मनीष कर्ण, जनकपुर। दिसम्बर १२, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!!
मैथिली मे मोहावरा – कहावत केर कमी नहि। अहाँ सेहो एहि संकलन मे अपना तरफ सँ जोड़ि सकैत छी। मैथिली जिन्दाबाद पर हमर संकलन मे अहाँक जोड़ल मोहावरा सेहो प्रकाशित कैल जायत। आउ अपन मीठ भाषा मैथिली केर समृद्धि लेल आरो एहेन महत्वपूर्ण कहनी सब केँ संकलन करी।
१. अनेर-धुनेर के राम रखवार
२. अपना लेल लल, गोइठा बीछय चल
३. अन्हा गांव मे कन्हा राजा
४. अनकर धन पाबी त अस्सी मौन तौलाबि
५. ओझा लेखे गाम बताह, गामक लेखे ओझा बताह
६. अघायल बक के पोठी तीत
७. कनियाँ बरक झगड़ा, पंच भेल लबरा
८. कोढिया उठला त भैर घर तमला
९. खस्सी के जान जाय, खेबैया के स्वादे नय
१०. खीरा खा क पेनी तीत
११. घर आंगन भौजी के छलछल करै ननदो
१२. माय करै कुटान-पीसान, बेटा कें नाम दुर्गादत्त
१३. चलयनय आबय त अंगना टेड़
१४. करनी देखियौन मरनी बेर
१५. चोरक मुंह चान सन
१६. चालनि दूसलैन सूप के जिनका सहस्त्र टा छेद
१७. जखन नंगटे नहायब. तय गाड़ब की
१८. जिदगर कनियां के भैंसुर लोकनिया
१९. पेट बिगेराय मुरही घर बिगारेय बुरही
२०. भोज नै भात, हर हर गीत
२१. राजा दुःखी प्रजा दुःखी, जोगी के दुःख दूना
२२. पहिरने ओढने कनियाँ-वर, निपने-पोतने आंगन-घर
२३. तीन तिरहुतिया तेरह पाक, ककरो चुड़ा दही ककरो भात
२४. नर न झर पेटपफूला दिओर
२५. भुसकौल विद्यार्थी के गत्ता मोट
२६. सरल गाय बाभन के दान
२७. सोनरा के सेवने कान दूनू सोन, बनिया के सेवने छजल भरि नून
२८. हरबरी बियाह, कनपट्टी सेनुर
२९. बहिरा नाचे अपने ताले
३०. हर बहय से खर खाय, बकरी खाय अचार
३१. सैंया सँ छुटटी नहि, दिओर मांगे चुम्मा
३२. सब सखी झुमैर खेलै, लूल्ही कहैय हमहूं
३३. बहैय बरद आ हकमैय कुक्कुर
३४. धोबी के कुकुर न घर के न घाट कें
३५. बियाह सं विध् भारी
३६. जेकर बड़की जिलाही तकर छोटकी भारे लागल खाय
३७. सरलौ भुन्ना त रहू के दुन्ना
२८. सस्ता गहूम, घर घर पूजा
३९. माय मरइहैं ध्यिा लेल, ध्यिा मरिहहै ब्याहता सांय ले
४०. ककरो बोर-बोरे नून , ककरो रोटियो पर आपफत
४१. बाप छल पेट में, पूत गेल गया
४२. बाप जनमल अनड़ियाँ मे, बेटा नाम पावर हाउस
४३. बाप के नाम लत्ती फत्ती, बेटा के नाम कदीमा
४४. भुखले मुन परे कोबरक खिड़
४५. सभ धन बाइस पसेरी
४६. नय मारि माछ ने, नय उपछी खत्ता
४७. मूर्खक लाठी, बिच्चे कपार
४८. पैसा नय कौड़ी आ बीच बजार मे दौड़ा-दौड़ी
४९. जुड़ै मियाँ के माँड नैय, माँगय मियाँ ताड़ी
५०. हम चराबी दिल्ली दिल्ली आ हमरा चरबय घरक बिल्ली
मैथिली भाषा ओना तऽ ७ करोड़ लोकक भाषा थीक, लेकिन अफसोस जे एतेक समृद्ध भाषाक भाषाभाषी हमरा लोकनि अपनहि भाषा केँ छोड़ि अनकर भाषा मे बेसी मस्त होइत छी। तैँ आउ, शपथ ली जे अपना भाषाक लेल एकटा काज जरुर करब।

6 Comments
1.मुँह नहि कान बीच गाम दोकान । 2.घर भुजी भाँग नहि,बाँटै चलल चुड़ा । 3.जकरे माय मरै तकरे पात भात नहि । 4.बापक बियाह पितियाक सिनुर 5.पेट मे अन्न नै खड़िहान मे दौन । 6. बहिया नाचै अपनहि ताल । 7.कन्हा कुकुर माड़हि तिरपित । 8.भोज नहि भात हर हर गीत । 9. कानै कै मोन भेल त आँखि मे गरल काठि । 10.देख पड़ोसनी जरि मरै । 11.कुकुर गवाही सुगर देल,दुनु पड़ा कै जंगल गेल । 12.ककोड़बा बियान ककोड़वे खाय । 13.बड़ै धधाय छै जल्दि बताय छै । 14.देखले दरभंगा चिन्हले चपरासी । 15.बाप नेहौरा पुत चौथार । 16.मुँह देख मुँगबा ।17.राजा दुखि प्रजा दुखि जोगी कें दुख दुना । 18.सड़लो हथिसार त नौ घर सांगह । 19.सड़लो भुन्ना त रेहु के दुना । 20.बापक नाम लती फती बेटाक नाम परोड़ । 21.उपजै पुत पिता कें कर्में । 22.जे पुत परदेश गेल देव पितर सँ दुर भेल । 23. अन्हा गाम मे कन्हा राजा । 24.घर फुटै त गबार लुटै । 25. औरदा राखै प्राण । 26.जे जिबै से खेलै फाउग । 27.मिलै मियाँ केँ माँड़ नै बेटा पिबै ताड़ी । 28. साँझै मरल त कानब कतेक । 29.नैहर जो बेटी सासुर जो बहियाँ डोलाबैत कतौ खो ।30 .चोर कतौ इजोत सहै ।31.चोरक मुँह चाम सन । 32.रार कें सुख बलाए। 33.भुखल मे गुलैरो मीठ ।
34.बड़ बड़ घोड़ी भासल जाए नर घोड़ी पुछै कते पाइन । 35.बानर जानै अदरखक सुवाद । 36.बेसी जोगी मठ उजाड़ । 37.देशी कुकुर बिलायती बोली । 38.बकरी धन आ परबा जन । 39.साउनक जनम भादवक बाढि 40.एहि बेटा सँ पोता नहि । 41.हींग लागै नै फिटकीरी रंग चोखा । 42.माँछै तेल सँ माँछ तराबै । 43.अपने रोपल गाछ भुतहा । 44.सियारक गुँह पर्वत । 45.सुगरक गुं नै निपै जोगर नै पोछै जोगर । 46.खाली बंदुक भटाक । 47.बापक बिगाड़ल नाम अमीनक बिगाड़ल गाम । 48. माइरक डरै भुत पड़ाबै । 49.जे रोगी कें भावै से वैद्य फरमाबै । 50.देह मे दम नै बजार मे धक्का । 51.देख मौउगी हम चुल्हा छड़पै छी । 52.अपना ल लल भरि गाम दल । 53.जे नन्नु से गर्भहि नन्नु । 54.राम भजन मे आलसी भोजन मे होशियार । 55.लिखै लेल नहि मिटबै लेल दुनु हाथै । 56.जे भोज नहि करै से दाईल बड्ड सुरकै । 57.जानि कें करे पाप कहै पुर्वक लिखल छियै । 58.सब सँ बुड़बक दीनानाथ ।
59.सौ बेर चोर कें त एक बेर साधु के । 60.अन्हार घर साँपहि साँप । 61.बइसले बइसल बुद्धि फुरै छै । 62.मुँह मे राम बगल मे छुरी । 63.जोगी आगाँ धुरखेल । 64.बाड़ीक पटुआ तीत । 65.घर कें दही खट्टा । 66.गोरहा कें जेठ । 67.कखनो पुरी पचास कखनो ढन द उपास । 68.खा कें पसरी माईर कें ससरी । 69.नव जोगी कें हाथ मे जट्टा । 70.मुँह दुबरा कें कनियाँ सभक भौजी । 71.धीर रहै से भार सहै खेती सहै उजाड़ि । 72.झरकल मुँह झाँपनहि नीक । 73.चोरी आ सीना जोरी । 74.हदमदी सँ बोकारे बढियाँ । 75.हर बहै से खऽर खाय बकरी खाय अचार । ॥जय हो ॥ ( पुन: दोसर घड़ी में । आ पिछला पचास टा मे सँ हमर शायद चारि या पाँच टा शायद रीपीट भऽ गेल छैक । से देख कें अलग कऽ देबैक ) । शुभ रात्रि । हर हर महादेव ।
76.मंगनी मेँ चंगनी तहि पर दत खिसटी । 77.कन्ही गाय कें भिनै बथान ।78.भाय भैयारी महिसक सींग जखनहि जनम तखनहि भिन्न ।79.लती चोर फती चोर तहन हुए सिन्हमा चोर ।80.गुरु गेला कहि चेला गेला बहि ।81.आन्हर गुरु बहिर चेला माँगै गुर दियै भेला । 82.मारी माँछ नहि उपछी खत्ता ।83.दाईल भात दाय के नाम जजमान के । 84.मंगनी बरद के दाँत के देखै छै ।85.ओझा लिए गाम बताळ गामक लिए ओझा बताळ ।86. साउन सँ भादव दुबर ।87.बिलैय भागै सीक टुटै छै ।88.जुन्ना जरि गेल ऐंठी रहि गेल ।89.सुप महक भट्टा ।90.बिना पेंदी कें लोटा ।91.बड्ड बुधियार तीन ठा मखै छै ।92.अदिन्ता चढल छै ।93.गिरगिटिया लिखल छै ।94.भुत राकश सबार छै ।95.कान त सोन नहि सोन त कान नहि ।96.अपन हारल घरनी कें मारल ।97.बुढ बरद हुड़ार सँ ठठ्ठा । 98.गोल बरद कें मुठिया सींग ।99. गुड़क मारि धोकरे जाऩै छै ।100.भुखल आनहर खेनए कोढि । 101.धीपल कोढि ।102. कोल्हु के बरद ।103.डुबि के पाइन पिनै ।104.सब कुकुर काशि जेतै त हाड़ के चिबैतै ।105.साँझे मरल त कानी कतै ।106.अपन घर बिलैयो शेर ।107.लहा लहंगा सदा सुखि ।
108.अपने मुँह मियाँ मिठु । 109.मोने मोने गुड़ चाउर खेनै । 110.सब धन साढे बाईस पसेरी. 111.धुबैय कम सुसकारी बेसी । 112.जकर काल तकर कपार । 113.लग मे कचहरी घुच द बेगार। 114.अपने मुइने स्वर्ग । 115. कोढिया बरद बेलगोबना मरद । 116.सड़ल गाय बाभन कें दान। 117.सब सँ बुड़बक गोनु झा । 118.चुड़ा दही में सकरौड़ी । 119.भेल बियाह मोर करबऽ की धीया छोड़ि कें लेबऽ की।120.एहेन पदना रही त पुजा पर दै बैसी । 121.लिख लोढा पढ पत्थर सोलह दुनी आठ । 122.धी गेली पुतौह एली आश्रम बराबरे । 123.दुधैर गाय के लथारो नीक ।124.इयह मुँह पान खुआबै इयह मुँह बात सुनाबै । 125.इयह गुड़ खेने कान छेदेने ।126.घर पर खर नहि बाड़ी मे इजोत ।127.घीवो सँ चीकन ।128.झगड़ा नै दौन चुन तमाकु बन । ## जय हो ।
superb