बान्हल अछि
जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल…

उपरोक्त कविता ज्योति यादव द्वारा लिखल गेल अछि। हालहि संपन्न महाविद्यालयस्तरीय मैथिली कविता प्रतियोगिता मे ज्योति प्रथम भेल छलीह।

हरिः हरः!!