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के छी हम ‘नारी’ – महेश डखरामी केर एक रचना

358 भ्यूज

———नारी———

– झा महेश ‘डखरामी’

☆
victimized-womanरे ! रे! मानुष आबहुं जाग
हमही तोहर सकल अनुराग
फोलि नयन तू करय मनन
हमही वर्तमान भविष्य भाग

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हम आदि अनादि कर्तारी छी
हमही सकल श्रृजन धारी छी
हम सर्वस्व जीव आस एक
हम मातु समस्त दुखहारी छी

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हम अर्धनारिश्वर त्रिपुरारी छी
श्रेष्ठ समर्पण छवि गांधारी छी
सम्पूर्ण जखत अछि हमरे अंश
हम वेष्टित वेश मुरलीधारी छी

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हम लक्ष्मी लखिमा ललिता छी
हमही सती सावित्री सीता छी
महाकाल कृपाल सब दसोदास
हमही कालिका खप्परधारी छी

☆
हम भगिनी भार्या मातारी छी
हम पूजाक मंगलमय थारी छी
हम सती शची भवतारी छी
फोल मनक आँखि हम नारी छी

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॥ जयतु मैथिली ॥

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