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नारी मात्र सँ संभव अछि अईंठ अपैत अमनिया के ध्यान रखैत, नब चुलहा पारि के कतेको विधि -विधान सँ पावनि करब

16 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित: चन्दा वर्मा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- पावनि – तिहार मे महिलाक योगदान

मिथिला मे आस्था, समर्पण, विश्वासक परंपरा प्रसिद्ध अछि। मिथिला मे सालो भरि पाबैन तिहार मनाएल जाइत अछि।
एहि पाबनि तिहार मे महिलाक योगदान बहुत रहैत छन्हि।
महिला सभ बहुत परिश्रम करैत छथि। पाबनि तिहार मे कतेक दिन पहिने सँ लागल रहैत छथि। घर कऽ साफ सफाई पर विशेष ध्यान राखैत छथि। चाउर के पीस कऽ पीठार बना क बहुत सुन्दर ढंग सँ अरिपन दैत छथि, सिन्दुर लगा कऽ पूरा करै छथि।मिथिला कऽ परंपरा बचा कऽ राखै मे पूरा परिवार प्रयास करैत छथि । अपन हाथ सँ प्रसाद बनाबैत छथि। शुद्धता पर मिथिलावासी विशेष ध्यान राखैत छथि।
मिथिला के महिलासभ सम्पूर्ण ओरियाओन पर बहुत ध्यान राखैत छथि।निर्जला ब्रत रखैत छथि।आस्था भक्ति भाव सँ अपन रिति रिवाज निभाबय छथि।

कोन डाला मे कतेक की सभ राखल जाइत, कतेक बेर अर्ग देल जाइत, कोन नैवेद्य कतेक जगह चढ़ाओल जाइत छैक, ई परंपरा अपन सास, माँ सँ सिखैत छथि।
मिथिला के महिला सब अपन परंपरा के जीवंत राखै लेल दोसर पीढ़ी धरि पहुँचाबै कऽ कोशिश करैत छथि। बच्चा सभ के विशेष रूप सँ ध्यान आकर्षित करैत छथि।
मिथिला के महिलासभ अपन हाथ सँ माईट कऽ चुल्हा बनाबैत छथि छठ,चौरचन, भगवती पातरि आदि नया चुल्हा पर करैत छथि।
मिथिला के महिलासभ अपन परिवार लेल कठिन सँ कठिन व्रत सभ करैत छथि।
तीज,चौरचन,जितिया व्रत,छठ व्रत,सभ राखैत छथि।

निष्कर्ष
मिथिला के महिला सब बहुत पाबनि तिहार मनावैत छथि। आस्था, समर्पण, विश्वासक परंपरा के निभाबैत ओकरा जीवंत राखैत छथि।हस्तकला के प्रयास बहुत ढंग सँ करैत छथि। अपन अगला पीढ़ी धरि पहुँचेनाइ कर्त्तव्य थिक।

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