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नेटवर्क तकनीकी आ टावरसँ चलैत अछि मुदा संबंध मात्र विश्वास सँ

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लेख विचार
प्रेषित: आभा झा अद्विका
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- बढ़ैत नेटवर्क, घटैत संबंध

आधुनिक युगमे विज्ञान आ तकनीक मनुष्यक जीवनकेँ अत्यन्त सरल बना देने अछि। मोबाइल आ इंटरनेट हमरा संसारक कोनो कोनासँ जोड़ि देलक अछि। क्षणभरिमे संदेश पहुँचि जाइत अछि, दूर रहनिहार लोकसँ बात भऽ जाइत अछि आ सामाजिक माध्यम सँ सैकड़ों-हजारों लोकसँ परिचय भऽ जाइत अछि। मुदा एहि सुविधाक बीच एकटा चिन्ताजनक प्रश्न हमरासभक सामने ठाढ़ अछि—नेटवर्क बढ़ल, मुदा संबंध किएक घटल?

पहिने परिवारक अर्थ केवल एकहि छत तर रहनिहार लोक नहि छल। परिवार अपनत्वक ओहि भावक नाम छल, जतय एक-दोसरक सुख-दुःख साझा कयल जाइत छल। साँझ होइतहि घरक आँगनमे सभ बैसैत छल। बुजुर्ग अपन अनुभव सुनबैत छलाह, बच्चासभ प्रश्न करैत छल आ बड़का सभ प्रेमसँ उत्तर दैत छल। पड़ोसीक घरमे खुशी होइत तऽ अपन घरक खुशी बुझाइत छल आ दुःखमे बिना कहने लोक पहुँचि जाइत छल।

आइ परिस्थिति बहुत बदलि गेल अछि। एकहि घरमे रहैत लोक एक-दोसरासँ दूर भऽ गेल छथि। सभक हाथमे मोबाइल अछि, मुदा एक-दोसरक हाथ पकड़बाक समय नहि। सामाजिक माध्यमपर हजारों मित्र छथि, मुदा मनक बात कहबाक लेल विश्वसनीय व्यक्ति कम पड़ि रहल अछि। हम दूर रहनिहारक गतिविधि पर नजरि रखैत छी, मुदा अपन लगमे बैसल व्यक्ति कतेक चिन्तित अछि, ई पूछबाक समय नहि निकालैत छी।

तकनीक दोषी नहि अछि। दोष हमर उपयोगक तरीका मे अछि। मोबाइल हमरा जोड़बाक साधन छल, मुदा हम ओकरामे एतेक डूबि गेलहुँ जे वास्तविक संबंधसँ दूरी बढ़ि गेल। आभासी दुनिया हमर ध्यान तऽ खींचैत अछि, मुदा अपनत्वक ऊष्मा नहि दऽ सकैत अछि। लाइक, टिप्पणी आ संदेशक संख्या संबंधक गहराइ नहि बतबैत अछि।

संबंधक असली परीक्षा सुखमे नहि, बल्कि दुःखक समयमे होइत अछि। ककरो पोस्टपर ‘बहुत सुन्दर’ लिखि देब सहज अछि, मुदा ओकर कठिन समयमे लग जा कऽ दू घड़ी संग बैसब सच्चा अपनत्व अछि। जन्मदिनपर सामाजिक माध्यमसँ शुभकामना देब नीक अछि, मुदा प्रियजनक आँखिमे आँखि राखि स्नेहक दू शब्द कहब ओकरासँ बेसी मूल्यवान अछि।

एहि लेल परिवारकेँ पुनः संवादक दिस लौटबाक आवश्यकता अछि। भोजनक समय मोबाइलकेँ दूर राखी। प्रतिदिन किछु समय परिवारक संग बिना कोनो पर्दाक बैसी। सप्ताहमे एक दिन मित्र, पड़ोसी आ प्रियजनक संग प्रत्यक्ष भेंट करी। बुजुर्गक बात ध्यानसँ सुनी आ बच्चा सभकेँ समय दी। संबंधमे ‘समय नहि अछि’ कहबाक बदला किछु समय संबंधक लेल सुरक्षित करी।

बच्चा सभकेँ सेहो ई सिखेनाइ आवश्यक अछि जे वास्तविक मित्रता केवल ऑनलाइन परिचय नहि अछि। सच्चा मित्र ओ अछि जे कठिन समयमे संग ठाढ़ रहय। सच्चा परिवार ओ अछि जतय मतभेदक बावजूद अपनत्व जीवित रहय।

याद राखबाक चाही—नेटवर्क टावरसँ चलैत अछि, मुदा संबंध विश्वाससँ। नेटवर्क सिग्नलसँ जुड़ैत अछि, मुदा संबंध संवेदनासँ।

अतः आधुनिकता अपनाबी, मुदा अपन संस्कार नहि छोड़ू। मोबाइल चलाबी, मुदा परिवारसँ बातचीत सेहो करी। संसारसँ जुड़ल रहू, मुदा अपन लोकसँ दूर नहि होऊ।

नेटवर्कक विस्तार हमर उपलब्धि भऽ सकैत अछि, मुदा संबंधक संरक्षण हमर जिम्मेदारी अछि। जीवनक सफलता सैकड़ों सम्पर्कमे नहि, बल्कि किछु एहन आत्मीय संबंधमे अछि जे विपत्तिमे सेहो हमर हाथ नहि छोड़य।

 

 

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