हम छी मैथिल बाबू यौ – बेदर्दीक टटका गीत

गीत

vidyanand1– विद्यानन्द बेदर्दी, राजविराज (सप्तरी) – हाल विराटनगर

हम छी मैथिल बाबु यौ
नइ केकरो सँ पाछु यौ
एक बेर जँ भेट जाए अवसर
हिला देव पूरा मिथिला नगर॥

धोती-कुर्ता- गमछा परिधान
ललका पाग छी शीरके सान॥
माता जानकी बसैए तनमनमे
मिथिला जिबैए ई कनकनमे॥
प्राणो सँ प्रिय मैथिली हमर
एक बेर जँ …….

आऊ नऽ देख लिय अजमाकऽ
हरा देब सप्पत मिथिला माँकऽ॥
गोनू काका सन छी चतुर हम,
राजा सलहेस सन छी वीर हम॥
भरल य अगबे जोश-जाँगर
एक बेर जँ …..

डाँड़ लचकाकऽ नाँच देखायब
अनेक रस भरल गीत सुनायब॥
मलङ्गिया सन छी कमेडियन
प्रेमर्षी सन सब चीजमे ए-वन॥
आँखि फाड़ि देखै जग सगर
एक बेर जँ ………

मैथिलीके बिगुल सगरो फुकब
एक दिन हमहुँ गगनके चुमब॥
नाम कमेबै हम त’ दाम कमेबै
शुद्ध मोनसँ खुले आम कमेबै॥
काज करबै जे हएते अमर
एक बेर जँ ……….