लेख विचार
प्रेषित: सुष्मिता झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- युवा लोकनिक भविष्यक निर्माणमे सिनेमाक योगदान
चलचित्र केवल पर्दापर चलैत चित्र नहि होइत अछि, बल्कि ओ समाजक मन, समयक सोच आ पीढ़ीक सपना सेहो होइत अछि। सिनेमा हँसाबैतो अछि, रुआबैतो अछि, मुदा सबसँ पैघ बात—ओ सोचबाक लेल विवश करैत अछि। विशेष रूपसँ युवापीढ़ीक मन कोमल माटि जेकाँ होइत अछि; जतेक नीक संस्कार, प्रेरणा आ आदर्श ओहि माटिमे रोपल जाएत, भविष्य ओतेक हरियर बनत। एहि दृष्टिसँ सिनेमा एकटा मौन शिक्षकक भूमिका निभबैत अछि।
आइक युवा काल्हिक भारतक निर्माता छथि। हुनक हाथमे केवल अपन भविष्य नहि, बल्कि समाज आ राष्ट्रक भाग्य सेहो निहित अछि। यदि युवा सही दिशा पबैत छथि, तँ राष्ट्र प्रगतिक शिखर पर पहुँचैत अछि। एही मार्गदर्शनमे सिनेमा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकैत अछि।
“12th Fail” सन फिल्म युवाकेँ सिखबैत अछि जे अभाव, असफलता वा गरीबी सफलता लेल बाधा नहि, बल्कि संघर्षक पहिल पाठ होइत अछि। मनोज कुमार शर्माक जीवनक यात्रा एहि सत्यकेँ प्रमाणित करैत अछि जे सपना ओकरे पूरा होइत अछि, जे हार मानब नहि जनैत अछि।
तहिना “Super 30” केवल एकटा शिक्षकक कथा नहि, बल्कि शिक्षाक शक्ति आ समान अवसरक संदेश अछि। आनन्द कुमारक समर्पण युवाकेँ ई विश्वास दैत अछि जे ज्ञान सभसँ पैघ सम्पत्ति अछि, आ एकटा शिक्षक हजारों जीवन बदलि सकैत छथि।
“Taare Zameen Par” हमर सभकेँ याद दियबैत अछि जे प्रत्येक बालक आ युवा अपनामे अद्वितीय छथि। तुलना नहि, बल्कि प्रोत्साहन आ विश्वासे प्रतिभाकेँ पाँखि दैत अछि। ई संदेश आइक प्रतिस्पर्धी युगमे अत्यन्त आवश्यक अछि।
सिनेमा केवल सफलताक कथा नहि सुनबैत, बल्कि मानवीय संवेदना, परिवारक मूल्य, मित्रता, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम आ समाजक प्रति उत्तरदायित्वक पाठ सेहो पढ़बैत अछि। जखन युवा एहन प्रेरणादायक चलचित्र देखैत छथि, तँ हुनक भीतर एकटा नव विश्वास जन्म लैत अछि—”हमरो जीवन समाज लेल उपयोगी बनि सकैत अछि।”
यद्यपि, प्रत्येक शक्तिशाली माध्यम जेकाँ सिनेमाक दोसर पक्ष सेहो अछि। हिंसा, नशा, अश्लीलता आ भोगवादी जीवनशैलीक अनावश्यक प्रदर्शन युवाकेँ भ्रमित कऽ सकैत अछि। तेँ आवश्यक अछि जे मनोरञ्जनक संग विवेकक संतुलन बनल रहय। जकरा देखैत छी, ओहि सँ सीखबो की, एहि पर विचार करब जरूरी अछि।
अन्ततः, सिनेमा केवल समय बितेबाक साधन नहि, बल्कि भविष्य गढ़बाक शक्ति अछि। यदि चलचित्र युवाकेँ सत्य, परिश्रम, संवेदना, नैतिकता आ राष्ट्रप्रेमक दिशा देखाबय, तँ ओ केवल सफल व्यक्ति नहि, बल्कि आदर्श नागरिक सेहो बनि सकैत छथि। तखन सिनेमा मनोरञ्जनक सीमा पार कऽ समाज-निर्माणक दीप बनि उठैत अछि।
“युवाक हाथमे कलम हो, कर्म हो आ सही प्रेरणा हो—तखन सिनेमा केवल कहानी नहि, भविष्य लिखबाक माध्यम बनि जाएत।”
