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तकनीकी सुविधाक लाभ उठाबी, परन्तु ओकर गुलाम नै बनी

20 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषक : –  कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- बढ़ैत नेटवर्क आ घटैत संबंध

 

आजुक युग विज्ञान आ तकनीकक युग अछि। विज्ञानक नित नव अविष्कार मानव जीवन के सरल, सुलभ आ द्रुतगामी बना देने अछि। एहि में सभ सँ पैघ क्रान्ति सूचना प्रौद्योगिकी आ संचारक क्षेत्र मे आएल अछि। इंटरनेट, स्मार्टफोन आ सोशल मीडियाक जाल समूचा संसार के एक सूत्र में बान्हि देने अछि। मुदा, एहि सिक्काक एकटा दोसर पहलू सेहो अछि। जतय एक दिस मोबाइलक नेटवर्क गाम-गाम धरि मजबूत भऽ रहल अछि, ओतहि दोसर दिस मानव जीवन सँ आपसी सम्बन्ध, आत्मीयता आ भाईचाराक नेटवर्क लगातार कमजोर भऽ रहल अछि। एहि विडम्बना के आइ “बढैत नेटवर्क, घटैत सम्बन्ध” क रूप मे देखल जा रहल अछि।आभासी दुनियाक मायाजालफेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम आ एक्स जँका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आजुक पीढ़ीक सैकड़ो-हजारो ‘फ्रेंड्स’ आ ‘फॉलोअर्स’ छथि। लोक अपन नीक-बेजाय हर गप्प कए ऑनलाइन साझा करैत छथि। मुदा, एहि आभासी दुनियाक चकाचौंधक पाँछा एकटा पैघ कड़वा सच नुकाएल अछि—अकेलापन। गामक ओ दलान , जतय साँझ पड़िते बूढ़-पुरान सँ ल क नवयुवक धरि जूटि कऽ देश-दुनियाक गप्प करैत छलाह, आब ओ सुनसान देखाइत अछि। आब ओहि दलान पर जँ चारिटा लोग बैसलो रहैत छथि, तँ ओ एक-दोसरा सँ बात करबाक बजाय अपन-अपन मोबाइलक स्क्रीन स्क्रोल करबा में व्यस्त रहैत छथि। कखनो एकटा समय छलैक जखन राति कऽ भोजनक बाद परिवारक सभ सदस्य एक ठाम बैसि कऽ सुख-दुःखक गप्प करैत छलाह। बूढ़ दादी-बाबा सँ बच्चा सभ खिस्सा सुनैत छलाह। मुदा आब, एकहि घरक, एकहि कमरा मेू रहि कऽ परिवारक चारि सदस्य चारि कोना मे अपन-अपन मोबाइल मे बान्हल छथि। माता-पिता आ संतानक बीचक संवाद खत्म भऽ रहल अछि। मैथिली संस्कृति आ मिथिलांचल अपन आत्मीयता आ पाहुन-परक सत्कारक लेल जानल जाइत अछि। मुदा आब पावनि-तिहार, विवाह, मुंडन वा संक्रांति जँका पैघ उत्सव सेहो केवल व्हाट्सएप ‘स्टेटस’ आ फेसबुक ‘लाइव’ धरि सिमटि कऽ रहि गेल अछि। लोकक घर जा कऽ भेट करब आ मैथिलीक मिठास सँ दाई-बौआ करब आब औपचारिकता मात्र बनि गेल अछि। ककरो विवाहक निमंत्रण सेहो आब कार्डक फोटो खींचि कऽ व्हाट्सएप पर पठा देल जाइत छैक , जकरा में ओ आदर आ नेह गायब रहैत अछि जे पहिले ककरो घर जा कऽ न्योत देबऽ में होइत छल। विज्ञान आ तकनीक हमरा सभक सुविधाक लेल अछि, हम ओकर गुलाम बनी ताहि लेल नहीं। जँ हम समय रहैत अपन आदत नहीं बदलव, तँ भविष्यक समाज भावनाशून्य भऽ जाएत। एहि स्थिति सँ उबरबाक लेल हमरा लोकनिकेँ ‘डिजिटल डिटॉक्स क रास्ता अपनाबऽ पड़त।दिनक कुछ घंटा, विशेष रूप सँ साँझ कए परिवारक संग बैसबाक समय मोबाइल कए अपन सँ दूर राखू।भोजनक टेबल पर मोबाइलक प्रयोग पूर्ण रूप सँ वर्जित होयवाक चाही। पावनि-तिहार में मेसेज पठेबाक बजाय, जँ संभव हो तँ लोकक घर जा कऽ भेट करी।अपन बच्चा सभ कए मोबाइल दऽ कऽ शांत करबाक बजाय, ओकरा संग समय बिताउ आ मैदान में खेलबाक लेल प्रेरित करू।नेटवर्क सिर्फ़ मोबाइल के टा मजबूत नहीं होयवाक चाही, बल्कि हृदय के सेहो मजबूत होबक चाही। तकनीक के उपयोग सम्बन्ध के जोड़बाक लेल, दूरी के मिटएबाक के लेल करू, आउ, हम सभ संकल्प ली जे नेटवर्कक संग-संग अपन नेहक सम्बन्ध कए सेहो मजबूत राखब।

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