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भारतीय राजनीति मे अराजक तत्त्वक खतरनाक मानसिकता सँ आमलोक सावधान रहय

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उपद्रवी तत्त्व सँ सावधान भारत

– प्रवीण नारायण चौधरी

जी, सन्दर्भ भारतीय राजनीति केर अछि । भारतक आर्थिक-सामरिक विकास आ ‘अच्छे दिन’ केर सुखद परिणाम जे नरेन्द्र मोदी समान उच्चकोटिक राष्ट्रभक्तक नेतृत्व मे भ’ रहल अछि । मोदी एकटा सामान्य परिवार मे जन्म लेने लोक छथि । धरि अपन साधना-तपस्या आ दीर्घकालिक अध्ययन-अनुभवक आधार पर कुशल शासन व्यवस्था संचालित कय रहल छथि ।

मोदीक प्रारम्भिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केर एकटा सामान्य कार्यकर्ता सँ लैत प्रचारक आ अध्येता रूप मे देखाइछ । फेर संगठनकर्ता आ क्षेत्र विशेष मे कार्य विशेष पूरा करबाक अभिभाराक संग एकटा प्रभारी रूप मे देखाइछ । फेर भारतीय मीडिया मे मोदी एक प्रखर आ कुशल वक्ता रूप मे देखाइत छथि ।

१९५० मे जन्म लेनिहार नरेन्द्र मोदी १९७० मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे शामिल होइत छथि, पुनः १९८७ में भारतीय जनता पार्टी मे शामिल होइत छथि । विभिन्न कार्यभार आ मन मे राष्ट्रसेवा एकमात्र लक्ष्य लेने हमेशा डाउन टु अर्थ रहि जमीनी स्तर पर काज कयनाय आ ताहि सँ प्राप्त अनुभवक आधार पर राष्ट्रक भविष्य निर्माण प्रति सोच बनायब हिनकर विशेषता रहल एना बुझाइत अछि ।

अनुभव आ पद – स्टेटमैनशीप केर आरम्भ

स्मरण होयत – गुजरातक भुज मे ओ भयावह भूकम्प । सात रिक्टर सँ उच्च पैमानाक ओ भूकम्प मे लगभग २० हजार आदमी मारल गेल छल । लाखों आदमी बेतरतीब घायल आ बेघर भेल छल । गुजरात मे भाजपाक सरकार जे कि हालहि १९९५ सँ सत्ता प्राप्तिक यात्रा आरम्भ कयनहि छल, तेकर प्रदर्शन सँ जनता मे असन्तोष आ आक्रोश देखाय लागल । तेहेन स्थिति मे भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा नरेन्द्र मोदी केँ राज्यक मुख्यमंत्री बनेबाक निर्णय लेल गेल ।

नरेन्द्र मोदी अपन जनसेवा-राष्ट्रसेवा लेल सब दिन प्रतिष्ठित कहेलाह । भुज केर भूकम्प मे सेहो हिनकर नेतृत्व मे कतेको रास कैम्प सब चलल । राहत कार्य मे जमीन पर वोलन्टियर रूप मे कार्य कयलनि, ताहि मे आबयवला समस्या सब सँ रूबरू होइत काफी अनुभव समेटलनि । आ आब अपने राज्यक मुखिया बनि जनताक सेवा – गुजरात निर्माणक विभिन्न कार्य सँ जनताक मन केँ जीति लेलनि ।

गुजरात मुख्यमंत्री सँ भारतक प्रधानमंत्री धरि लगातार २५ वर्ष सँ बेसी बिना कोनो हार आ बिना कोनो राष्ट्रविरोधी क्रियाकलाप केँ नेतृत्व प्रदान कय रहल छथि नरेन्द्र मोदी । भारत मे ‘गठबन्धन सरकार’ केर यात्रा देश मे कतेको बेर हंग असेम्बलीक समाधान रूप मे विगत ३० वर्ष सँ मुखर अछि, सब जनिते छी । लेकिन गठबन्धन केँ टिकाकय सरकार चलबय मे भाजपाक नीति आ नीयत दुनू बेजोड़ अछि । एनडीए तेँ आइ धरि कायम अछि, यूपीए कतेको बेर टूटल-जुटल, आइ नया नाम जे विवाद सँ यात्रा आरम्भ कयलक, से इंडी गठबन्धन रूप मे हुकुर-हुकुर कय रहल अछि ।

एनडीए केर नीति, नीयत आ नियम राष्ट्रहित आ संविधानक समस्त प्रावधान मे सँ भारत आ भारतीयताक पृष्ठपोषक रूप मे आगाँ बढ़ेबाक कार्य भ’ रहल अछि । धारा ३७० केँ हंटा देबाक चिरकालिक घोषणा केँ लागू कय देल गेल । श्री राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिदक समस्या समाधान करैत आइ श्री राम मन्दिर स्थापित भ’ गेल अछि । देशक आर्थिक आ सामरिक विकास दर सेहो उच्चकोटिक आ सुधारोन्मुख अछि जेकरा विश्व समुदाय सेहो मान्यता प्रदान कयलक ।

मुदा विपक्ष एहि सब सँ अशान्त कियैक अछि ?

ई सवाल बहुत गूढ़ आ रहस्यपूर्ण बुझाइछ । एकटा अनुभवी आ परिपक्व राजनेताक लोकप्रियता, भारत मे हिन्दूत्व केर एजेन्डा अनुसारक सरकार आ देशहित सर्वोपरि सिद्धान्त मे भारतीय लोकतंत्रक परिकल्पना मुताबिक विपक्ष अपन सकारात्मक आ सार्थक भूमिका नहि कय एना सत्ता प्राप्तिक छटपटाहट मात्र प्रदर्शन कय रहल देखाइछ । ई छटपटी ओकर उपद्रवी चिन्तनक पर्दाफाश कय देलक सेहो कहय मे अतिश्योक्ति नहि होयत ।

गौरपूर्वक अध्ययन कयलापर ज्ञात होइछ जे एकटा सफल सरकार जे भारतीय राजनीति आ राष्ट्र संचालन मे स्थायित्व प्रदान कयलक अछि, ताहि समक्ष घुटना टेकयवला विपक्ष सार्थक भूमिका करय मे अक्षम भ’ रहल अछि । देश परिवर्तनक दिशा मे सरकारक संग कदम सँ कदम मिलाकय चलबाक बदला केना एहि सरकार केँ बदनाम करी, केना देश मे अराजकता आ अशान्ति बढ़य जाहि सँ ई सरकार खसय, बस एतबी सोच हावी देखाइछ ।

झूठ आ कुतर्क सँ लोकक भावना भड़काबय वला कार्य चरम पर भ’ रहल अबस्था मे ‘प्रवीणमन’ निरन्तर अध्ययन-चिन्तन कय रहल अछि । हालहि स्थापित एकटा नव राजनीतिक समूह जे नामहि सँ हँसी आ मसखड़ी वला परिचय दय देलक, तेकर संस्थापक आ प्रवक्ता सभक एकटा साक्षात्कार मे बेर-बेर देशक युवा वर्ग प्रति लक्षित भड़काऊ बात सुनय लेल भेटल । देश मे रहल न्याय आ शासन व्यवस्थाक कार्य केँ भड़कल भीड़ सँ नियंत्रित करबाक सोच हावी देखायल । एक्के टा हड़बड़ी जे कोहुना देश मे आगि लागि जाउक । श्रीलंका, बांग्लादेश आ नेपाल केर कथित विद्रोह-आन्दोलन भारत मे सेहो भ’ जाउक । परिणाम मे देश खत्म भ’ जायत, कोनो परवाह नहि – एहि तरहक कुत्सित मानसिकता सक्रिय देखाइत अछि ।

भारतीय चुनाव आयोग पर पक्षपात आदिक मामिला

विगत किछु दिन सँ भारतीय चुनाव आयोग द्वारा मतदाता नामावलीक पुनर्निरीक्षणक मुद्दा, अत्यन्त काल्पनिक ‘वोट चोरी’ केर मुद्दा, प्रमुख चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मनमानी करबाक मुद्दा आदि विपक्ष द्वारा उठायल गेल अछि । एटम बम फोड़ैत-फोड़ैत हाइड्रोजन गैस जेहेन दुर्गन्ध मात्र छोड़ि पबैत अछि । लेकिन हर बात मे भारत के युवा – भारत के जेन-जी कहि-कहि अपन असन्तुष्टि आ अतृप्तताक प्रतिशोध देशक स्वास्थ्य आ भविष्य सँ खुराफात लेल करैत अछि ।

ई निश्चय ओहेन वैदेशिक शक्तिक षड्यन्त्र थिक जे अपन पैसा खर्च कय केँ दोसर देशक अर्थतंत्र केँ कमजोर करब – छहोंछित करबाक सोच राखब आ अपना केँ कथित विकसित राष्ट्र आ विकसित सभ्यताक लोक सिद्ध करबाक सम्राज्यवादी शक्तिराष्ट्रक सामर्थ्य बरकरार राखयवला सोचक दुष्कर्म कहल जा सकैछ । आम जनता मे एहि सब षड्यन्त्रक जानकारी होयब अत्यन्त जरूरी अछि । ई आगि लगेनिहार सँ स्वयं बचू, देशो केँ बचाउ ।

हरिः हरः!!

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