मिथिलाक फल: आम

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अहां मज्जरमे आबी ने आबी मुदा… टिकुलामे आयब जरूर सजना
पछिला वर्षक निराशा के तोड़ैत एहि बेर आम केर मज्जर मिथिलाक जनमानस मे संतोष दऽ रहल अछि। मिथिला भ्रमण क्रम एहेन देखल जा रहल अछि। गृहस्थ लोकनि मज्जर पर कीटनाशक दबाइ केर छिड़काव कय रहलाह अछि आ हुनका सभक मुह पर मुस्की पसरल अछि।
नव विवाहिता जिनक पिया परदेश प्रवास मे छथिन सहजे उत्साहित छथि जे एहि बेर आम खेबाक बहन्ने प्रियतम अवश्य औताह आ यैह सब सोचि भन्साघर हो या अपन एकान्त वासक घर, हुनक गुनगुनेनाय शुरु भऽ रहल छन्हि। एहने अवसर लेल मैथिली गीत प्रसिद्ध भेल अछि – अहाँ मज्जर मे आबी न आबी मुदा टिकुला मे आयब जरुर सजना।

पुपरीक राम सोगारथ यादव कहैत छथि जे एहि बेर आम बेचि कय वैष्णो देवी दर्शन करब। तहिना सुपौल जिलाक कर्णपुरवासी अरुण पाठक आम सँ प्राप्त आमदनी सँ घरक छत ढलैया करबाक प्रत्याशा मे छथि। निश्चित रूप सँ एहि बेरक मज्जर केँ देखि कहल जा सकैत अछि जे फसिल सेहो बढियाँ होयत।

-किसलय कृष्ण

मिथिलाक आम: सिनुरिया
मिथिलाक आम: सिनुरिया